कैसे करें कान के पर्दे की हिफाजत, जानें यहां

कई बार हम सुनते हैं कि कान का परदा फट गया। लेकिन इसका कारण या आशय आदि नहीं समझ पाते।

By: bhemendra yadav

Published: 17 Mar 2021, 07:23 PM IST

कई बार हम सुनते हैं कि कान का परदा फट गया। लेकिन इसका कारण या आशय आदि नहीं समझ पाते। दरअसल हमारे मध्यकर्ण से अंत:कर्ण के बीच एक त्रिस्तरीय पर्दानुमा संरचना होती है जिसे चिकित्सकीय भाषा में टिम्पैनिक मेम्ब्रेन या ईयरड्रम कहते हैं।

कोई भी ध्वनि इस पर्दे पर जो कंपन पैदा करती है वही छोटी हड्डियों के माध्यम से भीतरी कान तक पहुंचती है। भीतरी कान से यह ध्वनि मस्तिष्क तक पहुंचती है, तब हम सुन पाते हैं यानी इस ध्वनि का अर्थ निकाल पाते हैं। किसी कारणवश कान का पर्दा फट जाए तो मध्यकर्ण में इंफेक्शन के साथ-साथ श्रवणशक्ति भी खत्म हो सकती है।

क्यों फटता है कान का पर्दा

कान व नाक के बीच सर्दी जमने व इससे कान में इंफेक्शन से पर्दा फट सकता है। अत्यंत तीव्र विस्फोट या जेटप्लेन की आवाज से कान के पर्दे पर अचानक दबाव पड़ता है, तो यह फट सकता है। कान साफ करते समय नुकीली वस्तु का प्रयोग करने या पर्दे पर तेज दबाव डालने से भी पर्दा फट सकता है।

विभिन्न परीक्षण

उपरोक्त लक्षण नजर आने पर किसी कुशल ईएनटी विशेषज्ञ से मिलें। डॉक्टर ऑटोस्कोपिक परीक्षण से कान के पर्दे की जांच करते हैं। ऑडियोमेट्री से कान के पर्दे के फटने और श्रवणशक्ति पर किस हद तक प्रभाव पड़ा है, यह जाना जा सकता है। इंफेक्शन से कान की हड्डियों पर क्या प्रभाव पड़ा है, यह भी ऑडियोमेट्री से जाना जा सकता है। नर्व डैमेज हो गई हो तो ऑपरेशन करने के बाद भी मरीज की श्रवणशक्ति वापस नहीं आती। ऐसे में उसे हियरिंग एड की मदद से ही सुनना पड़ता है। कान के पीछे की हड्डी यानी मैसटोएड में इंफेक्शन का पता लगाने के लिए एक्सरे या स्कैन की मदद ली जाती है।

चिकित्सा

कान के पर्दे में छेद होने पर कई बार दवाओं से भी उसे ठीक किया जा सकता है। लेकिन इंफेक्शन यदि कान के भीतर फैल गया हो, तो ऑपरेशन करना जरूरी हो जाता है।

माइरिंगोप्लास्टी

इस ऑपरेशन से कान के पर्दे को फिर से बनाया जाता है। इसके लिए कान के ऊपर की स्कैल्प से चमड़ा लेकर छिद्र पर लगाया जाता है।

टिम्पैनोप्लास्टी

अगर कान के पर्दे में छिद्र बड़ा है या इंफेक्शन है, तो टिम्पैनोप्लास्टी की जाती है।

ओसिकुलोप्लास्टी

इन्फेक्शन या इंज्यूरी के कारण यदि कान की तीन अस्थियों में से एक या अधिक क्षतिग्रस्त हो जाएं तो ओसिकुलोप्लास्टी करनी पड़ती है।

मास्टोयडेक्टौमी

क्रोनिक सप्युरेटिव ओटाइटिस होने पर कान के पीछे मौजूद हड्डी को भी जीवाणुमुक्त कारण पड़ता है। इसके लिए यह पद्धति अपनाई जाती है।

लक्षण

* कान से मवाद गिरने लगती है।

* सुनाई कम पडऩे लगता है।

* कान में तेज दर्द होता है।

* कान भारी लगता है।

* सिर चकराने लगता है।

बरतें सावधानी

साधारण सी दिखने वाली सर्दी-जुकाम भी कभी कभी कानों के लिए नुकसानदायी बन जाती है । इसलिए लंबे समय तक सर्दी जुकाम रहे तो नजरअंदाज न करें। उसका समुचित इलाज करवाएं। बच्चा कान में दर्द की शिकायत करे तो खुद ही चिकित्सा करने या कान में तेल आदि डालने की भूल न करें। ईएनटी डॉक्टर की सलाह लें। कान में बड्स, माचिस की तिल्ली, बड्स या नुकीली चीजें न डालें। कान में समस्या हो या ऑपरेशन करवाया हो तो स्विमिंग न करें।

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