इसरो के वैज्ञानिक रवि वर्मा पहुंचे रायपुर, बोले- मील का पत्थर साबित होगा गगनयान मिशन

डॉ कलाम की बुक अग्नि की उड़ान पढ़कर स्पेस साइंटिस्ट बनने की ठानी

By: Tabir Hussain

Published: 04 Mar 2020, 12:40 AM IST

ताबीर हुसैन @ रायपुर. देश में पहली बार ऐसा हुआ जब लोग किसी इलेक्शन के रिजल्ट या क्रिकेट के लिए बल्कि साइंस की जिज्ञासा को लेकर रतजगा किए। मैं नहीं मानता कि चंद्रयान-2 अनसक्सेस रहा। ये जरूर है कि कुछ कमियां रह गईं जिसे अगले साल चंद्रयान-3 में पूरी कर उसी जोश व जज्बे से शुरुआत करेंगे। वैसे भी चंद्रयान-2 का एक पार्ट ऑर्बिटेर मिशन अभी भी काम कर रहा है। दूसरा पार्ट विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोबो तकनीकी वजह से स्थापित नहीं हो पाए। यह कहना है इसरो के वैज्ञानिक रवि कुमार वर्मा का। एक सामाजिक सम्मेलन में शिरकत करने आए रवि ने अंतरिक्ष विज्ञान को लेकर जानकारी साझा की। उन्होंने कहा, इन दिनों गगनयान मिशन की तैयारी चल चल रही है। अभी जितने भी लोग स्पेस में गए थे वे इंडिया की तरफ से नहीं गए थे बहुत जल्द हम ऐसे लोगों के नाम सुनने जा रहे हैं जो इंडियन ऑरिजन से निकले हैं। यहां की हर टेक्नीक इंडियन होगी। यह मिशन देश के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

इसरो टीम का योगदान

कोई भी मिशन टीम वर्क से पूरा होता है। इसमें वर्षों की मेहनत होती है। किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं होती। मैं भी इसी टीम का हिस्सा हूं। चंद्रयान-2 में मेरा काम मटेरियल की टेस्टिंग, क्वालिफकेश्न और विश्वसनीयता को परखना था। मिशन 98 परसेंट सक्सेस रहा। ये मैटर नहीं मिशन सफल या असफल हो गया, मायने ये रखता है कि एक्सपेरिमेंट किया गया।

कॉमन मैन के लिए ही काम

एक सवाल के जवाब में रवि ने बताया कि इसरो कॉमनमैन के लिए ही काम करता है। ओवरऑल अंतरिक्ष के लिए काम जमीन पर हो रहा है। ओवरऑल अंतरिक्ष का काम जमीन पर हो रहा है। रॉकेट लॉन्च हो या सेटेलाइट भेजना। इसरो का मकसद यही है कि किस तरीके से अंतरिक्ष विज्ञान को लोगों तक पहुंचाया जाए

कौन बन सकता है इसरो में वैज्ञानिक

आईएसटी एग्जाम के जरिए पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा ऑफ्टर इंजीनियरिंग, ग्रेजुएशन के बाद एमएससी, ऑफ्टर पीएचडी या पीजी के बाद। ऑप्शन कई है, विधाएं भी कई हैं। जो लोग इसरो में एडमिनिस्ट्रेशन में जाना चाहते हैं वे ऑट्र्स या कॉमर्स वाले भी हो सकते हैं।

मिसाइलमैन की किताब से मिली वैज्ञानिक बनने की प्रेरणा

पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम की बुक अग्नि की उड़ान पढऩे का मौका मिला। इस किताब ने मुझे इतना प्रेरित किया कि मैंने स्पेस में ही कॅरियर बनाने की ठानी। मेरी फैमिली ने भी भरपूर सपोर्ट किया। मैं ग्रामीण अंचल से हूं। एमपी के धार जिले का रहने वाला हूं। मैं गेट के छात्रों को पढ़ाया करता था। विंग्स ऑफ फायर पढऩे के बाद मैंने इसरो के एग्जाम दिया। मेरी पहली पोस्टिंग विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में हुई। यहां मैंने 8 साल रॉकेट और इससे जुड़ी चीजें सीखी। 5 साल से अहमदाबाद स्थित स्पेस एप्लीकेशन सेंटर में हूं। यहां पे लोड, एसेसरीज और इलेक्ट्रानिक पर वर्क कर रहा हूं जो कि रिमोट सेंसिंग और सेटेलाइट के लिए यूज होती है।

चुनौतियों सभी के पास

मैं मानता हूं कि हर कोई चुनौतियों से ही आगे बढ़ा है। प्रॉब्लम किस तरीके से कैसे आती है उसे आप कैसे टेकल करते हैं ये ज्यादा मायने रखता है। किसी भी फील्ड में आगे बढऩे के लिए जुनून बनाए रखना जरूरी है। आप अपने इनर पोटेंशियल को फूली यूज करते हैं तो जरूर आगे बढ़ते हैं। इनर पोटेंशियल को फूली यूज करते हैं। आज से ही काम शुरू कर दें कलाम सर की इस क्योट को मैं हमेशा से फॉलो करता हूं- सपने वे नहीं जो रात को सोते वक्त देखे जाएं बल्कि वे हैं जो सोने ही न दें।

Tabir Hussain Incharge
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