जोगी बिन अब जोगी बंगला... हर सुख-दुख के साथ बना अंतिम यात्रा का भी गवाह, फूट-फूटकर रोए लोग


अंतिम यात्रा में जुटे हजारों लोग

2003-04 से रह रहे थे सिविल लाइन स्थित बंगले में, जिसे पहले सागौन बंगले के नाम से जाना जाता था

By: ramendra singh

Published: 31 May 2020, 12:17 AM IST

रायपुर . पूर्व मुख्यमंत्री अजीत प्रमोद कुमार जोगी की अंतिम यात्रा जोगी बंगले से शनिवार सुबह 10:30 बजे गृहग्राम जोगीसार (गौरेला-पेंड्रा-मरवाही) के लिए रवाना हुई। वह बंगला जिसे लोग कभी सागौन बंगले के नाम से जानते थे, लेकिन 2003-04 में जब जोगी इसमें रहने पहुंचे तो इसका नाम जोगी बंगला पड़ गया। उनके हर सुख-दुख का गवाह रहा यह बंगला। शनिवार को उनकी अंतिम यात्रा भी इसी बंगले से शुरू हुई।

हजारों प्रशंसक, समर्थक और राजनीति से जुड़े लोग बंगले में मौजूद थे। इस दौरान उनके लिए प्रार्थना का आयोजन किया गया। और फिर उनके अपने वाहन (एंबुलेंस) में उनकी पार्थिव देह रखी गई। इस दौरान जोगीजी अमर रहें, जब तक सूरज चांद रहेगा जोगी तेरा नाम रहेगा... नारे लगे। कई लोग रो पड़े। हमेशा उनके साथ रहने वाले पीएसओ की आंखें भी भर आईं। पत्नी डॉ. रेणु जोगी, बेटा अमित जोगी और बहू हाथ जोड़कर सबको धन्यवाद कह रहे थे। और धीरे-धीरे शव-वाहन उन्हें लेकर गृहग्राम के निकल पड़ा। और पीछे छूट गया जोगी बंगला...। सूनसान, विरान और खामोश जो शनिवार से पहले शायद कभी नहीं रहा। दरवाजे पर एक फ्लैक्स लगा हुआ था, जिसमें मुसकुराती हुई फोटो के साथ लिखा था अजीत जोगी जी अमर रहें...।


कुछ ऐसे भी चहेरे थे जो कभी उनके साथ नहीं दिखे

इस दौरान कई ऐसे भी लोगों को पूर्व मुख्यमंत्री जोगी के अंतिम दर्शन करते आते देखा गया जो कभी उनके साथ नहीं देखे गए। इनमें कई अफसर थे। कई अफसर से नेता बनने वाले भी थे। ये चुपचाप आए, नमन किया और चले गए। बिल्कुल संभव है कि ये जोगी के किसी न किसी गुण के मुरीद रहे हों।

ramendra singh Desk
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