फार्म भरने में गलती हुई तो सुधार के लगेंगे 120, अगर देरी हुआ तो हर दिन के देने होंगे इतने रुपए

प्रतिदिन 100 रुपए के हिसाब से विलंब शुल्क लगेगा।

राजनांदगांव. प्राइवेट परीक्षा के लिए 14 जनवरी से ऑनलाइन आवेदन फार्म भरने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों सोमवार से वार्षिक परीक्षा के ऑनलाइन आवेदन मंगाए हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 28 जनवरी तय की गई है। विवि प्रशासन ने कहा है कि इसके बाद 29 और 30 जनवरी तक 100 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से विलंब शुल्क लगेगा।

खास बात यह है कि यदि आपसे परीक्षा फार्म भरते वक्त कोई त्रृटि हो गई, तो इसे सुधारने के लिए अलग से 120 रुपए का शुल्क भी जमा करना होगा। यह व्यवस्था पहली बार की गई है। त्रृटि सुधार के लिए भी सिर्फ दो दिनों का ही वक्त दिया गया है। विद्यार्थियों को 2 फरवरी तक आवेदन फार्म की हार्डकॉपी केंद्र में जमा करानी होगी। फार्म की प्रक्रिया पूरी करने विवि ने सीमित समय ही दिया है। ऐसे विद्यार्थी जो आवेदन भरने के लिए इंटरनेट कैफे का रुख करते हैं, उन्हें बेहद बारीकी से हर एक कॉलम में जानकारी भरनी होगी। कैफे संचालक से गलती हुई तो 120 रुपए का फटका विद्यार्थी को लगेगा। फार्म को सुधारने का अधिकार सिर्फ विवि प्रशासन को ही होगा।

परीक्षा के लिए पहले कराना होगा पंजीयन
विवि प्रशासन स्थापना के बाद से ही रविवि का अनुशरण कर रहा है, लेकिन इस बार अचानक व्यवस्था बदल दी है। विवि प्रशासन ने कहा है कि प्रायोगिक परीक्षा में अनुत्तीर्ण रहने वाले विद्यार्थियों को अन्य महाविद्यालय में उक्त विषय की प्रायोगिक परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जाएगी। परीक्षार्थी इस बात का विशेष ध्यान रखें कि प्रयोगिक परीक्षा में अनुपस्थित नहीं हों। इसके विपरीत रविवि ने अपनी सूचना में विद्यार्थियों के लिए ऐसी स्थिति में अलग से व्यवस्था कराए जाने का जिक्र किया है। इसके अलावा पीजी परीक्षाओं में मनोविज्ञान एवं भूगोल विषय का चयन करने वाले स्वाध्यायी विद्यार्थियों को पहले प्रायोगिक परीक्षा के लिए पंजीयन कराना होगा, इसके बाद ही परीक्षा का ऑनलाइन आवेदन भर सकेंगे।

ऑनलाइन फार्म लेने की प्रक्रिया शुरू हो गई है
प्राइवेट परीक्षा के लिए ऑनलाइन फार्म लेने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 28 जनवरी अंतिम तिथि है। देरी होने पर लेट फीस देने पड़ेंगे। त्रुटि होने पर भी विद्यार्थियों को सुधार के लिए विवि को फीस चुकाने पड़ेंगे।

डॉ. आरएन सिंह, प्राचार्य शासकीय दिग्विजय कॉलेज

 

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चंदू निर्मलकर Desk
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