तलवारबाज भवानी देवी ने लकड़ी की स्टिक से अभ्यासकर तय किया ओलंपिक तक का सफर, जानिए उनके संघर्ष की कहानी

देश की पहली ओलंपियन महिला तलवारबाज भवानी देवी (First Indian Fencer Bhavani Devi) ने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों में प्रतिभा की कमी नहीं है, फिर ओलंपिक जैसे वैश्विक टूर्नामेंट में थोड़े से अंतर से पदक जीतने से चूक जाते हैं। इसका कारण है कि मानसिक और तकनीक रूप से मजबूत नहीं होते।

By: Ashish Gupta

Updated: 21 Aug 2021, 01:45 PM IST

रायपुर/दिनेश कुमार. भारत में तलवारबाजी खेल को नई पहचान दिलाने वाली देश की पहली ओलंपियन महिला तलवारबाज भवानी देवी (First Indian Fencer Bhavani Devi) रायपुर पहुंचीं। अपने रायपुर प्रवास के दौरान भवानी देवी ने पत्रिका से कहा, देश में खेलों की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि उन्हें देश की पहली ओलंपियन तलवारबाज खिलाड़ी बनने का गौरव मिला है। इससे इस खेल को पहचान दिला पाईं। हालांकि वे पदक जीतने से चूक गईं।

भवानी देवी ने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों में प्रतिभा की कमी नहीं है, फिर ओलंपिक जैसे वैश्विक टूर्नामेंट में थोड़े से अंतर से पदक जीतने से चूक जाते हैं। इसका कारण है कि मानसिक और तकनीक रूप से चीन, कोरिया, रूस, इटली जैसे देशों के एथलीट जैसे मजबूत नहीं होते। इस कमी को दूर करने के लिए काम करने की जरूरत है।

प्रश्न: आपका अगला लक्ष्य क्या है?
उत्तर: अक्टूबर में फेंसिंग वल्र्ड कप होने जा रहा है। अभी उसकी तैयारी करूंगी। फिर अगले साल कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में पदक जीतने का लक्ष्य है। सबसे बड़ा लक्ष्य 2024 ओलंपिक में पदक जीतकर सपने को पूरा करना है।

प्रश्न: भारत में तलवारबाजी खेल को कैसे बढ़ावा दिया जाए?
उत्तर: इस खेल की छोटे-छोटे गांवों में काफी प्रतिभाएं है। स्कूल स्तर से खेल प्रतिभाओं की पहचान करने की जरूरत है। उनके लिए छोटी-छोटी जगहों पर ट्रेनिंग सेंटर खोले जाएं और उनके प्रशिक्षक की व्यवस्था करने से देेश में खेल प्रतिभाओं की नई पौध तैयार होगी।

प्रश्न: किस स्तर पर खिलाड़ियों को मदद की सबसे ज्यादा जरूरत होती है?
उत्तर: अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी के समय एथलीट को सबसे ज्यादा आर्थिक और मानसिक सपोर्ट की जरूरत होती है। सरकार को ओलंपिक पोडियम जैसी योजनाओं को विस्तार देने की जरूरत है। उसमें और अधिक एथलीट को शामिल करना चाहिए, जिससे उन्हें अपने प्रशिक्षण के लिए आर्थिक मदद मिल सके। अभी भारत में पदक जीतने के बाद काफी पैसा मिलता है, इसमें कुछ हिस्सा एथलीट की तैयारी में खर्च किया जाएगा, तो हर खेल से पदक जीतने लायक खिलाड़ी मिल सकते हैं।

प्रश्न: आपने कैसे ओलंपिक तक का सफर तय किया?
उत्तर: स्कूल के समय से ही खेलों में जाने का मन था। एक स्पर्धा के दौरान केवल फेंसिंग में जगह खाली थी, इसलिए इस खेल में चली गई। तब से तलवारबाजी खेल में ही मन लग गया। शुरुआती दौर में लकड़ी की स्टिक से अभ्यास किया। 2004 में मैंने फेंसिंग का सेट खरीदा, जिसे मैं खराब होने के डर केवल प्रतियोगिताओं के समय प्रयोग करती थी। अभ्यास स्टिक से ही करती रही। राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के बाद नियमित रूप से तलवार से अभ्यास शुरू किया और आज ओलंपिक तक का सफल तय कर पाई।

प्रश्न: वर्तमान में देश में खेलों की क्या स्थिति है?
उत्तर: अब तो काफी सुधार आया है। एथलीट को आर्थिक मदद के साथ-साथ विदेशों में अभ्यास के लिए भेजा जा रहा है। आने वाले समय में भारत मेे खेेलों का भविष्य काफी अच्छा है।

प्रश्न: नवोदित एथलीट्स के लिए क्या संदेश है?
उत्तर: खेलों में आगे बढऩे के लिए मेहनत बहुत जरूरी है। शॉर्टकट का कोई रास्ता नहीं है। सरकार मदद करने लगी है। अब बस एथलीट को हार्ड वर्क करने और खुद को मानसिक और फिजिकली फिट रखने की जरूरत है। इससे वे अपने आप का पदक जीतने के लायक तैयार कर पाएंगे।

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