आशियाना बनाना हुआ महंगा, मुनाफाखोरी से रेत ढाई गुना महंगा और दिहाड़ी भी 200 रुपये बढ़ी

शहर में निर्माण कार्यों में 60 फीसद मजदूर अन्य प्रदेशों के काम करते थे। जो कोरोना संक्रमण काल में अपने-अपने गृह जिले जा चुके हैं। अब स्थानीय मजदूरों के भरोसे ही निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। लिहाजा, दिहाड़ी में इजाफा हुआ है।

By: Karunakant Chaubey

Published: 09 Aug 2020, 02:09 PM IST

रायपुर. करीब तीन माह से बंद पड़े निर्माण कार्यों ने रफ्तार तो पकड़ ली है, लेकिन अब महंगाई की मार से प्रोजेक्ट प्रभावित हो रहे हैं। रेत की कालाबाजारी से रियल एस्टेट प्रोजेक्ट से लेकर सरकारी निर्माण कार्यों की लागत बढ़ रही है। रेत खनन में रोक लगने से पहले माफियाओं ने अवैध रूप से रेत का स्टॉक कर लिया था। अब उसी रेत को तीन से चार गुना दाम पर बाजार में बेचा जा रहा है।

रियल एस्टेट सेक्टर के प्रोजेक्ट में 15 से 20 प्रतिशत तक दाम में इजाफा हो सकता है। लॉकडाउन के बाद बढ़े हुए रेत के दाम निर्माण एजेंसियों व कंपनियों के लिए चिंता का विषय बन गया है। तीन माह पहले की तुलना में रेत ढाई गुना महंगी हो गई है। सीमेंट के कीमत में 50 से 70 रुपये का उछाल आया है। लोहे का दाम भी बढ़ गया है। लॉकडाउन के पहले 38 रुपये प्रति किलो में बिकने वाला लोहा अब 48 रुपये प्रति किलो में बिक रहा है। इस कारण वर्तमान में घर बनाना महंगा हो गया है।

मजदूर नहीं मिल रहे, दिहाड़ी भी बढ़ी

कई निर्माण कार्य भले ही शुरू हो गए हैं, लेकिन पर्याप्त संख्या में मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं। जो मजदूर 300 रुपये में रोजाना काम करते थे, अब इनकी दिहाड़ी 200 रुपये की बढ़ोतरी के साथ 500 रुपये हो गई है। दरअसल, शहर में निर्माण कार्यों में 60 फीसद मजदूर अन्य प्रदेशों के काम करते थे। जो कोरोना संक्रमण काल में अपने-अपने गृह जिले जा चुके हैं। अब स्थानीय मजदूरों के भरोसे ही निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। लिहाजा, दिहाड़ी में इजाफा हुआ है।

15 से 20 प्रतिशत तक महंगे मिलेंगे आवास

आने वाले समय में आवास खरीदने में लोगों को 15 से 20 प्रतिशत तक अधिक राशि खर्च करनी पड़ेगी। महंगाई को देखते हुए रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में दामों में बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे है। शहर में टू बीएचके की कीमत औसतन 20 से 23 लाख रुपये है। यदि 20 लाख रुपये के हिसाब से कीमत मानी जाए तो तीन लाख रुपये अतिरिक्त भार पड़ेगा। इससे रियल एस्टेट सेक्टर के व्यापार में मंदी की स्थिति बनेगी।

वर्तमान स्थिति के आधार पर तय हो दाम

पुराने प्रोजेक्ट के अनुबंध हो चुके हैं, इन्हें पूरा करना कांट्रेक्टर की मजबूरी है, लेकिन नए कामों के लिए वर्तमान स्थिति के आधार पर एसओआर (शेड्यूल ऑफ रेट्स) तय किया जाना जरूरी है। वर्तमान में नगर निगम 2012 के एसओआर पर काम कराता है। यदि पुराने एसओआर की दरों पर ही टेंडर हुए तो ठेकेदार घाटे के कारण इसमें भाग ही नहीं ले पाएंगे।

Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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