scriptLeaders are unable to speak in Delhi, they put pressure on us | दिल्ली में प्रदेश की बात नहीं रख पाते हमारे नेता, हम पर बनाते हैं दबाव | Patrika News

दिल्ली में प्रदेश की बात नहीं रख पाते हमारे नेता, हम पर बनाते हैं दबाव

पत्रिका इंटरव्यूः मशहूर पुरातत्वविद पद्मश्री अरुण कुमार शर्मा की खरी-खरी- हमें कैसे मिलेगा वर्ल्ड हैरिटेज का दर्जा

 

रायपुर

Published: April 22, 2022 11:51:00 am

दिनेश यदु @ रायपुर. वैसे तो छत्तीसगढ़ धान के कटोरे (chhattisgarh rice bowls)के नाम से पूरे देश में मशहूर है, लेकिन कला और संस्कृति के क्षेत्र में भी हमारा राज्य किसी भी राज्य से पीछे नही हैं। छत्तीसगढ़ की धरती में प्राचीन संस्कृति, कला व जीवन जीने की शैली के साथ ही कई रहस्य दबे हुए हैं। समय-समय पर खुदाई होने से अतीत में घटी घटनाओं के सबूत सामने आते हैं। इससे हमे पता चलता है कि हमारे पूर्वज कैसे जीवन यापन करते थे। सिरपुर की बात करें या अभी हाल ही में छत्तीसगढ़ पुरातत्व विभाग (Chhattisgarh Archaeological Department) द्वारा राजधानी रायपुर से 30 किलोमीटर दूर लखौली के पास स्थित रींवागढ़ में की गई खुदाई की। इन स्थानों से जल्द ही वैभवशाली इतिहास से जुड़े तथ्य सामने आने वाले हैं। बुधवार को सुबह 89 वर्षीय मशहूर पुरातत्वविद पद्मश्री अरुण कुमार शर्मा (Archaeologist Padmashree Dr. Arun Kumar Sharma) रीवा उत्खनन स्थल पहुंचे थे। इस दौरान पद्मश्री डॉ. अरुण कुमार शर्मा ने खनन से मिले वस्तुओं की जानकारी साझा की।
Question :- पुरातात्विक उत्खनन में आपकी दिलचस्पी कैसे जगी और उसका उद्देश्य क्या है?
Answer :- मेरे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण काम भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या (Ayodhya, the birthplace of Lord Ram) में है, यह साबित करना था। इस पर अन्य समुदायों द्वारा उनके अपने धार्मिक स्थल का दावा किया गया। लेकिन आज राम मंदिर है, यह साबित हो गया। अब मेरा पूरा ध्यान हमारे प्रदेश पर है, जहां पर कला व संस्कृति का भंडार है, जिसे पूरे विश्व तक पहुंचाना हैं।
दिल्ली में प्रदेश की बात नहीं रख पाते हमारे नेता, हम पर बनाते हैं दबाव
Leaders are unable to speak in Delhi, they put pressure on us
दिल्ली में प्रदेश की बात नहीं रख पाते हमारे नेता, हम पर बनाते हैं दबाव
IMAGE CREDIT: Dinesh Yadu @ Patrika Raipur
Question :- छत्तीसगढ़ में किसी भी पुरातात्विक स्थल को अब तक के वर्ल्ड हेरिटेज का दर्जा क्योें नहीं मिल पाया?
Answer :- हमारे प्रदेश के राजनेता या मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक और विपक्ष के कोई भी जनप्रतिनिधि हमारे धरोहर को लेकर कोई बात दिल्ली तक पहुंचा नहीं पाते हैं। मैंने खुद ही छह वर्ष पहले सिरपुर को विश्व धरोहर के रूप में वर्ल्ड हेरिटेज की सूची में शामिल करवाने की कोशिश की थी। उस समय सिरपुर को छठवें स्थान पर रखा गया था। इस मामले में राजनीतिक कोशिश करनी थी। वहां पर हमारे राजनेता पीछे हो गए थे।
Question :- क्या अभी मिल सकता हैं विश्व धरोहर का दर्जा?
Answer :- अभी भी हमारे पास समय है, हमारे मुख्यमंत्री चाहें तो सिरपुर, रीवा के अलावा केशकाल घाटी के पास पर्वत पर आठ शिवलिंग हैं, वहीं पास में नरसिंह नाथ की प्राचीन प्रतिमा है, जो पूरे भारत में अलग स्थान है। सभी के लिए केन्द्र सरकार को पत्र लिख सकते हैं।
Question :- खुदाई में किन-किन दिक्कतों का करना पड़ता सामना?
Answer :- खुदाई के समय स्थानीय व प्रदेश स्तर के राजनेता दिल्ली में दबाव बनाना छोड़ हम पर ही दबाव बनाते हैं, हमे कहते हैं, छोड़ो इसे, कहां लगे हो। कहकर गांव वालों को आगे कर देते हैं। यहीं की बात है। सिरपुर व रीवा में जब मैंने खुदाई शुरु की तो यहां के स्थानीय नेता व लोग मेरी जमीन है, कहकर काम बंद करने के लिए कहने लगे, पर उस समय मैंने सख्ती दिखाई तब जाकर सिरपुर में खुदाई शुरु हो सकी। रीवा में भी अब ग्रामीण समझ गए हैं कि खुदाई के बाद यह स्थल पर्यटन के लिए विख्यात होगा और उनके आय के साधन भी बढ़ेंगे।
दिल्ली में प्रदेश की बात नहीं रख पाते हमारे नेता, हम पर बनाते हैं दबाव
IMAGE CREDIT: Dinesh Yadu @ Patrika Raipur
Question :- रीवा में मिले रिंग वेल का क्या उपयोग है?
answer :- सिरपुर, आरंग व रीवा के पास से महानदी गुजरती थी, जिसके कारण यहां पर लोगों ने निवास व व्यापार करने के लिए अपनी बस्ती बना ली थी। इस क्षेत्र में करीब 50 टीले होंगे। मैंने खुद ही इसका निरीक्षण किया है। इस क्षेत्र में रिंग वेल मिला है। उससे हमें पता चलता है कि उस काल के लोगों ने पानी संरक्षित करने के लिए कुआं खोदकर उसमें टेराकोटा से गोलाकार रिंग का निर्माण करके कुआं में डालते थे। ये रिंगवेल की प्रथा आज भी है। यहां पर और भी रिंग वेल मिल सकते हैं।
Question :- सिरपुर व रीवा में कौन से प्राचीन अवशेष मिले हैं?
Answer :- सिरपुर में पूरे दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा बौद्ध स्थल मिला है। सिरपुर में राजा महाशिवगुप्त बालार्जुन के हिंदू होने के बावजूद जैन, बौद्ध और शिव वैष्णव समुदाय के लोग संपन्नता और सद्भाव के साथ रहते थे। वही रीवा में प्री मौर्यकालीन, मौर्यकाल व पाषाण काल के चांदी, तांबे के सिक्के मृदभांड के अवशेष और हथियार भी मिले हैं। कुषाण काल की पोटरी मिली हैं, जिसे उस समय के बड़े परिवार इस्तेमाल करते थे। इसके साथ ही बहुत से बर्तनों के प्राचीनतम अवशेष भी मिले हैं। इस क्षेत्र में लगातार 10 वर्षो तक खुदाई करने की जरूरत है|
यह भी पढ़ें - समाज के अपमान से बचने के लिए करना पड़ा दूसरी शादी, आयोग ने लगाई फटकार
यह भी पढ़ें - शेर हो या अमेरिका की मकाउ , सबको देनी पड़ रही ठंडी हवा
यह भी पढ़ें - तपती टिन शेड के नीचे जिंदगी जीने को मजबूर
यह भी पढ़ें - हमर छत्तीसगढ़ में विरासतों का भंडार, फिर भी विश्व धरोहर में शामिल नहीं

