जामताड़ा, नाइजीरियन, भरतपुर गिरोह हर साल कर रहे लाखों का सायबर फ्रॉड

- हर साल सैकड़ों लोगों को बनाते हैं शिकार .
- एक पैटर्न से ठगी, फिर भी ध्यान नहीं देते लोग .

By: Bhupesh Tripathi

Updated: 25 Jan 2021, 11:42 PM IST

रायपुर . सायबर फ्रॉड करने वाले कई गिरोह और ठग सक्रिय हैं, लेकिन राजधानी रायपुर में सबसे ज्यादा जामताड़ा, नाइजीरियन और राजस्थान का भरतपुर गिरोह ऑनलाइन ठगी कर रहा है। हर साल सैकड़ों लोगों से सायबर फ्रॉड करके लाखों रुपए पार कर रहे हैं। सायबर फ्रॉड करने का सभी गिरोह का तरीका अलग-अलग हैं। हर बार एक ही तरीका होने के बाद भी लोग ठगों के झांसे में आते हैं और आसानी से ऑनलाइन ठगी का शिकार हो जाते हैं।

गिरोह और ठगी का तरीका

जामताड़ा गिरोह - बीमा पॉलिसी, क्रेडिट-एटीएम कार्ड की केवायसी, लिंक भेजना, मोबाइल एप डाउनलोड के अलावा कार्ड नंबर, पासवर्ड आदि तरीके से ठगी करते हैं। सभी तरह की ऑनलाइन ठगी कर सकते हैं।

नाइजीरियन गिरोह - सोशल मीडिया के जरिए देते हैं झांसा। फेसबुक में युवतियों-महिलाओं से दोस्ती करके शादी करने या महंगे गिफ्ट भेजने के नाम पर ठगी करते हैं। मेट्रीमोनियल साइट पर भी सक्रिय रहते हैं।

भरतपुर गिरोह - राजस्थान का भरतपुर ठग गिरोह ओएलएक्स व फेसबुक में सेकंड मोबाइल, वाहन या अन्य सामान बेचने-खरीदने के नाम पर झांसा देते हैं। इसमें खुद के सेना का जवान बताते हुए भरोसा जीतते हैं।

बुलंदशहर गिरोह - सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने, लोन दिलाने आदि के नाम पर लोगों को ठगते हैं।
बिहार गिरोह - अफसरों, नेताओं के फेसबुक फ्रेंडलिस्ट में शामिल लोगों को उनके नाम से फोन करके पैसे की मांग करते हैं।

600 से अधिक अपराध दर्ज
वर्ष 2020 में रायपुर जिले के विभिन्न थानों में सायबर फ्रॉड के 639 अपराध दर्ज हुए हैं। इसके अलावा कई लोग एेसे हैं, जो एफआईआर दर्ज नहीं कराए हैं। पुलिस के मुताबिक हर माह करीब 40 शिकायतें जिले के थानों में आती हैं। कई मामलों में पीडि़तों का पैसा वापस कराया गया है।

कस्टमर केयर के चक्कर में ज्यादा ठगी
लॉकडाउन के बाद ऑनलाइन ठगी ज्यादा होने लगी है। इसकी बड़ी वजह ऑनलाइन खरीदी-बिक्री, भुगतान आदि का बढ़ जाना है। अधिकांश लोग गूगल सर्च इंजन से निकाले गए कस्टमर केयर नंबर के जरिए ऑनलाइन फ्रॉड के शिकार हुए हैं। कस्टमर केयर नंबर की शुरुआत 1800 नंबरों से होती है। इसके बावजूद ठगी का शिकार होने वालों ने प्रचलित मोबाइल नंबरों में कॉल किया, जो ठगों का था। प्रचलित मोबाइल नंबरों के स्थान पर संबंधित की ऑथराइज्ड वेबसाइट में दिए गए कस्टमर केयर नंबर, जो 1800 नंबरों से शुरू होते हैं उन्हीं पर कॉल करें।

राज्य स्तर पर थाना, नहीं हो रही एफआईआर
पुलिस मुख्यालय में राज्य स्तरीय सायबर थाना बना है, लेकिन वहां एफआईआर नहीं हो रही है। आम लोगों को भी वहां तक जाने में दिक्कत होती है। सायबर थाना में सायबर ठगी के मामलों की एफआईआर होने के बाद उसकी जांच बेहतर ढंग से हो सकती है।

दूसरे राज्य का नंबर करते हैं इस्तेमाल
ऑनलाइन ठगी करने वाले काफी शातिर हैं। वे दूसरे राज्य के मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करते हैं, जिससे पुलिस को उनका लोकेशन दूसरे राज्य में मिलता है। झारखंड के जामताड़ा वाले बिहार या पश्चिम बंगाल के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल ठगी करने के लिए करते हैं।

अधिकांश ठगी के मामलों में इन्हीं गिरोह का नाम आया है। आरोपियों को पकडऩे पुलिस हरसंभव प्रयास करती है। सायबर फ्रॉड से बचने के लिए किसी भी अनजान व्यक्ति को मोबाइल में ही अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, क्रेडिट कार्ड संबंधित जानकारी न दें। इंटरनेट से निकाले गए कस्टमर केयर नंबरों का इस्तेमाल भी सावधानी पूर्वक करना चाहिए।

-अजय यादव, एसएसपी, रायपुर

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