फुलवारी फाइन धान की खेती से हुई समृद्धि, अब दूसरों को दे रही रोजगार

कोरबा के केरवाद्वारी की फुलवारी कंवर बनी लोगों की प्रेरणा

By: ramendra singh

Updated: 27 Jul 2020, 12:40 AM IST

रायपुर . गुलाबी साड़ी में मुस्कुराती फुलवारी बाई कंवर के नाक में दोनो तरफ सोने की बड़ी-बड़ी फुल्लियां और उन पर लगे हरे और लाल रंग के नग...। फुलवारी कोरबा जिले के करतला विकासखण्ड के वनांचल स्थित केरवाद्वारी गांव पहुंचने वाले लोगो को अनायास ही अपनी तरफ आकर्षित करती है। पीपलरानी पहाड़ की तलहटी के नीचे वन भूमि पर पूर्वजो के जमाने से खेती करते रहने के कारण फुलवारी बाई को वन अधिकार मान्यता पत्र(पट्टा) मिलने से जमीन का मालिकाना हक मिल गया है। एक पट्टे ने फुलवारी और उसके परिवार की जिंदगी में ऐसा परिवर्तन ला दिया है कि वह लोगो के लिए प्रेरणा बन गई है। वन अधिकार मान्यता पत्र से मिली लगभग एक एकड़ जमीन को मिला कर फुलवारी बाई के पास लगभग पौने तीन एकड़ का खेत है। इस खेत पर चालू खरीफ में फुलवारी ने पतला धान एचएमटी रोपा पद्धति से लगाया है। पहले दूसरो के खेतो में काम करने जाने वाली फुलवारी ने अपने खेत मे रोपा लगाने के लिए गांव के ही दस लोगो को दैनिक मजदूरी पर काम पर लगाया है।

पूर्वजों की 100 साल की विरासत
सौम्य और मिलनसार व्यवहार के लिए गांव में मशहूर फुलवारी बाई बताती है कि उनके पूर्वज अमूमन सौ साल से केरवाद्वारी के इस वनांचल में जंगल साफ करके खेती किसानी करते आ रहे थे। ससुर दयाराम से लेकर पति मानसिंह कंवर तक बरसों से अपने पसीने से वे जिस माटी को सींचते आए है, उस माटी के छिन जाने का डर हमेशा फुलवारी एवं उसके परिवार के जहन में बना रहता था। फुलवारी बताती है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने इस वनभूमि का पट्टा देकर उसके और उसके जैसे कई परिवारों की जिंदगी बदल दी है। पिछले दो सालो से फुलवारी अपने इस खेत में पतला धान लगा रही है। इस बार भी उन्होने खेत मे एचएमटी धान का रोपा लगवाया है। पहले दूसरो के खेत में रोपा लगाने जाने वाली फुलवारी अब गांव के दूसरे लोगो को दैनिक मजदूरी पर काम पर रख रहीं है।

नलकूप लगाने की सोच रही फुलवारी
फुलवारी अब अपने खेत में सिंचाई के लिए सौर सुजला योजना के तहत नलकूप भी बनवाने की सोंच रही है। भावुक होकर फुलवारी कहती है कि सौ सालो से जिस जमीन पर खेती कर रहे है, उसका मालिकाना हक नहीं मिलता तो साल के सत्तर-अस्सी हजार का नुकसान लगातार होता रहता। पट्टा मिलने से जमीन तो हमारी हो गई है अब हमारे पसीने की कमाई भी हमें समय पर मिल जाती है। इसी से पति का इलाज और बच्चों की पढ़ाई सहित दूसरी जरूरते पूरी करने में अच्छी मदद हो जाती है।

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