चाइनीज कपड़ों को टक्कर देगा खादी

रणनीति : खादी ग्रामोद्योग बोर्ड और खादी आयोग ने बनाई विस्तृत कार्ययोजना

By: ramendra singh

Published: 09 Jul 2020, 11:11 PM IST

रायपुर. प्रदेश में चाइना से आयात होने वाले 600 करोड़ से अधिक के कपड़े के कारोबार को हतोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार का खादी आयोग और राज्य सरकार के छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड मिलकर मुकाबला करने को तैयार है। राज्य सरकार ने खादी ग्रामोद्योग बोर्ड ने खादी वस्त्र और ग्रामोद्योग सामग्रियों के स्टॉल को शॉपिंग मॉल, विश्वविद्यालय और कॉलोनियों में प्रदर्शनी और शिविर के माध्यम से लोगों में जनजागरूकता फैलाने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार के विभागीय अधिकारियों से मिली जानकारी अनुसार चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना अंतर्गत 26 करोड़ 61 लाख रुपए के अनुदान से 887 इकाई स्थापित कर 7096 लोगों को रोजगार देने एवं मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना अंतर्गत 6 करोड़ 94 लाख 83 हजार रुपए के अनुदान से 661 इकाई स्थापित कर 3966 लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है। इसी प्रकार 5 करोड़ रुपए के खादी वस्त्र उत्पादन और 590 कत्तिन-बुनकरों को रोजगार देने का लक्ष्य रखा गया है। खादी आयोग ने भी 20 से 25 करोड़ के बीच बजट खादी के लिए बजट निर्धारित किया है।

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जांजगीर-चांपा के कोसे की डिमांड विदेशों तक

प्रदेश के जांजगीर-चांपा के कोसे साड़ी की डिमांड अमरीका, जापान, चीन, सिंगापुर सहित दिल्ली, मुंबई, कोलकाता आदि बड़े शहरों में हैं। देश के बड़े निर्यातकों के जरिए विदेशों में हर साल बड़ी मात्रा में छत्तीसगढ़ के कोसे की साड़ी की चमक बिखर रही है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक खादी और कोसे को बढ़ावा मिलने से विदेशी बाजार में छत्तीसगढ़ की मौजूदगी दर्ज कराई जा सकती है।

स्वरोजगार के लिए 25 लाख रुपए तक के ऋण

छत्तीसगढ़ खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा ने बताया कि विभिन्न आयोजनों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को कुटीर उद्योग की स्थापना से स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने और स्वावलंबी बनाने के लिए अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराने की रणनीति बनाई गई है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के बेरोजगार युवक-युवतियों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने और विभागीय योजनाओं के माध्यम से 25 लाख रूपए तक (35 प्रतिशत अनुदान सहित) बैंकों से ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।

मुंबई, दिल्ली, कोलकाता के जरिए चाइना से कारोबार

रायपुर थोक कपड़ा व्यापारी संघ के अध्यक्ष चंदर विधानी के मुताबिक दिल्ली, मुंबई, कोलकाता पोर्ट के जरिए चाइना से आयात होने वाले कपड़ों में देश के भीतर ब्रांड चिपकाया जाता है। ये कपड़े देश के भीतर उत्पादित कपड़े से सस्ते होते हैं। इसलिए कारोबारियों को इसमें ज्यादा मार्जिन मिलती है। भारत-चीन के बीच उपजे विवाद के बाद कारोबारियों ने इस साल ऑर्डर नहीं दिया है। निश्चित तौर पर खादी को बढ़ावा देने से चाइनीज कपड़े के कारोबार को चुनौती दी जा सकती है। इस पर बड़े स्तर पर काम होना चाहिए। बीते 5 वर्षों के भीतर खादी, कोसे के कपड़े और भारतीय परिधानों की डिमांड में पांच गुणा की बढ़ोतरी हुई है।

ramendra singh Desk
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