60 रुपए के चक्कर में प्रदेश में हो रही जमीन की धोखाधड़ी

रजिस्ट्री के दौरान पूरी प्रक्रिया के मिलते हैं 60 रुपए, निजी कंपनी को मिला है जिम्मौं। रजिस्ट्री से पहले नहीं होती पड़ताल, एक ही प्लॉट बिके तीन-तीन लोगों को

By: Devendra sahu

Published: 24 Jun 2020, 06:59 PM IST

रायपुर. वास्तविक मालिक के पहुंचे बिना या एक ही जमीन की दो-तीन बार रजिस्ट्री के केस राजधानी में बढऩे लगे हैं। लोगों में जमीन के वैध दस्तावेज के रूप में रजिस्ट्री की ही मान्यता है और सबसे ज्यादा गड़बड़ी इसी में हो रही है। पंजीयन दफ्तर जांच-पड़ताल किए बिना ही दस्तावेजों के आधार पर शुल्क लेकर रजिस्ट्री कर रहे हैं। इस वजह से एक ही प्रापर्टी की कई बार रजिस्ट्री हो रही है और लोग भटकने लगे हैं। ई-रजिस्ट्री का जिम्मा जिस कंपनी को मिला है, उसे एक पेज के 60 रुपए पूरी प्रक्रिया के लिए मिलते हैं। विभाग की लापरवाही से ऑनलाइन वेरीफिकेशन करने वाले दस्तावेज जैसे पैन कार्ड और आधार कार्ड की भी जांच नहीं की जाती। पूर्व में हुई जमीन और मकानों की रजिस्ट्रियों की भी जानकारी ऑनलाइन होने के बावजूद जांच नहीं होती है। इसका पूरा फायदा भू-माफिया उठाते हैं।

रुक सकती है धोखाधड़ी
रजिस्ट्री से पहले अगर रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी इस बात की पड़ताल कर लें कि प्रापर्टी पहले बिकी तो नहीं और वास्तविक मालिक कौन हैं, तो ऐसे मामले रुक सकते हैं। लेकिन रजिस्ट्री अफसरों ने सफाई दी कि दस्तावेजों की पड़ताल का कोई नियम ही नहीं है। उनका कहना है कि राजस्व विभाग जमीन का नामांतरण समय पर नहीं कर रहा है, इसलिए फर्जी रजिस्ट्री के मामले बढ़ रहे हैं।

300 से ज्यादा मामलों की जांच
राजधानी के गोलबाजार, सिविल लाइन थाना और विशेष अनुसंधान सेल से मिली जानकारी के अनुसार शहर में हर साल फर्जी रजिस्ट्री और जमीन धोखाधड़ी के मामले बढ़ रहे हैं। हर साल औसतन 60 मामले थानों में दर्ज किए जाते हैं। दोनों थानों और सेल में अभी पिछले पांच साल में 300 से ज्यादा मामलों की जांच की जा रही है।

वेरीफिकेशन की सुविधा अभी नहीं है। जो पक्षकार दस्तवेज प्रस्तुत करते हैं, उन्हें स्वीकार कर लिया जाता है। ऑनलाइन वेरीफिकेशन की व्यवस्था के लिए सॉफ्टवेयर अपडेट करना होगा।
धर्मेश साहू, महानिरीक्षक, पंजीयन एवं स्टाम्प

Devendra sahu Desk
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