योग दिवस के लिए शॉर्ट नोटिस में निकाला टेंडर, एक्सपर्ट नहीं चेक कर रहे क्वालिटी

- योग दिवस के लिए बिना जांचे ही खरीद रहे हैं टी-शर्ट, ट्रैक सूट, विशेषज्ञ नहीं खुद ही देख कर तय की क्वालिटी.

- जिम्मेदार अधिकारियों को नहीं पता था कब है योग दिवस, इसलिए शॉर्ट नोटिस पर टेंडर.

By: Bhupesh Tripathi

Updated: 19 Jun 2021, 10:13 AM IST

रायपुर। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए खरीदी जा रहे टी शर्ट और ट्रैक सूट की खरीदी की निविदा में गोलमाल सामने आया है। 21 जून को निर्धारित योग दिवस के लिए महज पांच दिन पहले ही निविदा की गई। 15 जून को निविदा प्रक्रिया की गई। जबकि भंडार क्रय नियम के अनुसार किसी भी निविदा में 21 दिन का समय दिया जाना चाहिए, लेकिन महज पांच दिन में निविदा बुलाई गई।

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पूरी निविदा प्रक्रिया की जिम्मेदारी समाज कल्याण विभाग के संयुक्त संचालक पंकज वर्मा को मिली है। अहम बात यह है कि खरीदे जा रहे ट्रैक सूट और टी शर्ट की क्वालिटी भी विभाग द्वारा नहीं जांची गई है। जबकि किसी भी वस्तु की निविदा होती है तो उससे पहले उसकी सैंपल जांच की जाती है। सूत्रों का कहना है कि जो टी शर्ट की खरीदी की जा रही है, वह बेहद पतली क्वालिटी का है। इसी तरह जब खेल विभाग इन सामग्रियों की खरीदी करता है तो निर्धारित मटेरियल की पूरी जांच की जाती है। इसके बाद भी एल-१ की घोषणा होती है। सिर्फ एक कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए इतनी शार्ट नोटिस में टेंडर बुलाया गया है।

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195 रुपए में खरीद रहे हैं टी-शर्ट
टेंडर में जिस फर्म ने टी-शर्ट का दाम 179 रुपए भरा था। उसे बाहर करके 195 रुपए कीमत भरने वाले को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया। टीशर्ट की क्वालिटी ऐसी है कि महिलाओं के पहनने के लायक नहीं है। एल- 1 बदलने को लेकर विभाग ने अनोखा तर्क दिया है। कुछ कंपनियों ने तीन अलग-अलग क्वालिटी की टीशर्ट और ट्रैक सूट की क्वालिटी के आधार पर रेट कोट किया था। लेकिन विभाग ने उसे नकारते हुए खरीदी की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

पहले भी निविदा में गड़बड़ी की, जांच में हैं आरोपी
इसी तरह विभिन्न योजनाओं के प्रचार-प्रसार, सम्मेलन व सांस्कृतिक आयोजन का कामकाज समाज कल्याण विभाग करता ही है। वर्ष 2012 में विभाग की ओर से ऐसे सभी सम्मेलनों और आयोजनों पर खर्च की जिम्मेदारी तत्कालीन संयुक्त संचालक पंकज वर्मा को दे गई थी। जांच में अधिकारी आरपी जैन ने यह माना कि पंकज वर्मा ने 27 मई 2012 के एक सम्मेलन के लिए फ्लैक्स, बैनर, आयरन फ्रेम सहित स्वागत द्वार के अलावा अतिथियों का कट आउट बनवाया था। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि वर्मा ने उक्त कार्यक्रम में शासन से फ्लैक्स, बैनर और कट आउट बनवाने में ही कुल 14 लाख 28 हजार 360 रुपए का दुरुपयोग कर शासन को क्षति पहुंचाई। जांच रिपोर्ट को 15 फरवरी 2018 को समाज कल्याण विभाग के आला अधिकारियों के पास कार्रवाई के लिए भेजी गई। विभागीय जांच में दोषी पाए जाने के बाद भी अब तक अफसर पर कार्रवाई नहीं हुई है।

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योग आयोग के सचिव एमएल पांडेय ने कहा कि खरीदी का जिम्मा समाज कल्याण को दिया गया है। इस संबंध में आप उनसे बात कर सकते हैं। मुझे जानकारी नहीं है। वहीं समाज कल्याण विभाग के संयुक्त संचालक पंकज वर्मा का कहना है कि समय अभाव के कारण शॉर्ट टेंडर में खरीदी हो रही है। सब भंडार क्रय नियम के अनुसार ही हो रहा है। किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं है।

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Bhupesh Tripathi
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