डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना: सरकारी अस्पताल में इलाज कराकर सरकार बचाएगी 350 करोड़ रुपए

मोतियाबिंद सर्जरी, दंतरोग के पैकेज व सामान्य प्रसव में सर्वाधिक भुगतान

रायपुर. डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना के जरिए सरकार ने निजी अस्पतालों के खातों में जा रहे करोड़ों रुपए को बचाने का फुल-प्रूफ प्लान बनाया, जिसके तहत काम शुरू भी हो चुका है। पहली कड़ी में दंतरोग के सभी पैकेज को सरकारी अस्पतालों के लिए आरक्षित किया, इसके तुरंत बाद मोतियाबिंद सर्जरी को भी। निजी अस्पतालों में कैशलेस प्रसव के प्रावधान को भी समाप्त कर दिया गया। कॉर्डियोलॉजी, कॉर्डियक थोरोसिक सर्जरी, न्यूरोसर्जरी, नेफ्रोलॉजी, हड्डी रोग और स्त्री रोग से संबंधित बीमारी के इलाज के कुछ पैकेज को सरकारी अस्पताल के लिए आरक्षित किया गया है। इन सबसे सरकार को करीब ३५० करोड़ रुपए के बचत का अनुमान है।
मरीजों की निजी अस्पतालों पर कम सरकारी अस्पतालों पर ज्यादा निर्भरता हो, इस पर काम किया जा रहा है। बचत की राशि सरकारी अस्पतालों के उन्नयन, डॉक्टर और स्टाफ की नियुक्ति में खर्च की जाएगी। हालांकि नई नीति से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और हॉस्पिटल बोर्ड लगातार आक्रोशित हैं। आक्रोश की वजह निजी अस्पतालों के लिए इलाज के पैकेज को कम करना और पैकेज की राशि को घटना है।
बीमा योजना पर थी आपत्ति
पूर्व में आरएसबीवाई व एमएसबीवाई के तहत अनुंबधित बीमा कंपनी को ५६ लाख परिवार के हिसाब से प्रति परिवार ११०० रुपए के सालाना प्रीमियम का भुगतान हो रहा था। वर्तमान सरकार को इस पर आपत्ति थी। कहा गया कि पूरे ५६ लाख परिवार इलाज करवाते ही नहीं, तो क्यों बीमा व्यवस्था को लागू रखा जाए।
अभी तक 180 पैकेज हुए आरक्षित
प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के लिए सरकार ने 180 बीमारियों के इलाज के पैकेज निर्धारित किए हैं। ये वे सभी बीमारियां हैं, जिनके इलाज की संपूर्ण व्यवस्था सरकारी अस्पतालों में हैं। जैसे मोतियाबिंद सर्जरी, दंतरोग और सामान्य प्रसव पूरी तरह से सरकारी अस्पतालों के लिए ही आरक्षित कर दी गई हैं। इसी सूची में कई हार्ट, लिवर, जनरल सर्जरी, न्यूरो सर्जरी के भी पैकेज हैं।
योजना के तहत पंजीयन शुरू- डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत निजी अस्पतालों के पंजीयन के लिए पोर्टल खोल दिया है। देखना दिलचस्प होगा कि कितने अस्पताल योजना में काम करना चाहते हैं और कितने नहीं।
डॉ. खूबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना के राज्य नोडल अधिकारी, डॉ. श्रीकांत राजिमवाले ने बताया कि सरकारी अस्पतालों को सुविधा संपन्न बनाने की कोशिश जारी है,ताकि मरीजों को लौटना न पड़े। सरकारी अस्पताल के लिए पैकेज आरक्षित होने से निजी अस्पतालों में होने वाला भुगतान बचेगा।

Nikesh Kumar Dewangan Desk
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