आयुर्वेद की दवाईयां इम्युनिटी वर्धक हो सकती हैं, लेकिन यह इलाज नहीं है- स्वास्थ्य मंत्री

केंद्रीय मंत्रालय ने जो गाइड-लाइन दी है, प्रदेश में उसी के आधार पर कोरोना मरीजों का इलाज किया जा रहा है। आगे जो भी नई गाइड-लाइन आएंगी, उसके आधार पर इलाज करेंगे। सरकार इस बात को लेकर पूरी तरह से तटस्थ है कि ऐलोपैथी की दवा ही कारगर है।

By: Karunakant Chaubey

Published: 24 Jun 2020, 07:03 PM IST

रायपुर. बाबा रामदेव की कंपनी पतजंलि आयुर्वेद ने कोरोना वायरस के इलाज के लिए जो कथित दवा इजात की है, वह विवादों में घिर गई है। सवाल इसकी प्रमाणिकता पर उठ रहे हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने पूरी तरह से यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक कि केंद्र सरकार और आईसीएमआर इसे प्रमाणित नहीं करती है, तब तक सरकार इसकी बिक्री पर मंजूरी नहीं देगी। स्वास्थ्य मंत्री ने 'पत्रिका' से बातचीत में यह भी साफ किया है कि आयुर्वेद की दवा सिर्फ इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाने के लिए है, इससे इलाज की कोई प्रमाणिकता नहीं है। जैसे की योग।

मंत्री सिंहदेव का कहना है कि एम्स और अन्य अस्पतालों में दवा दी जाती है, वैसे ही आयुर्वेद की दवा भी दी जा सकती है। उसने जब यह पूछा गया कि गुजरात, मध्यप्रदेश और दिल्ली में आयुर्वेद अस्पतालों में मरीजों को भर्ती किया जा रहा है और मरीज ठीक भी हो रहे हैं तो बोले, आप अगर सिर्फ यह कहें कि आयुर्वेद की दवा से कोरोना का इलाज हो, तो प्रदेश मेंयह फिलहाल संभव नहीं है।

केंद्रीय मंत्रालय ने जो गाइड-लाइन दी है, प्रदेश में उसी के आधार पर कोरोना मरीजों का इलाज किया जा रहा है। आगे जो भी नई गाइड-लाइन आएंगी, उसके आधार पर इलाज करेंगे। सरकार इस बात को लेकर पूरी तरह से तटस्थ है कि ऐलोपैथी की दवा ही कारगर है। गौरतलब है कि अगर केंद्र सरकार और आईसीएमआर दवा को बेचने की मंजूरी देती भी हैं तो पतंजलि आयुर्वेद कंपनी को राज्य में दवा की बिक्री की इजाजत नियमों के तहत लेनी होगी। उधर, पत्रिका टीम ने रायपुर के पतंजलि आयुर्वेद की दवा बेचने वालों से संपर्क किया। उन्होंने कहा कि अभी दवा आई नहीं है।

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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