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राज्यपाल के दो साल पूरे, बोलीं - 'मैं सकारात्मक हूं, हर स्तर पर हो राज्य का विकास, टकराव जैसी बातें मायने नहीं रखतीं'

राज्यपाल अनुसुईया उइके ने अपना दो साल का कार्यकाल पूरा करने पर पत्रिका से सीधी बातचीत में ये बातें कही। माओवादी समस्या के सवाल पर राज्यपाल उइके का मानना है कि माओवाद प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को विश्वास में लेने की जरूरत है।

रायपुर

Published: July 29, 2021 02:57:13 pm

रायपुर. मेरा यह हमेशा प्रयास रहा है कि राज्य का विकास हर स्तर पर हो। खासतौर पर आदिवासी अंचल के लोगों का। आखिरी व्यक्ति तक राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं सही मायने में पहुंचने पर ही विकास माना जाता है। अभी ऐसा नहीं है। वनों में रहने वालों की समस्याओं का समाधान होना चाहिए, उन्हें संविधान में जो अधिकार मिला हुआ है। इस मामले में मैं पूरी तरह से सकारात्मक हूं, किसी तरह के टकराव जैसी बातों पर यकीन नहीं करती। अपने इन दो सालों के कार्यकाल में सुकमा, कोंटा, पेंड्रा, गरियाबंद जैसे क्षेत्रों तक गई। राज्य सरकार को कई सुझाव दिए, उस पर अमल भी हुआ है। लोगों को अधिकार दिलाने के लिए हमेशा तत्पर रहूंगी।
Governor Anusuiya Uikey
राज्यपाल के दो साल पूरे, बोलीं - 'मैं सकारात्मक हूं, हर स्तर पर हो राज्य का विकास, टकराव जैसी बातें मायने नहीं रखतीं'
राज्यपाल अनुसुईया उइके ने अपना दो साल का कार्यकाल पूरा करने पर पत्रिका से सीधी बातचीत में ये बातें कही। माओवादी समस्या के सवाल पर राज्यपाल उइके का मानना है कि माओवाद प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को विश्वास में लेने की जरूरत है। क्योंकि आदिवासी समाज के भोले-भाले युवाओं को बहला कर माओवादी अपने साथ लेते हैं, इसे रोकना होगा। यह तभी संभव है, जब उन क्षेत्रों के विकास में ग्राम पंचायतों को शामिल किया जाए, उनकी राय ली जाए। बस्तर क्षेत्र के दौरे के दौरान उनके सामने लोगों ने पेसा कानून की बातें रखी। इसलिए मैं कहती हंू कि संविधान में आदिवासियों को जो अधिकार मिला हुआ है, उस पर अमल होना ही चाहिए। यदि उनकी जमीन में उद्योग लगे तो उसमें वहां के लोग शेयर होल्डर हो। इससे लोग विकास के मुख्यधारा में जुड़ेंगे। लोगों को अधिकार दिलाने का प्रयास हमेशा करती रहूंगी। सरकार को कई सुझाव दिया है।
धर्मांतरण बड़ी चुनौती
राज्यपाल का मानना है कि राज्य के वनांचल क्षेत्रों में धर्मांतरण रोकने की दिशा में राज्य सरकार को ठोस कदम उठाना चाहिए। कोरोनाकाल में धर्मांतरण तेजी से बढ़ा है। इस तरह की शिकायतें उन तक भी पहुंची हैं। कोरोना आपदा से लोगों के सामने गंभीर आर्थिक संकट में मदद पहुंचाकर धर्मपरिवर्तन कराने का जायदा उठाया जा रहा है। इस मामले को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
छात्रों का भविष्य पहली प्राथमिकता
चंदूलाल चंद्राकर मेडिकल कॉलेज के अधिग्रहण विधेयक के सवाल पर राज्यपाल उइके ने कहा कि छात्रों का भविष्य उनकी पहली प्राथमिकता है। परंतु पूरी स्थितियां स्पष्ट होनी चाहिए कि एमसीआई से मान्यता नहीं होने पर छात्रों की पढ़ाई कहां, कैसे होगी, उनकी परीक्षाएं कैसे ली जाएंगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भेजी हूं।
राजभवन की पाबंदियां कभी आड़े नहीं आईं
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का संतोष है कि राजभवन की पाबंदियों को कभी आम लोगों के लिए बाधा नहीं बनने दिया। सबके लिए हमेशा राजभवन का दरबाजा खुला रखा। नतीजा, इन दो सालों में हर समाज से 15 से 20 हजार लोगों ने मुलाकातें की हैं। जिनकी जो समस्याएं मिलीं, उसके निराकरण के लिए हमेशा प्रयास किया। कई बार बस्तर, सरगुजा जैसे क्षेत्रों से समाज के लोग या संगठन के प्रतिनिधिमंडल बिना अनुमति लिए राजभवन पहुंचे, परंतु उन्हें वापस नहीं जाना पड़ा, सबकी समस्याओं को सुना।
कोरोनासंकट में सबका साथ मिला, परंतु अभी हल्के में न लें
राज्यपाल उइके ने चर्चा के दौरान कहा कि एक साल का समय तो कोरोना संकट में ही बीत गया। उन्होंने कोरोना से अपनों को खोने वाले परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस आपदाकाल में वे लगातार सक्रिय रहीं। उनकी अपील पर अनेक संगठनों ने पूरा साथ दिया है। उन्होंने खुद कोरोना वैक्सीन के भ्रम को दूर करने के लिए वर्चुअल तरीके से राज्य के आदिवासी क्षेत्रों से जुड़कर लोगों को जागरूक किया। विश्वविद्यालयों के अधिकारियों को 18 वर्ष से ऊपर के छात्रों को वैक्सीनेशन कराने निदेर्शित किया है। अभी तीसरी लहर का खतरा है, इसे हल्के में लेना ठीक नहीं होगा।

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