वन्य प्राणियों के अवशेष बेचने वाले आरोपियों की फाइल दोबारा खोलेगा वन विभाग

- कारोबारी गुप्ता ब्रदर्स के खिलाफ चल रही थी जांच .
- अफसरों का ट्रांसफर और कोरोना काल की वजह से फाइल अलमारी में कैद .

By: Bhupesh Tripathi

Published: 29 Jun 2020, 08:39 PM IST

रायपुर. शेड्यूल श्रेणी में शामिल वन्य प्राणियों के अवशेष बेचने के मामलें में वन विभाग के आरोपी बने रायपुर के मशहूर कारोबारी रत्नेश कुमार गुप्ता व दुर्गा प्रसाद-शिवकुमार गुप्ता पर सख्ती करने की तैयारी वन अफसर कर रहे हैं। कोरोना काल और अधिकारियों के ट्रांसफर की वजह से गुप्ता ब्रदर्स की फाइल वन विभाग की अलमारी में कैद हो गई थी। रायपुर में पदस्थ डीएफओ को कोराबारी भाईयों के इस कारनामें का पता चला, तो उन्होंने फाइल देखने के बाद मामलें में कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। वन अधिकारियों के अनुसार नए सिरे से जांच होने के बाद आरोपियों पर आगे की कार्रवाई आरोपियों पर की जाएगी।

यह है पूरा मामला
30 अगस्त 2018 को दिल्ली की संस्था पीपुल्स फार एनिमल के एक्टिविस्ट की सूचना पर रायपुर वन मंडल के अधिकारियों ने गोल बाजार में जड़ी बूटी और शक्तिवर्धक दवा बेचने वाले रत्नेश कुमार गुप्ता और दुर्गा प्रसाद-शिवकुमार गुप्ता की दुकान में छापा मारा था। इस दौरान दुकान से प्रतिबंधित लार्ज बंगाल मोनिटर लिजार्ड के 300 प्रजनन अंग (प्रचलित नाम गोह या गोहिया), जंगली बिल्ली की पित्त थैली (वाइल्ड कैट) व सियार (जैकाल) की नाभि समेत प्रतिबंधित समुद्री वनस्पति सी फैन (इंद्रजाल) बरामद किए गए थे।

छापे के बाद रत्नेश कुमार गुप्ता और दुर्गा प्रसाद-शिवकुमार गुप्ता को वन अफसरों ने गिरफ्तार करके न्यायालय में पेश किया, लेकिन अवशेषों की डीएनए रिपोर्ट ना होने से दोनों कारोबारियों को जमानत मिल गई। न्यायालय के निर्देश पर वन अफसरों ने जब्त अवशेषों का हैदराबाद स्थित फोरेंसिक लैब में जांच कराई। ९ माह पहले मिली डीएनए रिपोर्ट ने अवशेष शेड्यूल-1 और 2 श्रेणी में आने वाले वन्य प्राणियों के होने की पुष्टि हुई है।

इन धाराओं के तहत होगी कार्रवाई
वन अधिकारियों के अनुसार प्रतिबंधित लार्ज बंगाल मोनिटर लिजार्ड और सी फैन वनस्पति शेड्यूल- वन और जंगली बिल्ली व सियार शेड्यूल टू में संरक्षित हैं। इन जीवों व वनस्पति के अवैध व्यापार के मामले में वन अफसर धारा-2, धारा-8, 9, 11, 40, धारा-41, 43, 48, 51, 61 और 62 के तहत कार्रवाई करते हैं। कारोबारी भाईयों की गिरफ्तार करने के लिए पूर्व डीएफओ ने तीन अफसरों की टीम बनाई थी। ये टीम भी पूर्व अफसर का ट्रांसफर होने के बाद शांत बैठ गई है।

इस मामलें की जानकारी मेरे पास नहीं थी। मैं वन्य प्राणियों के अवशेषों को बेचने वाले आरोपियों की फाइल मंगाकर देखता हूं। फाइल जांचने के बाद आरोपितों पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बीएस ठाकुर, डीएफओ,रायपुर।

Bhupesh Tripathi
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