संपत्तिकर के अतिरिक्त लगेगा अग्निशमन शुल्क, नियमों के दायरे में आएंगे घर, मॉल, हॉल

18 अगस्त 2018 को बना छत्तीसगढ़ अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा अधिनियम, गर्मी में हो सकते हैं अधिनियम के तहत बने नियम लागू, गृह विभाग की पूरी तैयारी

रायपुर. राज्य में संपत्तिकर के अतिरिक्त अग्निशमन शुल्क (फायर टैक्स) भी लगेगा। आगजनी की वारदातों को रोकने के उद्देश्य से 18 अगस्त 2018 को तत्कालीन सरकार ने विधानसभा में छत्तीसगढ़ अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा अधिनियम पारित किया था, लेकिन नियम नहीं बन सका।
अब गृह विभाग इसकी प्रक्रिया में जुटा हुआ है। नियम बनते ही उस पर सरकार की मुहर लगेगी और फिर लागू होगा। अफसरों का दावा है कि इस गर्मी नियम लागू हो जाएंगे। जिसके तहत निकायों को अन्य करों के साथ अग्निशमन शुल्क की वसूली का भी अधिकार होगा। यह शुल्क 'अग्नि निवारण एवं जीवन सुरक्षा निधिÓ में जमा होगा।
प्रदेश में हर वर्ष आगजनी की वारदातों की संख्या बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि सरकार ने नगर निगम से अग्नि शमन शाखा को गृह विभाग के अधीन कर दिया। अब तक १४ जिलों में होमगार्ड अग्नि शमन की जिम्मेदारी संभाल रही है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। छह महीने की जेल और अर्थ दंड भी हो सकता है।
विभाग के अधिकारियों को होगा निरीक्षण का अधिकार
महानिदेशक या नामांकित अधिकारी किसी भी भवन का निरीक्षण कर सकेंगे। अधिकारी व्यवसाय/व्यापार के अनुज्ञप्ति/पंजीयन को निरस्त करने के लिए उच्च अधिकारी को अनुशंसा कर सकेंगे। इसके साथ ही भवन स्वामी या कब्जाधारी को नोटिस जारी किया जाएगा। भवन स्वामी को इस नोटिस के विरुद्ध 30 दिन के भीतर अपील का अधिकार होगा।
आगजनी की घटना के बाद नामांकित प्राधिकारी या विशेष आदेश पर नियुक्त किए गए अग्निशमन अधिकारी जांच करेंगे। देखेंगे कि नियमों का पालन किया गया है या फिर नहीं।
रिपोर्ट के आधार पर महानिदेशक मानव जीवन के लिए खतरा बन चुके भवन को हटाने के आदेश दे सकते हैं। साथ ही भवन सील कर सकते हैं। सील तोडऩे वाले के विरुद्ध तीन माह की जेल और २५ हजार रुपए अर्थदंड का प्रावधान होगा।
तीन साल: 15 जानें गईं
राजधानी रायपुर में बीते तीन साल में आगजनी की सैंकड़ों घटनाएं हुईं। इनमें 15 लोगों को जान गंवानी पड़ी। सबसे चर्चित गोलबाजार स्थित होटल तुलसी है, जहां पांच मुसाफिर जिंदा जले थे।श्रीनगर, भनपुरी और खमतराई के टिंबर मार्केट में हुई घटनाओं में 10 जानें गईं थीं।
एसडीआरएफ एंड फायर ब्रिगेड डीआईजी जीएस दर्रो ने बताया कि नियम बनाने की प्रक्रिया जारी है। कोशिश है कि दो माह के अंदर इसे लागू किया जाए। इसके बाद विभाग के पास नियमों का पालन करवाने का पूरा अधिकार होगा।

Nikesh Kumar Dewangan Desk
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