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

बड़ी खबरें

नाइजीरिया के चर्च में कार्यक्रम के दौरान मची भगदड़ से 31 की मौत, कई घायल, मृतकों में ज्यादातर बच्चे शामिल'पीएम मोदी ने बनाया भारत को मजबूत, जवाहरलाल नेहरू से उनकी नहीं की जा सकती तुलना'- कर्नाटक के सीएम बसवराज बोम्मईमहाराष्ट्र में Omicron के B.A.4 वेरिएंट के 5 और B.A.5 के 3 मामले आए सामने, अलर्ट जारीAsia Cup Hockey 2022: सुपर 4 राउंड के अपने पहले मैच में भारत ने जापान को 2-1 से हरायाRBI की रिपोर्ट का दावा - 'आपके पास मौजूद कैश हो सकता है नकली'कुत्ता घुमाने वाले IAS दम्पती के बचाव में उतरीं मेनका गांधी, ट्रांसफर पर नाराजगी जताईDGCA ने इंडिगो पर लगाया 5 लाख रुपए का जुर्माना, विकलांग बच्चे को प्लेन में चढ़ने से रोका थापंजाबः राज्यसभा चुनाव के लिए AAP के प्रत्याशियों की घोषणा, दोनों को मिल चुका पद्म श्री अवार्ड
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.