गंगा की अविरलता का मामला छत्तीसगढ़ की धरती से भी जुड़ा, पढ़िए ये रिपोर्ट

गंगा की अविरलता का मामला छत्तीसगढ़ की धरती से भी जुड़ा, पढ़िए ये रिपोर्ट

Chandu Nirmalkar | Publish: Oct, 13 2018 05:11:28 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

गंगा की अविरलता का मामला छत्तीसगढ़ की धरती से भी जुड़ा, पढ़िए ये रिपोर्ट

रायपुर. वैज्ञानिक, पर्यावरणविद और संत स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद गंगा को बचाने की लड़ाई में जिंदगी से हार गए। उन्होंने गंगा को अविरल बहने देने की मांग को लेकर 111 दिनों का लंबा उपवास किया। प्रमुख रूप से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से गुजरने वाली गंगा की अविरलता का मामला छत्तीसगढ़ की धरती से भी जुड़ा हुआ है। करीब 8 लाख 61 हजार 404 वर्ग किमी का गंगा नदी घाटी क्षेत्र 11 राज्यों उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ झारखंड और पश्चिम बंगाल तक फैला हुआ है।

गंगा का 18 हजार 406.65 वर्ग किमी अर्थात कुल 1.69 प्रतिशत जलग्रहण क्षेत्र छत्तीसगढ़ के सरगुजा और बिलासपुर संभागों में पसरा है। अमरकंटक पठार से निकली सोन और उसकी सहायक नदियों कनहर, रिहंद, गोपद, बनास और बीजल का पानी आगे चलकर गंगा की धारा बन जाता है। संरक्षण विशेषज्ञों का कहना है, गंगा की अविरलता में थोड़ी ही सही हमारी भी जिम्मेदारी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

यहां दो बड़ी नदियां
रिहंद - यह अम्बिकापुर के पास मतिरंगा पहाड़ी से निकलती है। करीब 145 किमी लंबी यह नदी उत्तर प्रदेश में रेनुकूट के पास सोन में मिल जाती है। महान, घुनघुट्टी, मोरनी, सूर्या, गिबरी, गेउर, गागर, गोबरी, पिपरकचर और रमदिया इसकी सहायक नदियां हैं। रिहंद पर उत्तर प्रदेश में गोविंद वल्लभ पंत सागर बड़ी बांध परियोजना है। महान पर सूरजपुर में महान परियोजना और घुनघुट्टी पर सरगुजा जिले में श्याम परियोजना बनी है।

कनहर - जशपुर जिले की बखौना पहाड़ी से निकली यह नदी सोन नदी में मिलती है। 115 किमी लंबी यह नदी छत्तीसगढ़ और झारखंड की सीमा रेखा है। सेंदुर, गलफुला और पेंगन इसकी सहायक नदियां हैं। कनहर नदी पर उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में कनहर परियोजना बन रही है। इसके डुबान क्षेत्र में बलरामपुर जिले के भी गांव आ रहे हैं। झारखंड में भी इस नदी पर एक बैराज बनाने की कोशिश हो रही है।

नदी घाटी पर बढ़ा है दबाव
छत्तीसगढ़ नदी घाटी मोर्चा के संयोजक गौतम बंद्योपाध्याय बताते हैं कि उत्तर छत्तीसगढ़ की नदियों पर इस समय भारी दबाव है। वनों की कटाई, खनिजों का अंधाधुंध दोहन और रेत खदानों ने जलग्रहण क्षेत्र और बहाव को प्रभावित किया है। यह दबाव नदी के बाढ़ मैदानों में अवरोध खड़ा करने से भी बढ़ा है। बंद्योपाध्याय कहते हैं, सानंद के अनुत्तरित रह गए सवाल हमारे भी सवाल हैं। वे पूछते हैं कि क्या 26 बड़ी नदियों वाले प्रदेश में नदी कोई मुददा नहीं है।

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