scripththini ki maut par uthe swal, pm ke dauran midiya ko rha gya dur | भूख के हुई गर्भवती हथिनी की मौत, पेट में बच्चे ने भी तोड़ा दम : एसडीओ | Patrika News

भूख के हुई गर्भवती हथिनी की मौत, पेट में बच्चे ने भी तोड़ा दम : एसडीओ

सिकासेर के जंगल में मृत मिली हथिनी की मौत पहेली बनकर रह गई है। मौत के कारण व हथिनी के परिचय पर चिकित्सक व अफसरों के विरोधाभास बयान से मामला उलझ कर रह गया है। वहीं, मृत हथिनी की पोस्टमार्टम के कई घंटों बाद एसडीओ मनोज चन्द्राकर ने उसके गर्भवती होने की पृष्टि की है।

रायपुर

Published: April 21, 2022 05:11:54 pm

गरियाबंद। सिकासेर के जंगल में मृत मिली हथिनी की मौत पहेली बनकर रह गई है। मौत के कारण व हथिनी के परिचय पर चिकित्सक व अफसरों के विरोधाभास बयान से मामला उलझ कर रह गया है। वहीं, मृत हथिनी की पोस्टमार्टम के कई घंटों बाद एसडीओ मनोज चन्द्राकर ने उसके गर्भवती होने की पृष्टि की है। साथ ही एसडीओ का कहना है कि हथनी की भूख से मौत के चलते उसके अजन्मे बच्चे ने भी दम तोड़ दिया।
मिली जानकारी के अनुसार गरियाबंद सिकासेर के जंगलों में पिछले तीन-चार दिनों से घूम रही हथिनी की मौत मंगलवार को हो गई। बताया जा रहा है कि 35 वर्षीय हथिनी को समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण उसने दम तोड़ दिया। इस हथिनी की मौत के साथ गरियाबंद वनमंडल में दो सालों में मरने वाले हाथियों की संख्या 3 तक पहुंच गई है। हथिनी की मौत के बाद अफसरों में हडक़ंप मच गया, फिर शुरू हुआ लीपापोती का खेल। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि हथिनी की मौत के बाद डिवीजन व रेंज अफसरों ने अपने स्तर पर मंगलवार को ही पोस्टमार्टम कर दिया था। दूसरे दिन बुधवार को राजधानी के बड़े अफसरों की मौजूदगी में दोबारा पोस्टमार्टम कर उसे दफनाया गया। इस पूरी प्रक्रिया को विभाग द्वारा गुपचुप तरीके से करने की कोशिश की गई। एसडीओ मनोज चन्द्राकर लगातार मीडिया को गुमराह करते रहे। साथ ही अफसर मीडिया के सवालों से बचते नजर आए। हालांकि, इस मामले में डीएफओ मयंक अग्रवाल ने बताया कि हथिनी का पोस्टमार्टम बाकी जानवरों की अपेक्षा अलग होता है, इसलिए फोटो-वीडियो नहीं ले सकते। वन विभाग का कहना है कि मुंह में इंफेक्शन की वजह से हथिनी भोजन नहीं ले सकी, जिसके कारण उसकी मौत हुई है।
लापरवाही को छुपाने की हुई कोशिश
घटनास्थल के आसपास बसे ग्रामीणों ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि हथिनी के हरकतों से विभाग को पहले ही पता चल गया था कि वह बीमार थी। इलाज के लिए समय रहते कोई प्रयास नहीं किया गया। समय रहते अगर गरियाबंद वनविभाग ने इसका इलाज कराया होता तो इसकी मौत नहीं होती
हथिनी की पहचान पर लगा प्रश्नचिन्ह
सिकासेर डुबान क्षेत्र में दम तोडऩे वाली हथिनी को लेकर डीएफओ मयंक अग्रवाल और रायपुर पशुचिकित्सक डॉ. राकेश वर्मा दोनों के ही बयान में विरोधाभास है। एक ओर गरियाबंद डीएफओ मयंक अग्रवाल दावा कर रहे हैं कि यह वही हथिनी है, जिसने धमतरी में 5 लोगों को मौत के घाट उतारा है, तो दूसरी ओर पशुओं के जानकार डॉ. राकेश वर्मा इस बात में इत्तेफाक रखते नहीं दिखाई देते और कहते हंै कि इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
भूख के हुई गर्भवती हथिनी की मौत, पेट में बच्चे ने भी तोड़ा दम : एसडीओ
भूख के हुई गर्भवती हथिनी की मौत, पेट में बच्चे ने भी तोड़ा दम : एसडीओ
उठते सवाल
1. गरियाबंद वन विभाग ने खुद ही खबर जारी किया था कि यह हथिनी धमतरी से मैनपुर होते हुए 15 से 16 अप्रैल को सिकासेर पहुंची थी। क्या एक बीमार हथिनी चिलचिलाती धूप में इतना लंबा सफर तय कर सकती है?
2. वनविभाग ने दो दिनों से एक ही जगह पर बैठी हथिनी के बीमार होने के बारे पता लगाकर इलाज क्यों नहीं किया?
3. यह पहला मौका था जब वन्य प्राणी के पीएम पर भारी पर्दा रखा गया। बाकायदा पॉलीथिन की आड़ में क्रियाकर्म कराया गया। हथिनी को दफन करने तक मीडिया को क्यों रोका गया?
जानकारी छुपा रहे
हाथियों की मौत और पोस्टमार्टम की जानकारी को लेकर आरटीआई लगाने वाले प्रीतम सिन्हा (प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सूचना का अधिकार प्रकोष्ठ भाजपा) का कहना है कि गरियाबंद वनमंडल क्षेत्र में विगत दो वर्ष के अंदर तीन हाथियों सहित अन्य वन्यप्राणियों की संदिग्ध परिस्थितियों की मौतों पर वन विभाग के आलाधिकारी शासन के दबाव में गुमराहपूर्वक कृत्य कर रहे हैं और जानकारियों को छुपा रहे हैं।

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