भूने चने पर 5 फीसदी GST हुआ खत्म, छत्तीसगढ़ के लोगों को ऐसे मिलेगा बड़ा लाभ

भूने चने पर 5 फीसदी GST हुआ खत्म, छत्तीसगढ़ के लोगों को ऐसे मिलेगा बड़ा लाभ

Chandu Nirmalkar | Updated: 21 Sep 2019, 09:12:31 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

GST Council Meeting: जिसके बाद केंद्र सरकार (Central govt) ने भूने चने को कर मुक्त कर एचएसएन कोड- 0713 में रखा है

रायपुर. भूने चने पर केंद्र सरकार ने 5 फीसदी जीएसटी खत्म (5 Percent GST) कर दिया गया है। प्रदेश के वाणिज्यिक कर मंत्री (राज्य जीएसटी) टीएस सिंहदेव (Minister TS Singhdeo) व वाणिज्यिक कर आयुक्त रीना बाबा साहेब कंगाले ने 20 सितम्बर को नई दिल्ली में आयोजित जीएसटी काउंसिल (GST Council meeting) की अहम बैठक में यह प्रस्ताव रखा, जिसके बाद केंद्र सरकार (Central govt) ने भूने चने को कर मुक्त कर एचएसएन कोड- 0713 में रखा है।

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर परवानी व प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष विक्रम सिंहदेव ने बताया कि भूना चना सामान्य तौर पर चने का एक परिष्कृत रूप है। इससे पहले कैट छत्तीसगढ़ चैप्टर ने राज्य वाणिज्यिक कर मंत्री टीएस सिंहदेव से मुलाकात करते हुए भूने चने पर टैक्स में छूट की मांग रखी थी, जिसके बाद मंत्री ने आश्वासन दिया था कि वह इस मांग को केंद्रीय जीएसटी काउंसिल की बैठक में रखेंगे। इस पहल के बाद देशभर में भूने चने पर टैक्स से राहत दी गई है।

छत्तीसगढ़ में इसका बड़ा लाभ मिलेगा। भूने चने में तलने की प्रक्रिया नहीं होती है। इसमें तेल या मसाले का उपयोग नहीं किया जाता है। यह एक सस्ता उत्पाद है। इसका उपयोग सत्तू बनाने में भी किया जाता है, जो कि टैक्स फ्री है, लेकिन चने में 5 फीसदी टैक्स की वजह से यह महंगा हो गया था। इसका उपयोग सत्तू के रूप में आंगनबाड़ी कायकर्ताओं द्वारा गर्भवती महिलाओं व शिशुओं को शासन द्वारा उपलब्ध कराया जाता है। भूने चने सर्वहारा वर्ग का खाद्य पदार्थ है। केंद्र सरकार के इस निर्णय से आम आदमी को सीधा इसका लाभ मिलेगा।

सूखे इमली में भी टैक्स खत्म

कैट छत्तीसगढ़ चैप्टर ने सूखी इमली में भी टैक्स खत्म करने की मांग रखी थी, जिसका प्रस्ताव भी राज्य जीएसटी मंत्री के माध्यम से जीएसटी काउंसिल में रखा गया है, वहीं यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया गया है। कैट की तीसरी मांग भी केंद्र की जीएसटी काउंसिल ने पूरी कर दी है। इसके अंतर्गत 2 करोड़ रूपए टर्नओवर तक कारोबारियों को वित्तीय वर्ष 2017-18 व वित्तीय वर्ष 2018-19 का रिटर्न दाखिल करने से राहत मिलेगी।

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