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Heatwave Alert: रायपुर में लॉकडाउन जैसे हालात, नौतपा से पहले तप रहा शहर, बढ़े हिट स्ट्रोक के मरीज

Heatwave Alert: राजधानी रायपुर समेत प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों को परेशान कर दिया है। प्रचंड गर्मी के कारण शहर में लॉकडालन जैसे हालात बन गए हैं। दूसरी ओर हिट स्ट्रोक के मरीज बढ़ गए हैं..

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Heatwave Alert in chhattisgarh

नौतपा से पहले तप रहा शहर ( Photo - Patrika )

Heatwave Alert in Chhattisgarh: ताबीर हुसैन. नौतपा शुरू होने से पहले ही प्रदेश में गर्मी अपने तीखे तेवर दिखा रही है। सुबह 9 बजे से ही इसका असर भी दिखने लगता है। 44-45 डिग्री तापमान के चलते दोपहर होते-होते बाजारों में भीड़ कम हो जाती है और लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि दोपहर में सड़के सूनी हो जाती है, मानो एक बार फिर शहर में लॉकडाउन लग गया हो। दूसरी ओर यह गर्मी सिर्फ तापमान नहीं बढ़ा रही, बल्कि लोगों के तन, मन और धन पर भी भारी पड़ रही है।

Chhattisgarh Heatwave Alert: रातों ने लोगों की नींद उड़ाई

अस्पतालों में मरीज बढ़ रहे हैं। लगातार गर्म रातों ने लोगों की नींद छीन ली है, तो बिजली बिल और पानी का खर्च घरों का बजट बिगाड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि हीट वेव अब सिर्फ मौसम की समस्या नहीं रह गई है। इसका असर लोगों के स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन, कामकाज और घरेलू अर्थव्यवस्था तक पहुंच चुका है।

ओपीडी में बढ़े हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, हीट एग्जॉशन के मरीज

नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर मेडिसीन डॉ. योगेंद्र मल्होत्रा के मुताबिक भीषण गर्मी और लू का असर अब लोगों की सेहत पर साफ दिखाई देने लगा है। अस्पतालों की ओपीडी में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, हीट एग्जॉशन, उल्टी-दस्त, लो बीपी, चक्कर और यूरिन इन्फेक्शन के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। बुजुर्गों में हार्ट और सांस संबंधी दिक्कतें भी बढ़ी हैं।

मन पर असर

इस दौरान स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल का स्तर बढऩे से एंग्जायटी, घबराहट, बेचैनी, चिड़चिड़ापन और नींद की समस्या बढ़ने लगती है। सिरदर्द, खुजली, मांसपेशियों में दर्द और चक्कर आना भी सामान्य लक्षण बन रहे हैं।

तन पर असर

तेज सिरदर्द, अत्यधिक प्यास, कमजोरी, चक्कर, मांसपेशियों में ऐंठन, उल्टी और त्वचा का लाल पडऩा हीट स्ट्रोक के शुरुआती संकेत हैं। गंभीर स्थिति में मरीज बेहोश भी हो सकता है, जिसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है।

सड़के हो गई सूनी

यह तस्वीर शहर के सबसे व्यवस्तम शास्त्री चौक की है। जहां शहर की आधी आबादी हर दिन इस सड़क से गुजरती है। वहीं भीषण गर्मी के तेवर के चलते सड़के सूनी हो गई है। शहर के प्रमुख बाजारों और चौक पर भी गिने चुने लोग पहुंच रहे हैं। कोरोना के लॉकडाउन के समय भी ऐसे ही हालात बने हुए थे।

इन पर दिख रहा ज्यादा असर

गर्मी का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर दिख रहा है जो दिनभर खुले आसमान के नीचे काम करने को मजबूर हैं। दोपहर में सड़कों पर काम कर रहे मजदूर, रिक्शा चालक और डिलीवरी ब्वॉय लगातार धूप और गर्म हवाओं के बीच काम कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि दोपहर में सड़क और लोहे की सतह इतनी गर्म हो जाती है कि कुछ मिनट खड़ा रहना भी मुश्किल हो जाता है।

घबराहट, चिड़चिड़ापन और नींद की समस्या

नेहरू मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुरभि दुबे कहती हैं कि गर्मी का असर मानसिक स्थिति पर भी पड़ रहा है। अत्यधिक तापमान में शरीर को अपना आंतरिक तापमान नियंत्रित रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे शरीर में स्ट्रेस बढ़ जाता है। जिन लोगों को पहले से मानसिक रोग हैं, उनकी परेशानी गर्मी में और बढ़ सकती है। कई लोगों में मूड स्विंग और सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर जैसी समस्याएं भी देखने को मिल रही हैं।

बिजली की खपत बढ़ी, कटौती शुरू

बिजली विभाग के अनुसार पिछले साल की तुलना में इस बार गर्मी में 70 से 75 मेगावाट तक बिजली की खपत बढ़ी है। कोरबा की दो यूनिट मेंटेनेंस के चलते बंद हैं, जहां से 210-210 मेगावाट बिजली मिलती थी। इसके अलावा एनटीपीसी से 400 मेगावाट का कोटा भी नहीं मिल पा रहा है।

बढ़ती गर्मी के कारण एसी, कूलर और पंखों का इस्तेमाल बढ़ गया है, जिससे घरेलू बिजली बिल भी तेजी से बढ़ रहे हैं। मध्यमवर्गीय परिवारों का कहना है कि इस बार बिजली, पानी, कोल्ड ड्रिंक, बर्फ और फलों पर अतिरिक्त खर्च ने महीने का बजट बिगाड़ दिया है।

डॉ. मल्होत्रा बताते हैं कि सबसे ज्यादा खतरा 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों, छोटे बच्चों, मजदूरों, किसानों, ट्रैफिक पुलिस, डिलीवरी बॉय, गर्भवती महिलाओं और डायबिटीज, बीपी व किडनी के मरीजों को है।