अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक डे स्पेशल: न अकादमी और न ही अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षक, कैसे तैयार होगी छत्तीसगढ़ में ओलंपियन की पौध

कोरोनाकाल के बीच टोक्यो ओलंपिक का आगाज 23 जुलाई को होने जा रहा है, जिसमें भारत के 100 से ज्यादा खिलाड़ी हिस्सा लेनेे जा रहे हैं। लेकिन, भारतीय ओलंपिक दल में छत्तीसगढ़ के एक भी खिलाड़ी का नाम शामिल नहीं है।

By: Dinesh Kumar

Published: 23 Jun 2021, 09:49 PM IST

कई अंतरराष्ट्रीय मैदान बनने के बाद भी छत्तीसगढ़ में ओलंपिक खिलाडिय़ों का टोटा

करोड़ों का बजट फिर भी नहीं मिल रहा खिलाडिय़ों को प्रोत्साहन

रायपुर. कोरोनाकाल के बीच टोक्यो ओलंपिक का आगाज 23 जुलाई को होने जा रहा है, जिसमें भारत के 100 से ज्यादा खिलाड़ी हिस्सा लेनेे जा रहे हैं। लेकिन, भारतीय ओलंपिक दल में छत्तीसगढ़ के एक भी खिलाड़ी का नाम शामिल नहीं है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि छत्तीसगढ़ अलग राज्य बनने के 20 वर्ष से ज्यादा होने के बावजूद प्रदेश में ओलंपिक खिलाडिय़ों का टोटा क्यों है। छत्तीसगढ़ में दो दशकों में कई विश्वस्तरीय खेेल अधोसंरचना का निर्माण तो हो गया, लेकिन इनके नियमित इस्तेमाल के लिए न तो सरकार एक भी खेलों की आवासीय अकादमी खोल सकी औैर न ही विश्वस्तरीय प्रशिक्षकों की भर्ती कर सकी। इसके अलावा न ही ग्रासरूट स्तर के खिलाडिय़ों को प्रोत्साहित करने पर कोई काम हो सका। कई योजनाएं तो कागजों तक सिमटी रहीं। छत्तीसगढ़ में ओलंपियन खिलाडिय़ों का टोटा क्यों है, इस संबंध में पेश है पत्रिका की खास रिपोट...

झारखंड और उत्तराखंड हमसे आगे

छत्तीसगढ़ के साथ ही झारखंड और उत्तराखंड अलग राज्य बने, लेकिन अकादमियों और प्रोत्साहन योजनाओं की बदौलत इन राज्यों सेलगातार खिलाड़ी ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

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इसलिए नहीं निकल पा रहे ओलंपियन (खेल विशेषज्ञों के अनुसार)

टैलेंट सर्च की योजना नहीं

छत्तीसगढ़ में स्पोट्र्स टैलेंट सर्च जैसी कोई योजना नहीं चल रही, जिससे सब जूनियर व जूनियर स्तर से खिलाडिय़ों को चयनित कर उन्हें ओलंपिक स्तर की तैयारी दी जा सके। साथ ही केन्द्र सरकार देश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए खेलो इंडिया जैसी कई योजनाएं का छत्तीसगढ़ में सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं हो रहा।

एक भी खेलों की अकादमी नहीं
20 साल भी छत्तीसगढ़ खेल विभाग एक भी आवासीय अकादमी नहीं खोल सका औैर न ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षकों की भर्ती हुई। जबकि, प्रदेश में अरबों की रुपए की खेल अधोसंरचना का निर्माण अकादमी खोलने के उद्देश्य से किया जा चुुका है।

खेल विभाग औैर खेल संस्थाओं में समन्वय की कमी

खेल विभाग और खेल संघों में समन्वय की कमी भी छत्तीसगढ़ खेलों का बेड़ा गर्क कर रही है। खेल विभाग का बिना सलाह फैसले लेने के कारण खेल संघों के साथ अकसर विवाद की स्थिति बनी रहती है और खेल प्रतियोगिताएं ठप्प हैं।

