सैलरी घोटाला करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ 3 सदस्यीय कमेटी ने शुरू की जांच


- 71 लाख रुपए सैलरी भगुतान मामले की होगी जांच, कमिटी में दो उपायुक्त और जोन तीन के कमिश्नर शामिल।
- अभी तक फरार है गंगाराम सिन्हा, पुलिस ने अब तक नहीं है एफआईआर।

 

By: Bhupesh Tripathi

Published: 05 Feb 2021, 04:24 PM IST

रायपुर. नगर निगम जोन तीन के सीनियर बाबू गंगराम सिन्हा और प्लेसमेंट पर तैनात कम्प्यूटर आपरेटर नेहा परवीन द्वारा किए गए सैलरी घोटाले की विभागीय जांच नगर निगम ने शुरू कर दी है। जांच के लिए अधिकारियों की तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है।

इसमें वित्त उपायुक्त एसपी साहू, उपायुक्त कृष्णा खटीक, लेखा अधिकारी श्याम सोनी और जोन तीन के जोन कमिश्नर प्रवीण गहलोत शामिल हैं। इन सभी के पास घोटाले की फाइल आ चुकी है। इस पर जांच शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार के घोटाले की शुरुआत के समय से सैलरी निकलने के लिए जोन के जिन अधिकारियों के हस्ताक्षर की भुगतान फाइल है, उन सभी से पूछताछ होगी। सबसे पहले घोटाले का अंजाम देने वाले बाबू गंगाराम सिन्हा और कम्प्यूटर आपरेटर नेहा परवीन से कड़ाई से पूछताछ की जाएगी। इसके अलावा पुलिस को एफआईआर दर्ज कराने के लिए सहायक दस्तावेज भी तैयार किया जा रहा है। पुलिस ने निगम को घोटाले के सभी दस्तावेज मांगी है। ताकि आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई कोर्ट में पेश कर सलाखों के पीछे भेज सके। गौरतलब हो कि गंगाराम सिन्हा और नेहा परवीन ने 2016 से छह कर्मचारियों की तनख्वाह अपने रिश्तेदारों के खाते डालकर सैलरी घोटाला कर रहे थे। नेहा परवीन ने अपनी मां और दो बहनों और गंगाराम सिन्हा ने अपनी पत्नी, बेटे और चाचा के बैंक खाते में राशि डाल रहे थे। अब तक करीब 71 लाख 18 हजार 961 रुपए का गबन कर चुके हैं। ये सभी राशि ब्याज समेत दोनों से वसूला जाएगा। जरूरत पडऩे पर दोनों की संपत्ति कुर्क नीलाम कर राशि एकत्रित की जाएगी।

जोन तीन में आया एक और मामला
सूत्र बताते हैं जोन तीन में एक गडग़ड़ी और सामने आई है। जानकारी के अनुसार दो साल पहले जोन तीन से एक महिला कर्मचारी सेवानिवृत्त हुई थी। सेवानिवृत्त के लिए उनसे वहां एक फार्म भरवाया गया है। दरअसल महिला पढ़ी-लिखी नहीं थी। इसलिए उनसे वहां के एक बाबू ने उनका फार्म भरा और उस पर उनसे अंगूठे का निशान ले लिया है। इस फार्म बाबू ने एक गड़बड़ी कर दी है। फार्म में महिला के मरने के बाद वारिस के तौर पर नॉमिनी वाले कॉलम में किसी दस साल के लड़के कन्हैया लाल सिन्हा का नाम लिखा है। जबकि कर्मचारी भोई जाति की है। ऐसे में यदि महिला की मौत होने पर उक्त लड़के को ही 24 साल की उम्र तक पेंशन मिलेगी। इस गड़बड़ी के सामने आते ही अब जोन तीन और निगम मुख्यालय में फिर से चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। बताया जाता है कि गंगाराम सिन्ह के कार्यकाल के समय की सभी फाइलों की बारीकी से जांच की जाएगी। ताकि उनके द्वारा की गई गड़बडि़यों का पता चल सके।

जोन तीन में हुए सैलरी घोटाले के लिए जांच कमेटी का गठन कर दिया गया है। कमेटी ने जांच भी शुरू कर दी है। एफआईआर दर्ज करने के लिए पुलिस ने कुछ और दस्तावेज मांगी है, जिसे तैयार कर शीघ्र संबंधित थाने में प्रस्तुत किया जाएगा।
- पुलक भट्टाचार्य, अपर आयुक्त, नगर निगम रायपुर

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