Last Monday Sawan 2019: सावन का अंतिम सोमवार आपको दे सकता है मनचाहा फल, यह है प्रदोष व्रत का खास महत्व

Last Monday Sawan 2019: सावन का अंतिम सोमवार आपको दे सकता है मनचाहा फल, यह है प्रदोष व्रत का खास महत्व

Bhupesh Tripathi | Updated: 11 Aug 2019, 09:29:50 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

Last Monday Sawan 2019: सावन के महीने का समापन 15 अगस्त को रक्षाबंधन के त्योहार के साथ हो जाएगा।भक्तों के पास आखरी सोमवार का ही मौका है भगवान के भक्ति में लीन होकर मनोवांछित फल प्राप्त करने का।

रायपुर। भगवान शिव को प्रिय सावन (Sawan 2019) के महीने का समापन 15 अगस्त को रक्षाबंधन के त्योहार के साथ हो जाएगा। भक्त सावन के आखरी सोमवार में भगवान शिव की भक्ति में डूबे रहेंगे। केवल एक अहम मौका 12 अगस्त को बाकि है। 12 अगस्त को सावन का सोमवार है। साथ ही शुभ संयोग ये भी है कि इसी दिन प्रदोष व्रत भी है। मान्यता है कि सावन के आखिरी सोमवार के दिन रुद्राभिषेक करने से मनोकामनाएं जरूर पूर्ण होती हैं। यही नहीं, इस दिन भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना करने से बड़े से बड़ा संकट भी टल जाता है।पुत्र की कामना करने वाले लोगों को भी इस व्रत का अलग महत्व है।

sawan

आखिरी सोमवार (Sawan 2019) के दिन प्रदोष व्रत भी
सावन का आखिरी सोमवार होने के कारण 12 अगस्त का महत्व ऐसे भी काफी बढ़ गया है। साथ ही प्रदोष व्रत ने इस दिन को और शुभ बना दिया है। प्रदोष व्रत में भगवान शिव की ही पूजा की जाती है। यह पूजा शाम में की जाती है। प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि के दिन किया जाता है। इसे शुक्ल और कृष्ण दोनों ही पक्षों की त्रयोदशी के दिन किया जाता है। इसलिए इसे तेरस भी कहा जाता है।

 

sawan puja

प्रदोष व्रत (Sawan 2019 ) पर इस बार क्या है पूजा का समय
प्रदोष व्रत पर भगवान शिव की पूजा शाम को ही शुरू करने की मान्यता है। यह शाम का वो समय होता है जब पूरी तरह से अंधेरा भी नहीं रहता है तो दिन की हल्की रोशनी भी बाकी रहती है। इसलिए प्रदोष व्रत में पूजा का शुभ समय हमेशा शाम को ही रहता है। इस बार यानी 12 अगस्तो को प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6.59 बजे से रात 9.10 बजे के बीच का है।

 

sawan 2019

प्रदोष व्रत की पूजा आरंभ करने से पहले स्नान करें और पवित्र कपड़े पहनकर पूजा करने बैठे। संभव हो तो उत्तर-पूर्व की ओर मुंह करते हुए पूजा के स्थान पर बैठें। इसके बाद पांच रंगों से रंगोली बनाए और पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक करें। इस दौरान ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करें। अभिषेक के बाद विधिवत पूजा करें और बेल पत्र, धतुरा, फूल, मिठाई, फल आदि का भोग भगवान शिव को लगाएं।मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत करने से आर्थिक संकटों से जूझ रहे लोगों को विशेष लाभ होता है। अविवाहित लड़के-लड़कियों के लिए भी इस पूजन का महत्व है।

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