प्रशिक्षकों की जवाबदेही तय हो
वर्तमान में वर्ष 2014 में रायपुर में गैरआवासीय हॉकी और तीरंदाजी की अकादमी शुरू हुई थी, लेकिन अब तक यहां से एक भी खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने लायक नहीं निकला। इसलिए प्रशिक्षकों की जवाबदेेही तय होनी चाहिए।

आदिवासी खिलाडिय़ों की उपेक्षा

छत्तीसगढ़ के बस्तर, जगदलपुर, कोंडागांव समेत कई आदिवासी क्षेत्र में तीरंदाजी, कुश्ती, एथलेटिक्स जैसे व्यक्तिगत खेलों की नैसर्गिक प्रतिभाएं हैै, लेकिन उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए सरकार आज तक कोई योजना नहीं बना सकी।
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ओलंपियन तैयार करने के लिए चाहिए 3 डी सिस्टम (डेडिकेटेड कोच, डेडिकेटेड प्लेयर्स, डेडिकेटेड एडमिस्ट्रेशन)

-सेंट्रलाइज सिस्टम बने जिससे योजनाएं बनने और शुरू होने पर किसी अधिकारी के बदलने के बाद भी जारी रहें।

-ओलंपिक खेेलों की आवासीय अकादमी खोली जाएं और विश्वस्तरीय प्रशिक्षकों की भर्ती हो

-आदिवासी क्षेत्रों में टैलेंट सर्च की योजनाएं शुरू की जाएं। स्कूल और कॉलेज के व्यायाम शिक्षकों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जाए।

-खेल विभाग और खेल संस्थाओं में समन्वय बने, जो मिलकर योजना बनाकर प्रदेश में खेलों को बढ़ावा देने के लिए कार्य करें

-खेल आयोजनों के लिए सभी अधोसंरचनाओं को निशुल्क उपलब्ध कराया जाए, जिससे प्रदेश खिलाड़ी विश्वस्तरीय मैदानों में खेलने के अभ्यस हो सकें।

-खेलों के विकास में उद्योग जगत अहम भूमिका निभा सकता है। प्रदेश सरकार स्थानीय इंडस्ट्री को खेल और खिलाडिय़ों को डेेवलप करने की जिम्मेदारी सौंपे।
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ग्रासरूट स्तर से प्रयास हों

ओलंपियन तैयार करने के लिए ग्रासरूट स्तर से प्रयास करनेे होंगे। 10-12 साल के बच्चों के बीच टैलेंट सर्च जैसी योजनाएं चलानी होंगी। बच्चों को चयनकर उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था सरकार करे। आज ऐसी योजनाएं शुरू करेंगे, तब 8-10 साल एक ओलंपिक खिलाड़ी निकल सकता है।

मृणाल चौबे, अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी, छत्तीसगढ़
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लांग टर्म योजनाएं बने और एम्लीमेंट हों
प्रदेश में ओलंपिक खिलाड़ी तैयार करने के लिए लांगटर्म प्रोत्साहन योजनाएं बनाने और नियमित रूप से एम्पीमेंट करने की जरूरत है। व्यक्तिगत खेलों में टैलेंट सर्च कर सब जूनियर स्तर के 10-20 खिलाड़ी और टीम इवेंट के 40 खिलाड़ी का चयन करें और उनके प्रशिक्षण, पढ़ाई, डाइट और संसाधन की पूरी व्यवस्था सरकार करें। इसमें निजी कंपनियों का सहयोग लिया जा सकता है, तभी अगलेे 10 साल बाद छत्तीसगढ़ में ओलंपिक की पौध तैयार होना शुरू होगी।

संजय मिश्रा, प्रशिक्षक भारतीय जूनियर बैडमिंटन टीम
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Dinesh Kumar Reporting
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