पीडीएस घोटाले में एफआईआर के बाद मचा हड़कंप, सभी अधिकारियों से पूछताछ की तैयारी

राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) में पीडीएस घोटाले में एफआईआर दर्ज होते ही खाद्य विभाग के अफसरों में हड़कंप मच गया है। इस मामले में तत्कालीन अफसरों को पूछताछ के लिए बुलाने की तैयारी चल रही है। इसके लिए ईओडब्ल्यू की टीम सूची तैयार करने में जुट गई है। इसके बाद उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा। पूछताछ के बाद ही घोटाले में उनकी भूमिका तय की जाएगी।

By: Dhal Singh

Published: 19 Mar 2020, 01:59 AM IST

रायपुर. बताया जाता है कि प्राथमिक जांच के दौरान ही 14.80 लाख फर्जी राशनकार्ड बनाए जाने का सुराग मिला है। इस खेल में पर्दे के पीछे दर्जनों रसूखदार लोग शामिल हो सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि संचालनालय खाद्य विभाग रायपुर के अधिकारियों के साथ ही मैदानी इलाकों में तैनात अमला इसमें संयुक्त रूप से शामिल था। अपने पद का दुरुपयोग कर आपराधिक षड्यंत्र कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बोगस राशनकार्ड का निर्माण किया गया था। इन फर्जी राशन कॉर्ड के आधार पर प्रतिमाह करोड़ों रुपए की हेरीफेरी की गई थी। बताया जाता है कि इसके कनेक्शन 36000 करोड़ रुपए के नान घोटाले से जुड़े हुए हैं।


यह है बोगस राशनकार्ड का आधार

आर्थिक सामाजिक जनगणना 2011 के अनुसार प्रदेश में 56 लाख 50 हजार 724 परिवार थे। इसके आधार पर यदि 20 फीसदी सामान्य परिवारों की संख्या कम कर पात्रता अनुसार राशनकार्ड बनाए जाते तो लगभग 45 लाख राशनकार्ड होना चाहिए था, लेकिन वर्ष 2013 के अंत तक कुल 71 लाख 30 हजार 393 राशनकार्ड बनाए गए। इससे लगभग 14.80 लाख राशनकार्ड बोगस बनाए गए।


एेसे हुई चावल की हेराफेरी

सितंबर 201& एवं अक्टूबर 2013 में 72.30 राशनकार्ड के लिए 2,23968 एमटी और 2,27020 मीट्रिक टन चावल का आबंटन जारी किया गया था। इसके बाद नवंबर और दिसंबर 201& में 70.66 लाख और 70.62 लाख राशनकार्ड के लिये 2,18974 एमटी और 2,23401 मीट्रिक टन चावल जारी किया गया था। ईओडब्ल्यू का मानना है कि यदि प्रदेश के सभी परिवारों का राशनकार्ड बना दिया जाता, तो उसकी संख्या 56 लाख से अधिक नहीं हो सकती। इससे यह स्पष्ट होता है कि लगभग 15 लाख राशनकार्डों में जो चावल वितरित होना दिखाया गया है वह खुले बाजार में ऊंची कीमत में बिकवाया गया था। वहीं खाद्य विभाग ने सितम्बर 2013 से दिसम्बर 2013 तक लगभग 70 लाख से अधिक राशनकार्डों पर चावल एवं अन्य वस्तु का आवंटन किया गया बताया गया है। जबकि इस अवधि में 62 लाख से अधिक राशनकार्ड छापे ही नहीं गए थे।
2718 करोड़ की हेराफेरी

अप्रैल 201& से दिसबंर 2016 तक निरस्त राशनकार्डों में वितरित चावल की सब्सिडी की गणना की गई थी। इसमें 11,08,515 टन चावल निरस्त राशनकार्डों पर वितरित किया गया था। इसके कारण राÓय शासन को 2718 करोड़ रुपए की हानि हुई। जबकि फर्जी राशनकार्डों के जांच की जिम्मेदारी, खाद्यान्न के राशन दुकानों तक पहुंचाने और वितरण के सत्यापन का दायित्व संचालनालय खाद्य विभाग रायपुर के साथ -साथ जिलों में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारी के साथ परिवहनकर्ता एजेन्सी का था।

Dhal Singh Desk
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