झन बेचव खेत-खार ल

झन बेचव खेत-खार ल

Gulal Prasad Verma | Publish: Jul, 13 2018 09:20:09 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

खेती के बिनास ल रोकव

धान के कटोरा हमर छत्तीसगढ़ म जगा-जगा फेक्टरी के लगे से परदूसन से खेती जमीन ह बंजर होवत जावत हे। खेत-खार बेचाय ले खेती-किसानी कमतियावत जावत हे। कतकोन किसान जादा भाव जमीन के मिले के लालच म अपन उपजाऊ खेत ल फेक्टरी वालेमन ल बेचत जावत हें। खार म फेक्टरी लगथे त तीर-तार के खेत ल फेक्टरी के मतलाहा पानी अउ परदूसन से नुकसान होथे। तहां ले हतास होके उहू किसानमन अपन खेत ल बेच देथें। अइसे-अइसे करके हमर परदेस के खेत-खार म फेक्टरी बनत जावत हे। परदेस म कोनो कोती जावव इही हाल दिखते।
किसानमन अपन खेती जमीन ल नइ बेचहीं तभे जमीन बाचही। सरकार ल सबो जगा म फेक्टरी नइ लगाय बर चाही। गांव-सहर ले दूरिहा बंजर जमीनमन म फेक्टरी लगाय बर चाही। ऐकर ले उपजाऊ जमीन बाचही। किसान, बनिहारमन के पुरखौती काम-बुता बांचही। गांव के संस्करीति, तीज-तिहार अउ गाय-गरुवा घलो नदाय ले बाचही। हमर धान के कटोरा ह कभु रिता नइ होही।
बिकास के नांव म कहूं, कुछु, कभु बिनास नइ होय बर चाही। बिकास खातिर फेक्टरी, सड़क, सहर, कालोनी बनाय ले मनखे के संगे-संगे जीव-जंतु, चिरई-चिरगुन संस्करीति, परंपरा, जल, जमीन, जंगल, हवा, रूख-राई ककरो नुकसान नइ होय बर चाही। छत्तीसगढ़ के जादाझन लोगनमन के जिनगी, काम-बुता, आमदनी, संस्करीति के अधार खेती-किसानी लेे जुरे हावय। खेती-किसानी के बिना इहां के लोगनमन ल ठूठवा रूख बरोबर जान। तेकर सेती इहां खेत-खार ल बचाय के खच्चित जरूरत हे।
फेक्टरी-कारखाना बाढ़े ले खेती-किसानी, गांव-गंवई, जंगल-झाड़ी कमतियावत हे। जंगल काट के फेक्टरी लगावत हें। उहां रहवइयामन ल जंगल लेे निकालत हें। कतको वनबासी बिना जमीन के बसुंदरा कहात मरत हे। खेती-किसानी के भुइंया के कमी ले कीमत मड़माड़े बाढ़े हे। गांव-गंवई के किसान, बनिहारमन बर तो रोजगार कमतिया गे हे। वोमन ल कमाय-खाय बर दूसर परदेस जाय बर परत हे। फेक्टरी बने ले गांव के संस्करीति ह घलो मेटावत जावत हे।

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