बिना लक्षण वाले लोगों के सैंपल नहीं ले रहे पूरा फोकस गंभीर, गर्भवती और बुजुर्गों पर

स्वास्थ्य विभाग के जिलों को नए दिशा-निर्देश

By: Nikesh Kumar Dewangan

Published: 28 May 2020, 07:01 PM IST

रायपुर. प्रदेश में कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इनमें अधिकांश बाहर से आने वाले ही हैं, फिर चाहे वे श्रमिक हों या फिर लॉक-डाउन की वजह से फंसे हुए प्रदेश के अन्य नागरिक। ऐसे में इन सभी की सैंपलिंग जरूरी नहीं है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिला प्रशासन को और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा है कि अब बिना लक्षण वाले ('ए-सिम्प्टोमैटिकÓ) लोगों की सैंपल न लिए जाएं। यानी ऐसे लोग जिन्हें सर्दी, जुखाम, खांसी और बुखार की शिकायत नहीं है न ही उनमें कोई लक्षण दिखाई दे रहे हैं। अब पूरा फोकस लक्षण वाले, गंभीर, गर्भवतियों और बुजुर्गों पर किया जाए। क्योंकि इन्हें ज्यादा खतरा है।
रणनीति में यह बदलाव इसलिए क्योंकि बाहर से आने वाले सभी पर स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, जिला प्रशासन और अन्य विभागों की नजर है। सभी क्वारंटाइन सेंटर में रखे गए हैं। इनसे कम खतरा है क्योंकि ये एक जगह पर हैं। 14 दिन में अगर लक्षण दिखाई देंगे तो सैंपल लेना, जांच करवाना और आईसोलेट करने में मुश्किल नहीं होगी। मगर, गंभीर व्यक्ति, गर्भवती और बुजुर्ग की पहचान करने में चूक हुई तो इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है, क्योंकि इन पर वायरस ज्यादा हावी होता है। क्योंकि इनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।

प्रसव के बाद मालूम चला कि महिला है संक्रमित

'पत्रिकाÓ को राज्य के एक अधिकारी ने बताया राज्य में दो ऐसे प्रकरण सामने आए हैं जिनमें प्रसव के बाद मालूम चला कि महिला कोरोना संक्रमित थी। अच्छा यह रहा कि अस्पताल के स्टॉफ और अन्य लोग संक्रमित नहीं मिले। मगर आगे ऐसे खतरा न हो, इसलिए गर्भवतियों के प्रसव पूर्व कोरोना जांच अनिवार्य की गई है।

59320 सैंपल जांच में 364 संक्रमित

प्रदेश की चार प्रमुख लैब ने बुधवार तक 59,320 सैंपल की जांच की है। जिनमें से 57,282 की रिपोर्ट निगेटिव है। सिर्फ 364 ही संक्रमित पाए गए हैं। अफसरों की दलील है कि लैब में ऐसे भी सैंपल जा रहे हैं जिनमें कोई लक्षण ही नहीं है। जिले अनावश्यक सैंपल ले रहे हैं। इस पर रोक लगाने यह कदम उठाया गया है। छत्तीसगढ़ के अलावा भी कई राज्य हैं जिन्होंने ए-सिम्प्टोमैटिक लोगों के सैंपल लेने पर रोक लगाई है।

इनके सैंपल लेना अनिवार्य

रेड जोन से आने वाले गंभीर व्यक्ति, या फिर जिनमें कोरोना लक्षण दिखाई दें। या 55 साल से अधिक आयुवर्ग के बुजुर्ग जो अन्य बीमारी से ग्रसित हों। या फिर गर्भवती।

डब्ल्यूएचओ ने बताए संक्रमण फैलने के 3 कारण

सिम्प्टोमैटिक- ऐसे लोग जिनमें कोरोना के लक्षण दिखाई दिए, और उन्होंने दूसरों को संक्रमित किया। ऐसे लोग लक्षण दिखने के पहले तीन दिन में संक्रमण फैला सकते हैं।
प्री सिम्प्टोमैटिक- वायरस के संक्रमण फैलाने और लक्षण दिखने के बीच भी कोरोना का संक्रमण फैल सकता है। इसकी समय-सीमा 14 दिन मानी गई है, इसलिए क्वारंटाइन पीरियड भी 14 दिन तक किया गया है।
ए सिम्प्टोमैटिक- ऐसे मरीज जिन्हें सर्दी, जुखाम, खांसी और बुखार की शिकायत नहीं है। लक्षण दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्हें पता ही नहीं है वे कोरोना संक्रमित हैं। या फिर ऐसे लोग जो दूसरे राज्यों से आए हैं यानी प्रवासी मजदूर। ऐसे लोग खतरनाक साबित हो सकते हैं। तब जब वे क्वारंटाइन में न हों।

स्वास्थ्य विभाग के राज्य सर्विलेंस अधिकारी एवं प्रवक्ता डॉ. धमेंद्र गहवईं ने बताया कि बाहर से आने वाले सभी लोगों पर निगरानी रखी जा रही है। सभी क्वारंटाइन किए जा रहे हैं। अब उन्हीं लोगों के सैंपल लिए जा हैं, जो गंभीर हैं या फिर जिनमें लक्षण दिखाई दे रहे हैं। बाकियों पर नजर रख रहे हैं।

Nikesh Kumar Dewangan Desk
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