कोरोना के कारण प्रदेश के होटल-रेस्टोरेंट सेक्टर को 1 हजार करोड़ की चपत, 8-9 लाख लोगों का रोजगार होगा प्रभावित

होटल के बड़े कारोबारियों का कहना है कि सोशल डिस्टेसिंग ने होटल उद्योग को वैसे भी झटका दे दिया है। होटल-रेस्टोरेंट एक साथ मिलने-जुलने,रूकने, शादी-पार्टी, समारोह का जरिया बनता है, लेकिन इस महामारी ने परिभाषा ही बदल दी। मार्च,अप्रैल, मई, जून ये चार महीनों में होटल इंडस्ट्रीज को बड़ा बिजनेस मिलता है।

By: Karunakant Chaubey

Published: 18 Apr 2020, 03:54 PM IST

रायपुर. कोरोना ने होटल-रेस्टारेंट सेक्टर को पूरी तरह अपने गिरफ्त में ले लिया है। प्रदेश के होटल सेक्टर को 2020 से बड़ी उम्मीदें कायम थी, लेकिन यह उम्मीदें अब चकनाचूर हो चुकी है। सालाना 4000-5000 करोड़ टर्नओवर वाले इस उद्योग को आने वाले 6 से 8 महीने तक बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। प्रदेश में 3 मई तक 1000 करोड़ का कारोबार प्रभावित होने की आशंका है।

होटल के बड़े कारोबारियों का कहना है कि सोशल डिस्टेसिंग ने होटल उद्योग को वैसे भी झटका दे दिया है। होटल-रेस्टोरेंट एक साथ मिलने-जुलने,रूकने, शादी-पार्टी, समारोह का जरिया बनता है, लेकिन इस महामारी ने परिभाषा ही बदल दी। मार्च,अप्रैल, मई, जून ये चार महीनों में होटल इंडस्ट्रीज को बड़ा बिजनेस मिलता है। शादियों और अन्य कार्यक्रमों की वजह से ना केवल होटल उद्योग बल्कि इससे जुड़े अन्य उद्योग जैसे एग्रीकल्चर, किचन एप्लायंसेस, पोल्ट्री, ट्रैवल्स, गारमेंट्स सेक्टर, एफएमसीजी आदि सेक्टर को भी बड़ा नुकसान हुआ है।

आने वाले दिनों में भी लोग होटल-रेस्टारेंट से दूरी बनाते दिख सकते हैं। इसलिए आने वाला समय इस सेक्टर के लिए बेहद कठिन रहने वाला है। इस हालात से निपटने के लिए निश्चित तौर पर होटल इंडस्ट्रीज को बड़े पैमाने पर इनोवेशन करने की जरूरत है, ताकि सोशल डिस्टेसिंग के पालन के साथ ही व्यवसाय पर भी असर ना पड़े।

ऑनलाइन के बाद अब महामारी

कारोबारियों का कहना है कि मल्टीनेशनल फूड कंपनियों की धमक के बाद रेस्टोरेंट-होटल सेक्टर का व्यवसाय में बड़ा असर हुआ है। इससे संभलने की रणनीति बनाई जा रही थी कि अब इस महामारी की वजह से व्यवसाय पूरी तरह बर्बाद हो गया। आने वाले दिनों में उद्योगों की चुनौती बढ़ती जा रही है।

ट्रैवल्स भी खत्म

होटल के साथ ट्रैवल्स इंडस्ट्रीज भी खत्म हो चुकी है। दोनों एक-दूसरे के पूरक माने जाते हैं, लेकिन इस समय दोनों सेक्टर में बिजनेस माइनस में जा चुका है। ये ऐसे सेक्टर हैं, जिसमें लॉक-डाउन के बाद से 3 मई के पहले तक प्रदेश में किसी तरह व्यवसाय की संभावना नजर नहीं आ रही है। 20 अप्रैल के बाद भले कोई निर्णय लिया जाए, लेकिन वर्तमान में कोई उम्मीद की किरण कारोबारियों को नजर नहीं आ रही है।

प्रदेश में 9 लाख लोगों को मिलता है रोजगार

होटल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के वरिष्ठ पदाधिकारी परमजीत सिंह खनूजा ने बताया कि प्रदेशभर के अलग-अलग क्षेत्रों के 8 से 9 लाख लोगों को होटल उद्योग से रोजगार मिलता है। इसके अलावा रेस्टोरेंट, कैफे की संख्या अलग है। एग्रीकल्चर सेक्टर में किसानों को होटलों के नहीं चलनेे से बड़ा नुकसान हो रहा है। होटलों के नहीं चलने की वजह से बेरोजगारी में भी इजाफा होगा, वहीं राज्य सरकार का राजस्व भी घटने की आशंका है।

होटल उद्योग को आने वाले 6 से 8 महीने तक उम्मीद की किरण नजर नहीं आ रही है। सोशल डिस्टेसिंग का सबसे विपरीत असर इस सेक्टर को होगा, जिससे उबरने में ना जाने कितना समय लगेगा। बेरोजगारी भी बढ़ेगी।

-तरणजीत सिंह होरा

अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ होटल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन

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Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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