GST सिस्टम पर उठे सवाल, इस सॉफ्टवेयर से व्यापारी धड़ल्ले से कर रहे टैक्स चोरी

GST सिस्टम पर उठे सवाल, इस सॉफ्टवेयर से व्यापारी धड़ल्ले से कर रहे टैक्स चोरी

Ashish Gupta | Publish: Sep, 05 2018 06:00:13 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

'पत्रिकाÓ की पड़ताल में सामने आया कि यह महज 1500 से 2000 रुपए कीमत के एक अदने से कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर का कमाल है। जिसकी मदद से धड़ल्ले से टैक्स चोरी हो रही है।

अजय रघुवंशी/रायपुर. यह जरूरी नहीं कि आप जिस खरीदारी के एवज में गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स (जीएसटी) दुकानदार को चुका रहे हैं, वह सरकारी खजाने में ही जाए। आपके हाथ में बाकायदा खरीदी गई वस्तु की रसीद होगी, जिसमें वस्तु की कीमत और चुकाए गए टैक्स का ब्योरा होगा। इसके बावजूद आम ग्राहक यह नहीं पकड़ सकता कि इसमें किस तरह घोटाला हो गया है।

'पत्रिका' की पड़ताल में सामने आया कि यह महज 1500 से 2000 रुपए कीमत के एक अदने से कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर का कमाल है। पिछले दिनों इसे राज्य के वाणिज्यिक कर विभाग ने पकड़ा। इस खेल के पकड़ में आने के बाद जीएसटी प्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। मालवीय रोड स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स और बर्तन दुकान में 25 लाख रुपए की टैक्स चोरी इसी सॉफ्टवेयर की मदद से की गई। राज्य कर (वाणिज्यिक कर विभाग) द्वारा दुकान में छापेमारी के बाद यह खुलासा हुआ।

जीएसटी लागू तो कर दिया गया, लेकिन केंद्र और राज्य सरकार ने ऐसा कोई सरकारी सॉफ्टवेयर लांच नहीं किया है, जिसमें व्यापारियों के लिए एक सॉफ्टवेयर में ही रिटर्न दाखिल करने की बंदिश हो। वर्तमान में व्यापारी मनचाहे संस्था संपर्क कर बिलिंग के लिए सॉफ्टवेयर अपलोड करा रहे हैं। इस पर रोक भी नहीं है।

सॉफ्टवेयर की बिक्री बेरोकटोक
पड़ताल में सामने आया कि बाजार में जीएसटी में गड़बड़ी करने वाले सॉफ्टवेयर बेरोकटोक बिक रहे हैं। वहीं, प्रोग्रामर टैक्स चोरी का हुनर डीलर्स को सीखा रहे हैं। बाजार में सस्ते दर पर जीएसटी सॉफ्टवेयर की बिक्री को लेकर कई दुकानें संचालित है, जहां कम्प्युटर प्रोग्रामार व्यापारियों को हर महीने मेंटेनेंस, सर्विस के साथ सस्ते दर पर बेहतर सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराने का वादा कर रहे हैं। डीलर्स अपनी मर्जी से प्रोग्रामर से कम्प्युटर में ऐसे प्रोग्राम फीड करवाता है, जिससे व्यापारी के चाहने या ना चाहने पर ही टैक्स सरकार को जाएगा।

जीएसटी रिटर्न सवालों में
विभाग को शक है कि जीएसटी लागू होने के छह महीने बाद से सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर टैक्स चोरी की शुरुआत हो चुकी थी। इस पूरे मामले में अब जीएसटी रिटर्न ही सवालों के घेरे में आ चुका है, क्योंकि यदि 10 लाख की बिक्री हुई है तो विभाग को सिर्फ 4 या 5 लाख का ही रिटर्न पेश किया गया।

आयुक्त राज्य कर (वाणिज्यिकर कर विभाग) पी. संगीता ने कहा कि विभागीय जांच जारी है। इस संबंध में दस्तावेजों की जांच-पड़ताल की जा रही है। प्रकरण में विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।

इन संस्थानों में फर्जीवाड़े की आशंका
- मल्टी-चेन रिटेल
- रेस्टोरेंट
- होटल
- ग्रोसरी

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