बैगिन दाई मनोरथ पूरा करथे

बैगिन दाई मनोरथ पूरा करथे

Gulal Prasad Verma | Publish: May, 17 2018 08:06:16 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

आवव मोर गांव

चांपा नगर म गांव देवता के रूप म ठाकुरदेव, हरचन लाल, ठाकुराईन दाई अउ बन दुरगा के पूजा होथे। नगर के कुलदेवी के रूप म समलाई दाई के पूजा होथे। ये सब देवी-देवतामन के बीच म बैगिन दाई के घलो अलगेच पहिचान अउ महिमा हे।
बैगिन दाई के छोटकन मंदिर कदंब चऊंक म बने हावय। ये मंदिर म कहुं के मूरति नइये। मंदिर के भीतर म एकठन पथरा हावय जउन म सिंदूर बंदन पोताय हावय नवरात म ये मंदिर के महिमा जादा बाढ़ जाथे। जब समलाई दाई के मंदिर ले मांदर झांझ मंजीरा के संग जसगीत गावत जंवारा कलस यातरा बिसरजन बर बंधवा तरिया (राम बांधा तरिया) कोती निकलथे त ये मंदिर म पूजा पाठ करे बिना आगू नइ बढय़। ये ठऊर म बैगामन देवी दाई के मान-मनऊवल करके जंवारा बोहइयामन ल आगू बढ़ाय बर बिनती करथे।
ये बैगिन दाई मंदिर म रोज पूजा करे बर कहूं पुजारी नइ लगे हे। तेकरे सेती इहां पंजाबी महिला बिंदू सलूजा ह रोज संझा बिहनिया पूजा करथे। मंदिर म पूजा-पाठ करे के धुन कइसे चघिस, ये सुवाल के जवाब म बिंदू सलूजा बताथे के जब मेहा बिहाव के बाद इहां आंय त देखें के ये मंदिर के पूछपरख नवरात के परब म भर होथे। बाकी दिन कोनो सुध लेवइया नइ रहय। इही बात ह मोर मन म खटक गीस। फेर संझा -बिहनिया पूजा करे बर सुरू कर देंव। जतका मोला सुख, सांति गुरुद्वारा म सेवा कारज करे ले मिलथे वोतके बैगिन दाई के पूजा-पाठ करे ले मिलथे।
बैगिन दाई के टूटे-फूटे मंदिर ल विजय सलूजा ह नवा बनवाय हावय। जुन्ना मंदिर म बैगिन दाई लिखाय रहिस, ऐकरे खातिर नवा मंदिर म घलो बैगिन दाई लिखाय हे। कतकोन झन ये मंदिर ल ठाकुरदेव के मंदिर घलो कहिथें।

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