भारतीय समाज में आज भी महिलाएं हो रही उपेक्षा और प्रताड़ना का शिकार

हमारे देश में महिलाओं को देवी का रूप समझा जाता है। लोग बेटियों को मां दुर्गा का स्वरूप भी मानते हैं। महिलाओं की इज्जत करने में हमारा समाज वाकई आगे है या फिर देवी मानने का कथन केवल एक दिखावा रह गया है।

By: Ashish Gupta

Published: 25 Nov 2018, 07:17 PM IST

रायपुर. भारत देश को आतुल्य कहा जाता है जिसका अर्थ होता है जिसके समान दूसरा कोई न हो। हमारे देश में महिलाओं को देवी का रूप समझा जाता है। लोग बेटियों को मां दुर्गा का स्वरूप भी मानते हैं। महिलाओं की इज्जत करने में हमारा समाज वाकई आगे है या फिर देवी मानने का कथन केवल एक दिखावा रह गया है।

हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आज समाज में न तो महिलाएं सुरक्षित हैं और न ही बेटियां। इंक्रेडेबल कहलाने वाले भारत में आज भी महिलाओं पर शिकार किए जा रहे हैं। इसका जीता- जागता उदाहरण हैं देश में महिलाओं पर होने वाले दुराचार और उत्पीड़न।

हमारे समाज के दो चौकाने वाले पहलू हैं एक तो नवदुर्गा के समय पर बेटियों का देवीतुल्य मानना, वहीं दूसरी तरफ उनके साथ हिंसक बर्ताव करना। क्या हम वास्तव में एक भारतीय संस्कृति का अनुसरण कर रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार इंडिया में लगभग एक लाख बीस हजार से अधिक महिलाएं घरेलु हिंसा और यौन उत्पीडऩ का शिकार होती है।

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आज इंटरनेशनल डे फॉर इलीमिनेशन ऑफ वाइलेंस अगेन्स्ट वीमंस पर कुछ बताने जा रहे हैं। 25 नवंबर 1960 में एक नियम पारित किया था जिसमें महिलाओं के खिलाफ हिंसा को रोकने का प्रयास किया गया। इस पर शहर की महिलाओं से बात की और उनकी राय जानने की कोशिश की....। 

निचली मानसिकता बड़ा कारण
सीए कोमल ब्रजवानी ने कहा, महिलाओं पर हो रही हिंसा कई प्रकार की हैं और उनके कारण भी बहुत हैं। अगर इन सबको देखा जाए तो मैं कहना चाहूंगी कि निचली मानसिकता वाले लोग ही इसको अंजाम देते हैं। कई बार महिलाओं पर हिंसक होने का कारण यह भी होता है कि पुरुष वर्ग उन्हें अपने से कम आंक लेता हैं।

वहीं दूसरी ओर दहेज भी बड़ा कारण हैं। वीमंस के प्रति वाइलेंस में और भी कारण है जिसमें बेबी गल्र्स पैदा होने पर परिवार की बहू पर आरोप लगाने लगते हैं इसने बेटी को जन्म दिया। छोटी-छोटी मानसिकता हिंसा को जन्म देती हैं। महिलाओं को परिवार के बारे में सोचना पड़ता है यही डर उन पर वाइलेंस बन जाता है।

चुप्पी भी बड़ा कारण
जिला अभियोजन अधिकारी हिना यास्मीन खान ने कहा, हमारे समाज में महिलाओं के ऊपर जिम्मेदारियां रहती हैं। एक सबसे बड़ा डर रहता है कि समाज क्या कहेगा। अगर कोई महिला उसके परिवार द्वारा या पति के द्वारा घरेलु हिंसा का शिकार बनती है तो अमूमन वीमंस इज्जत और समाज के कारण चुप हो जाती हैं और यही चुप्पी उन पर हिंसा कारण बन जाती है। आज महिलाओं को सोचने की जरुरत है कि अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों को न सहें। आप खुद इतनी सबल हैं कि दुनियां का कोई भी मुकाम हासिल कर सकती हैं।

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