अगर आप ट्रेन या स्टेशन का खाना खाते है तो जान लीजिए उसकी सच्चाई, उड़ जाएंगे होश

Anjalee Singh | Publish: May, 25 2019 12:07:47 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

स्टेशन पर 15 रुपए में पूड़ी-आलू की सब्जी, समोसा, कचौड़ी आदि खाद्य सामग्री(Railway Food) परोसी जा रही है, जो कि स्टेशन से कुछ दूर एक कमरे में तैयार हो रही है। इसमें कौन से तेल और आटे का उपयोग किया जा रहा है, इसकी कभी जांच तक नहीं की गई है।

रायपुर. रेलवे अपने हजारों यात्रियों की सेहत से खिलवाड़ कर रहा है। स्टेशन पर 15 रुपए में पूड़ी-आलू की सब्जी, समोसा, कचौड़ी आदि खाद्य सामग्री (Railway Food) परोसी जा रही है, जो कि स्टेशन से कुछ दूर एक कमरे में तैयार हो रही है। इसमें कौन से तेल और आटे का उपयोग किया जा रहा है, इसकी कभी जांच तक नहीं की गई है। इसे खाकर यात्रियों की सेहत खराब हो जाए, तो कोई हैरत नहीं। इससे पहले भी छत्तीसगढ़ की कई ट्रेनों के पेंट्रीकार का औचक निरीक्षण हो चुका है।

पीक यात्री सीजन में हजारों यात्रियों की सेहत को देखते हुए जब ‘पत्रिका’ टीम ने पड़ताल की तो चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। रेलवे का ठेकेदार स्टेशन से करीब डेढ़ किमी दूर पूड़ी-आलू की सब्जी यानी 15 रुपए में जनता खाना सिर्फ सात रुपए में तैयार करने के लिए ठेका दे रखा है। वहां से सप्लाई कराकर स्टेशन में यात्रियों के बीच खपाने के खेल को अंजाम दिया जा रहा है।

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ये था मामला
मामले की तह तक जाने पर पता चला कि स्टेशन परिसर में डेढ़ किमी दूर मंगलबाजार क्षेत्र के एक गली में छोटे से मकान में स्टेशन में सप्लाई होने वाला जनता खाना से लेकर समोसा, कचौड़ी तैयार की जाती है। हैरानी कर देने वाला तथ्य यह सामने आया कि आज तक ठेकेदार के इस किचन में कौन सा तेल और आटे का उपयोग किया जा रहा है, उसका कोई सेम्पल ही नहीं लिया गया है। मामले में रेलवे की जांच-पड़ताल करने वाले अफसर भी संदेह के घेरे हैं, जिनकी जिम्मेदारी ठेकेदार के बेस किचन में उपयोग की जा रही खाद्य सामग्री, साफ-सफाई को देखने की है। इसके पीछे सांठगांव से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

बेस किचन में आटे से भरी मिली बोरियों की छल्लियां
स्टेशन से डेढ़ किमी दूर मंगलबाजार के जिस गली में एक छोटे से मकान में जहां जनता खाना बनाया जाता है, वहां पत्रिका टीम पहुंची तो एक कमरे में आटे की बोरियों की छल्ली लगी हुई मिली तो दूसरी तरफ रजनी रिफाइन के 15-15 लीटर के डिब्बे रखे हुए थे। दोपहर 1.30 बजे के आसपास कचौड़ी और समोसा तलने में जुटे वेंडर पसीने से लथपथ नजर आए। पूछने पर खुलासा हुआ कि रेलवे ने जिस सनसन कैटर्स को यह खाद्य पदार्थ बनाकर स्टेशन में यात्रियों को सप्लाई करने का ठेका दिया हुआ है, उस ठेकेदार द्वारा किसी दूसरे व्यक्ति को ठेका दे रखा है। उसने बताया कि 7 रुपए में पूड़ी-सब्जी यानी जनता खाना और पांच रुपए नग के दर से समोसा-कचौड़ी बनाकर स्टेशन तक पहुंचाने के लिए उसे मिलता है। उसी से उसका परिवार चलता है।

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ठेका की शर्तें तार-तार
रेलवे प्रशासन के खानापान सप्लाई की शर्तें तार-तार हो रही हैं। सनसाइन कैटर्स को ब्रांडेड रिफाइन का यूज करने तथा स्टेशन क्षेत्र के अंतर्गत किसी होटल में बेस किचन होने की शर्त पर ठेका दिया हुआ है, जो करीब डेढ़ किमी दूर गुढि़यारी के मंगलबाजार क्षेत्र के एक छोटे से मकान में चल रहा है। जबकि इस ठेकेदार को स्टेशन के हर प्लेटफार्म पर 14 स्टॉल और पांच ठेलों में जनता खाना, समोसा, कचौड़ी गुणवत्ता युक्त यात्रियों को उपलब्ध कराना है। लेकिन किचन को कोसों दूर ठेके पर दे रखा है। जो कर्मचारी उसके यहां दो साल पहले वेंडर का काम करता था।

जुर्माना एक लाख तक तय, लेकिन सिर्फ खानापूर्ति
रेलवे के नियम शर्तो में खाद्य पदार्थ (Railway Food) खटिया उपयोग करने तथा खराब क्वालिटी पाए जाने पर एक रुपए तक जुर्माने का प्रावधान हैं। लेकिन रेलवे की कार्रवाई के रिकॉर्ड बताते हैं कि अभी तक सिर्फ डेढ़ से दो हजार तक पेनाल्टी की गई है। पड़ताल में यह भी सामने आया कि एक महीने में सिर्फ एक-दो सेम्पल ही ऐसे खाद्य पदार्थों का लिया जा रहा है। जबकि हर दिन 250 पैकेट जनता खाना, 1000-1000 नग समोसा-कचौड़ी की सप्लाई स्टेशन में की जा रही है।

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रेलवे अफसरों को जानकारी नहीं
रेलवे अमले को पूरी-सब्जी (जनता खाना) समोसा, कचौड़ी स्टेशन में खपाई जा रही है, इससे कोई सरोकार नहीं है। इसी तर्ज पर रेलवे के सबसे बड़े राजधानी के रेलवे स्टेशन में खानपान ठेकेदार का खेल चल रहा है। यात्रियों की सेहत को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है। जब विभाग के बड़े अफसरों से खानपान ठेकेदार सनसाइन केटर्स के बेस किचन के बारे में पूछा गया तो साफतौर पर बोले की इसकी उन्हें जानकारी ही नहीं है। केवल स्टेशन में ही जांच के लिए सेम्पल लेते हैं।

यात्रियों की प्रतिदिन आवाजाही (एक नजर में)

पीक सीजन में 40 से 50 हजार के बीच आवाजाही
14 खानपान स्टॉल स्टेशन के प्लेटफार्म पर
130 ट्रेनें हर दिन
5 ठेलो से पूड़ी-सब्जी, समोसा, कचौड़ी की सप्लाई
हर स्टॉल में सुबह-शाम जनता खाना रखना अनिवार्य

सनसाइन कैटर्स को स्टेशन में 14 स्टॉलों का ठेका दिया गया है। जनता खाना, समोसा-कचौड़ी बनाने के लिए ब्रांडेड तेल के उपयोग की शर्त तय की गई है। उसके बेस किचन की जांच नहीं की गई है। स्टेशन में सेम्पल लिया जाता है। किचन में किस तरह खाद्य पदार्थ (Railway Food) तैयार किया जा रहा है, इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा।
तन्मय मुखोपाध्याय, सीनियर डीसीएम, रेलवे

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