जगन्नाथ रथ यात्रा आज: कोरोना के कारण मंदिर परिसर में रथ खींचने की पूरी होगी रस्में, भव्य आयोजन नहीं

Jagannath Rath Yatra 2021 12 July: सोमवार को हवन, पूजन और महाआरती करके भगवान के रथ यात्रा की रस्में पूरी होंगी। शहर में कहीं भी भव्य आयोजन नहीं होगा, यह निर्णय मंदिर समितियों ने कोरोनाकाल को देखते हुए लिया है।

By: Ashish Gupta

Published: 12 Jul 2021, 09:01 AM IST

रायपुर. Jagannath Rath Yatra 2021 12 July: जगन्नाथ रथ यात्रा के लिए कारीगरों ने भगवान की तीन मूर्तियों का नया कलर कर सजाया और नेत्रों में काजल लगाकर आकर्षक रूप दिया। सोमवार को हवन, पूजन और महाआरती करके भगवान के रथ यात्रा की रस्में पूरी होंगी। शहर में कहीं भी भव्य आयोजन नहीं होगा, यह निर्णय मंदिर समितियों ने कोरोनाकाल को देखते हुए लिया है। भगवान के नेत्र उत्सव में भी पहले जैसा उत्सव भक्तों में नहीं देखा गया। गायत्रीनगर जगन्नाथ मंदिर में दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इससे पहले शहर के जगन्नाथ स्वामी मंदिरों में रविवार को भगवान जगन्नाथ महाप्रभु, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का शृंगार अभिषेक और महाआरती कर नेत्र उत्सव मनाया गया।

रथ यात्रा का उत्सव कोरोनाकाल के कारण बीते साल से फीका पड़ गया है। बहुत कम लोगों की उपस्थिति में मंदिर परिसर में ही रथ यात्रा का उत्सव मनता है, ताकि भक्तों की भीड़ न हो। बारी-बारी से आरती पूजा कर भगवान के दर्शन करने की व्यवस्था मंदिर समितियों ने बनाया है। मंदिर से भगवान की मूर्तियों को फूलों से सजे रथ पर विराजमान करेंगे और वहीं परिसर में रथ आगे-पीछे करके रथयात्रा की रस्में पूरी करेंगे। प्राचीन टूरी हटरी मंदिर में दूधाधारी मठ के महंत पूजा आरती कर रथयात्रा का शुभारंभ करेंगे। जबकि 200 साल पुराने सदरबाजार मंदिर से शाम के समय गाड़ी से मौसी के घर टिकरापारा में पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। इसमें चार से पांच लोग शामिल होंगे।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री को नहीं बुलाया
गायत्री नगर मंदिर सेवा समिति के अध्यक्ष पुरंदर मिश्रा ने बताया कि पिछले 20 वर्षों से भगवान के रथ को खिंचने का शुभारंभ प्रथम नागरिक के रूप में राज्यपाल और मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री द्वारा भगवान के रास्ते में सोने की झाडू लगाकर किया जाता रहा है, परंतु कारोना के कारण भव्य आयोजन नहीं होने के कारण राज्यपाल और मुख्यमंत्री को आमंत्रित नहीं किया। बीत साल जैसा ही परिसर में भगवान को मौसी के घर रखेंगे। रथयात्रा नहीं निकलेगी।

मंदिर परिसर में बनाया भगवान के मौसी का घर
शहर के प्राचीन टूरी हटरी पुरानी बस्ती तथा गायत्री नगर मंदिर परिसर में भगवान के मौसी का घर बनाया गया है। मंदिर परिसर में रथ खींचने की रस्में पूरी करने के बाद भगवान की मूर्तियों को उठाकर मौसी के घर विराजें और आठ दिनों तक सुबह-शाम वहीं पूजा-अर्चना कर पुजारी भोग लगाए। इसी तरीके का उत्सव बीते साल भी मनाया गया था, ताकि श्रद्धालुओं की भीड़ रथयात्रा में शामिल न हो। क्योंकि कोरोनाकाल चल रहा है। इसलिए सादगी से उतसव मनाने का निर्णय मंदिर समितियों ने लिया है।

नौ दिन में होगी भगवान की वापसी यात्रा
मान्यता है कि स्नान पूर्णिमा के दिन से भगवान जगन्नाथ महाप्रभु बीमार पड़ जाते हैं। फिर ठीक होने में 15 दिन लग जाते हैं, जिससे काफी कमजोर हो जाते हैं। रथयात्रा के लिए भक्तों को दर्शन देने के लिए निकलते हैं और आठ दिनों तक मौसी के घर रहकर पूर्ण स्वस्थ होकर घर लौटते हैं, जिसे वापसी रथयात्रा कहा जाता है।

उत्कल समाज से नियमों के पालन की अपील
उत्कल महिला महामंच की अध्यक्ष सावित्री जगत ने समाज के लोगों से कोरोना नियमों का पालन करते हुए रथयात्रा का उत्सव मनाने की अपील की है। नेत्र उत्सव पर पूजा-अर्चना कर सभी को रथयात्रा की शुभकानाएं दी।

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