scriptIf Ban on sale and purchase of land is not removed farmers big protest | नवा रायपुर के सभी गांवों में भूमि खरीदी-बिक्री पर प्रतिबंध नहीं हटा तो 7 मार्च के बाद उग्र आंदोलन | Patrika News

नवा रायपुर के सभी गांवों में भूमि खरीदी-बिक्री पर प्रतिबंध नहीं हटा तो 7 मार्च के बाद उग्र आंदोलन

नवा रायपुर के किसानों की छह मांगें शासन द्वारा पूरी करने के बावजूद करीब 55 दिन से एनआरडीए परिसर में हो रहा किसान आंदोलन खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। बल्कि किसानों ने आंदोलन को और उग्र करने का ऐलान बनाया है।

रायपुर

Published: February 27, 2022 07:05:30 pm

रायपुर. नवा रायपुर के किसानों की छह मांगें शासन द्वारा पूरी करने के बावजूद करीब 55 दिन से एनआरडीए परिसर में हो रहा किसान आंदोलन खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। बल्कि किसानों ने आंदोलन को और उग्र करने का ऐलान बनाया है। किसान नेताओं का आरोप है कि शासन नवा रायपुर के सिर्फ लेयर दो और तीन के गांवों में ही भू क्रय-विक्रय का प्रतिबंध हटाकर मांगें मानने की बात कहकर किसानों को गुमराह कर रहा है। जबकि लेयर वन जो नवा रायपुर के मुख्य क्षेत्र में हैं, वहां के गांवों में ये प्रतिबंध नहीं हटाया है। किसानों नेताओं का कहना है कि प्रभावित गांवों के लोगों को संपूर्ण बसाहट का पट्टा दिया जाए और नवा रायपुर के सभी गांवों में किसी प्रकार का प्रतिबंध न रखें, ताकि किसान अपनी मर्जी से काम कर सकें। वरना 7 मार्च के बाद उग्र आंदोलन किया जाएगा। जिसमें राष्ट्रीय किसान नेता भी शामिल हो सकते हैं।
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नवा रायपुर के सभी गांवों में भूमि खरीदी-बिक्री पर प्रतिबंध नहीं हटा तो 7 मार्च के बाद उग्र आंदोलन
14 गांवों में नहीं हटा है प्रतिबंध
किसान नेताओं के अनुसार शासन भले ही दावा कर रहा हो कि प्रभावित गांवों में भूमि क्रय-विक्रय पर प्रतिबंध हटा दिया गया है, लेकिन ऐसे सिर्फ 13 गांव ही शामिल हैं। नवा रायपुर क्षेत्र के मुख्य एरिया के गांवों में अभी भी प्रतिबंध लागू है। इसके अलावा पट्टा वितरण भी शर्तों के साथ देने की बात कही जा रही है, जो किसानों को मंजूर नहीं है।
इन गांवों से नहीं हटा प्रतिबंध
- उपरवारा, राखी, खपरी, नवागांव, झांझ, कयाबंधा, बरौदा, खोपराभाटा, सेंध, रिगो, सतनवा और नवागांव शामिल हैं।

नई राजधानी प्रभावित किसान समिति के अध्यक्ष रूपन चंद्राकर ने कहा, शासन ने जो छह मांगें पूरी होने की बात कह रही है, उसे हम नहीं मानते। अब तो सभी गांवों में किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं चाहिए। यदि सात मार्च तक शासन ने सभी मांगें पूरी नहीं की, तो आगे उग्र आंदोलन किया जाएगा। राष्ट्रीय किसान नेता भी आंदोलन में शामिल होंगे।

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