किसानों को लागत भी मिलना मुश्किल

जिले में दो माह पूर्व मौसम के खराब होने तथा बार-बार हुई बारिश-बदली का असर इस वर्ष रबी फसलों पर नजर आया है। इसकी वजह से इस वर्ष गेंहू, चना, तिवरा समेत अन्य फसलों की पैदावार करने वाले किसानों को तगड़ा घाटा हुआ है।

By: ashok trivedi

Updated: 18 Apr 2020, 05:11 PM IST


बलौदाबाजार पत्रिका. जिले में इन दिनों रबी फसलों की कटाई जोरों से चालू है। जिले में दो माह पूर्व मौसम के खराब होने तथा बार-बार हुई बारिश-बदली का असर इस वर्ष रबी फसलों पर नजर आया है। इसकी वजह से इस वर्ष गेंहू, चना, तिवरा समेत अन्य फसलों की पैदावार करने वाले किसानों को तगड़ा घाटा हुआ है। मौसम खराब होने की वजह से इस वर्ष जहां गेंहू का रंग खराब होने की अधिकांश स्थानों से शिकायत आई है वहीं तिवरा तथा चना के दानों का साईज भी छोटा रहा है जो किसानों के लिए तगड़ा घाटा है। विदित हो कि बार-बार होने वाली बारिश की वजह से गेंहू के जिन खेतों में पानी निकासी थी वहां तो गेंहू की फसल को अधिक नुकसान नहीं हुआ है, परंतु जिन खेतों में पानी निकासी की उचित व्यवस्था नहीं थी उन खेतों में फसल अधिक खराब हुई है। बलौदा बाजार ब्लॉक समेत पूरे जिले में इन दिनों रबी फसलों की कटाई का कार्य अंतिम चरण में है। कटाई के दौरान मौसम की मार रबी फसलों पर स्पष्ट रूप से नजर आ रही है जिससे किसानों के माथे में चिंता की लकीरें बढ़ गई हैं।
लागत निकलना मुश्किल
रबी फसल का उत्पादन करने वाले किसानों हेतराम, सालिकराम, अश्वनी, मुरारी यादव आदि ने बताया कि मौसम की मार से किसानों की कमर टूट गई है। ओला और बार-बार की बारिश में चना तथा गेंहू की फसल जमीन पर गिरकर खराब हो गई है। गेंहू, चना, तिवरा की जो बची खुची फसल है सभी फसलों का उत्पादन काफी कम हो गया और क्वालिटी भी खराब है।

किसानों के लिए इस वर्ष मजदूर की कमी भी बड़ा नुकसान है। लॉकडाऊन की वजह से मजदूरी का रेट बढ़ गया है। इस वर्ष फसल की लागत निकल पाना भी दूभर है, जिसकी वजह से किसानों को दोहरा नुकसान हो गया है।
फसलों पर मौसम की मार का असर
बलौदा बाजार ब्लॉक में चना का कुल रकबा लगभग 910 हेक्टेयर, गेंहू का रकबा लगभग 525 हेक्टेयर और तिवरा का रकबा लगभग 8150 हेक्टेयर है। परंतु मौसम की मार सभी फसलों पर नजर आ रही है। फसलों की कटाई के दौरान खेतों तक जाकर फसल का अवलोकन किया गया तो फसल पर मौसम की मार के निशान अब तक पूरी तरह से नजर आ रहे हैं। ओलावृष्टि तथा मौसम की मार की वजह से चना और तिवरा की फसल में लगने वाले दाना नहीं भरा है। दाने का साइज भी बीते वर्षों की तुलना में काफी छोटा नजर आ रहा है वहीं गेंहू के दानों का रंग बीते वर्षों की तुलना में काफी खराब हो गया है।
जिसकी वजह से गेंहू का स्वाभाविक रंग भी इस वर्ष के फसल के दानों पर नजर नहीं आ रहा है।

ashok trivedi Desk/Reporting
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