झीरम नक्सली हमला: पीड़ित बोले, एनआईए पर भरोसा नहीं, एसआईटी ही करे जांच

25 मई, 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस की चुनावी रैली पर एक कथित नक्सली हमला हुआ था। इसमें कांग्रेस के 13 नेताओं सहित कुल 29 लोग मारे गए और दर्जनों लोग घायल हुए थे। तब राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी।

By: Bhupesh Tripathi

Published: 22 Jun 2020, 02:13 PM IST

रायपुर. सात साल पहले बस्तर की झीरम घाटी में हुए नृशंस नक्सली हमले के पीड़ितोंऔर दिवंगत नेताओं के परिजनों ने एनआईए पर जांच में लीपापोती का आरोप लगाया है। उनका कहना है, उन्हें एनआईए की जांच पर भरोसा नहीं है। उचित होगा, एनआईए राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी को जांच सौंप दे ताकि उन्हें न्याय मिले। झीरम घाटी कांड की जांच के लिए संघर्ष कर रहे दौलत रोहड़ा और कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने जितेन्द्र मुदलियार, तुलिका कर्मा, मोहम्मद साहिद और हर्षित शर्मा के साथ संवाददाताओं से बात की।

राजीव भवन में रविवार शाम हुई बातचीत में उन्होंने कहा, 25 मई, 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में कांग्रेस की चुनावी रैली पर एक कथित नक्सली हमला हुआ था। इसमें कांग्रेस के 13 नेताओं सहित कुल 29 लोग मारे गए और दर्जनों लोग घायल हुए थे। तब राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी। जांच एनआईए को सौंपी गई और न्यायिक जांच के लिए आयोग बनाया गया था। ठीक से एनआईए जांच शुरु होने से पहले केंद्र में यूपीए की सरकार की जगह एनडीए की सरकार आ गई। उसके बाद से ही जांच में लीपापोती शुरू हो गई।

एनआईए और आयोग दोनों की जांच में राजनीतिक षड्यंत्र का एंगल था ही नहीं। एनआईए ने साधारण नक्सली हमले की तरह जांच की। संबंधित लोगों का बयान तक दर्ज नहीं किया गया। विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस ने विधानसभा में मामला उठाया तो मजबूर होकर सरकार ने सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। केंद्र सरकार ने सीबीआई जांच से इनकार कर दिया। लेकिन यह जानकारी रमन सिंह छिपाते रहे। एनआईए ने अपनी जांच पूरी होने की घोषणा कर दी थी लेकिन पूरे सबूतों की जांच नहीं की थी।

सरकार बदलने के बाद जब राज्य सरकार ने एसआईटी गठन की घोषणा की तब एनआईए ने फिर से खानापूर्ति शुरु की है। एक इंस्पेक्टर को तैनात करके हमें भुलावा दे रहे हैं कि जांच हो रही है। पीड़ितों के परिजनों ने कहा, हमसे सबूत सौंपने को कहा जा रहा है. लेकिन हमें एनआईए पर अब भरोसा नहीं रहा। हमें लगता है कि एनआईए राजनीतिक आकाओं के इशारे पर काम कर रही है और कुछ लोगों को बचाना चाहती है।

दौलत रोहड़ा ने कहा, हमारी ओर से हाईकोर्ट में एक याचिका लगाई गई है। ठीक तरह से जांच के लिए हमने दरभा में नए सिरे से एफ़आईआर कराया है। लेकिन अब एनआईए उसे भी अपने हाथ में लेना चाहती है।

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