सैंपल देकर रिपोर्ट आने तक का नहीं कर रहे इंतजार,नेता,अधिकारी,कर्मचारी और आम लोग घूम रहे खुलेआम

- पहले विदेश से लौटने वालों में वायरस में लोड कम था, अब स्थानीय लोगों में अधिक .
- इनकी लापरवाही पड़ रही प्रदेश पर भारी, देश-प्रदेश के हित में आप ऐसा हरगिज न करें .

By: Bhupesh Tripathi

Published: 29 Jun 2020, 10:39 PM IST

रायपुर. प्रदेश में 14 मई के बाद से जब दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों और अन्य लोगों की वापसी शुरू हुई तो इसे फेज-२ माना गया। इस दौरान लौटे लोगों में वायरस लोड, शुरुआत में विदेश से लौटने वाले यात्रिकों की तुलना में अधिक पाया गया है। यही वजह है कि कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ती ही चली जा रही है। इस दौरान कुछ लापरवाहियां भी उजागर हुई हैं। नेता, अधिकारी-कर्मचारियों से लेकर आम-खास सभी कोरोना सैंपल देने के बाद घूम-फिर रहे हैं, जबकि इन्हें घरों में खुद को आइसोलेट करके रहना है। मगर, ये लोग नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं और कोरोना को फैलने (स्प्रेड) का पूरा मौका मिल रहा है।

'पत्रिका' पड़ताल और स्वास्थ्य विभाग की कांटेक्ट ट्रेसिंग टीम की रिपोर्ट में ऐसे एक नई कई मामले सामने आए जब सैंपल देना वाला संदिग्ध व्यक्ति या तो ड्यूटी पर तैनात था या दुकान में बैठ रहा था या बाजार में घूम-फिर रहा था या बैठकों में शामिल हो रहा था। इन्होंने इस दौरान कई लोगों को संक्रमित किया। ऐसे ही वायरस एक से दूसरे, दूसरे में तीसरे और अन्य व्यक्तियों में पहुंचा है, जिसे 'वायरस ट्रांसमिशन' कहा जाता है। इस चैन को तोड़कर ही वायरस को खत्म किया जा सकता है, अन्यथा नहीं।

सैंपल लेने वाले की तो सुनो
आपका जहां सैंपल लिया जाता है, वहां सैंपल लेने वाला आपसे कहता है। आप संदिग्ध हैं। जब तक रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक घर पर रहें। अलग कमरे में रहें। परिवार के सदस्यों से भी न मिलें। कम से कम उसकी तो सुनो। २-३ इंतजार करने से नुकसान नहीं, सबका फायदा है।

ये हैं लापरवाही के कुछ उदाहरण :
मंदिर हसौद थाने के प्रधान आरक्षक
मंदिर हसौद थाना में पदस्थ प्रधान आरक्षक तबीयत खराब होने की वजह से छुट्टी पर चले गए। इसी दौरान अस्पताल में भर्ती हुए, जहां उनकी कोरोना सैंपलिंग की गई। रिपोर्ट आने के पहले अस्पताल से छुट्टी मिली तो वे साथियों से मिलने-जुलने थाने पहुंच गए। रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो कांटेक्ट ट्रेसिंग हुई। बेटे, पत्नी सहित दो आरक्षक संक्रमित मिले।

डोंगरगांव विधायक
डोंगरगांव विधायक दलेश्वर साहू की 20 जून को कोरोना सैंपलिंग हुई थी। सैंपल देने के बाद भी वे कार्यकर्ताओं से मिलते रहे। इतना ही नहीं, 22 जून को विधानसभा में आयोजित एक बैठक में शामिल होने भी पहुंचे। इसी दिन उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई, तो हड़कंप मच गया। क्योंकि इस दौरान बैठक में विधायक, विधानसभा के सभी अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे। वे कईयों से मिले थे।

रायगढ़ का एक परिवार
रायगढ़ में एक परिवार के दो बच्चे बाहर से आए थे, जिनकी सैंपलिंग की गई थी। इनकी रिपोर्ट नहीं आई तो रिपोर्ट लेने परिवार के सदस्य, जो बच्चों के संपर्क में थे वे जिले के कोरोना कंट्रोल रूम पहुंच गए। हड़बड़ाए स्टाफ ने उन्हें घर जाने को कहा। अगले दिन बच्चों की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। जिसके बाद प्राइमरी कांटेक्ट में 30 से अधिक लोग निकले।

सैंपल लेना इस बात का साफ संकेत है कि आप संदिग्ध हैं। ऐसे व्यक्तियों को तत्काल क्वारंटाइन या फिर आईसोलेट हो जाना चाहिए। मगर, इसका पालन नहीं हो रहा। जब पॉजिटिव आते हैं तो फिर कांटेक्ट ट्रेसिंग की जाती है। ऐसे व्यक्तियों से ही संक्रमण फैलाते हैं। कृपया लापरवाही न करें।
डॉ. कमलेश जैन, सदस्य, राज्य कांटेक्ट ट्रेसिंग टीम, कोरोना कोर कमेटी, स्वास्थ्य विभा

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