लगातार तीसरी बार नहीं महंगी हुई घरेलू बिजली, चिकित्सा क्षेत्र और राइस मिलर्स को 5 प्रतिशत की छूट

राज्य विद्युत नियामक आयोग ने जारी की सत्र 2020-21 के लिए नई बिजली दरें

लगातार तीसरा वर्ष जब बिजली दरों में नहीं हुई वृद्धि, बीते दो साल चुनाव के थेस्टील उद्योग को प्रति यूनिट 45 पैसे का पड़ेगा अतिरिक्त भार, क्योंकि लोड फैक्टर रिबेट में किया बदलाव

By: ramendra singh

Published: 30 May 2020, 11:58 PM IST

रायपुर. कोरोनाकाल में जारी आर्थिक मंदी के दौर में बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत देने वाली बड़ी खबर आई है। वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए बिजली की नई दरें लागू कर दी गई हैं, जिनमें किसी भी प्रकार की वृद्धि नहीं की गई है। 55 लाख घरेलू उपभोक्ताओं को अगले एक वर्ष तक वर्तमान में जारी दरों पर ही बिजली बिल का भुगतान करना होगा। वहीं राइस मिलर्स और चिकित्सा क्षेत्र के उपभोक्ताओं को ऊर्जा प्रभार में 5 प्रतिशत की छूट दी गई है। मगर, स्टील उद्योग को प्रति यूनिट 45 पैसे अतिरिक्त देने होंगे, क्योंकि इनके लोड फैक्टर रिबेट में बदलाव किया गया है। शनिवार, 30 मई को राज्य विद्युत नियामक आयोग ने नई दरों का ऐलान कर दिया। जो 1 जून 2020 से लागू होंगी।आयोग ने लॉकडाउन के चलते रोजगार छिन जाने, निजी और सरकारी क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतन में कटौती और बीते दो महीने तक उद्योगों में तालाबंदी को संज्ञान में लिया है। उद्योगों, अस्पताल और ट्रस्टों के प्रतिनिधियों द्वारा भी लगातार मांगा उठाई जा रही थी कि दरों में वृद्धि न की जाए। जिसे आयोग ने काफी हद तक स्वीकार भी किया। टैरिफ मामलों के जानकार श्याम काबरा का कहना है कि जिस प्रकार से आर्थिक मंदी का दौर है, उद्योग बंद थे, श्रमिक दूसरे राज्यों से लौटे हैं और अब वे बेरोजगार हैं तो ऐसी स्थिति में स्टील उद्योग को राहत देनी चाहिए थी। ताकि उद्योग दोबारा पटरी पर लौटते। इसमें निराशा हाथ लगी है। बता दें कि विद्युत की नई दरें 31 मार्च को घोषित होती हैं और 1 अप्रैल से लागू होती हैं, इस साल कोरोना महामारी के चलते दो महीने की देरी हुई है। 'पत्रिकाÓ ने सबसे पहले 19 दिसंबर 2020 को ही बता दिया था कि इस साल दरों में वृद्धि के नहीं हैं संकेत और हुआ भी वही।

अगले 1 वर्ष तक इन दरों से करना होगा बिजली बिल का भुगतान

घरेलू उपभोक्ताओं के लिएस्लैब- वर्ष 2019-20- वर्ष 2020-21

0-100- 3.40- 3.40101-200- 3.60- 3.60

201-400- 4.90- 4.90401-600- 5.50- 5.50

600 से अधिक- 7.30- 7.30(नोट- स्लैब यूनिट और दरें रुपए प्रति यूनिट पर आधारित)

इन्हें बड़ी राहत

स्वास्थ्य- चैरिटेबल ट्रस्टों द्वारा संचालित अस्पतालों को राहत देते हुए उन्हें टैरिफ श्रेणी एचवी-6 में शामिल किया गया है। अस्पताल, नर्सिंग होम और डायग्नोस्टिक सेंटर के लिए विद्युत दरों को युक्तियुक्तकरण करते हुए ऊर्जा प्रभार में 5 प्रतिशत की छूट दी गई है।राहत- प्रति यूनिट 30-35 पैसे।

राइस मिलर्स- उच्च दाब पर बिजली लेने वाले राईस मिलों को प्रचलित ऊर्जा प्रभार में 5 प्रतिशत की छूट दी गई है।राहत- प्रति यूनिट 30-35 पैसे।

स्टील उद्योग को नहीं-स्टील उद्योग- इन्हें प्रचलित ऊर्जा प्रभार पर मिलने वाली लोड फैक्टर रिबेट के लिए निर्धारित अधिकतम लोड फैक्टर प्रतिशत '77 प्रतिशत से ज्यादाÓ के स्थान पर '70 प्रतिशत से ज्यादाÓ निर्धारित की गई है।

राहत नहीं- प्रति यूनिट 45 पैसे अतिरिक्त लगेंगे।

बिजली कंपनी को लगेगा 213 करोड़ का राजस्व घाटा

आम उपभोक्ताओं, उद्योग और स्वास्थ्य सेवा संचालन समितियों के लिए बड़ी राहत है मगर बिजली कंपनी को वित्तीय वर्ष 2020-21 में 213 करोड़ का राजस्व नुकसान का आंकलन किया गया है। हालांकि आयोग ने यह कहते हुए राहत जरूर दी है कि आगामी वर्ष में टैरिफ में यह घाटा समायोजित किया जाएगा। मगर, आंकड़ों के मुताबिक निर्धारित की गई बिजली दरों के मुताबिक बिजली कंपनियों को 13,812 करोड़ रुपए का राजस्व मिलेगा, जबकि तमाम खर्चों के राजस्व आवश्यकता 14,025 करोड़ रुपए है। गौरतलब है कि यह लगातार तीसरा वर्ष है जब बिजली दरों में वृद्धि नहीं की गई है।

परिस्थितियों के मुताबिक फैसला

आयोग ने हर वर्ग की परिस्थितियों को देखते हुए बिजली दरों में वृद्धि न करने का फैसला लिया है। प्रचारित दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है, छूट जरूर दी गई है।

एसपी शुक्ला, सचिव, राज्य विद्युत नियामक आयोग

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