scriptLessons not learned from the fire that broke out at 250 places raipur | पिछले साल 250 जगह लगी आग से नहीं ली सबक, घनी आबादी के बीच फैक्ट्री-गोदाम फिर बने खतरा | Patrika News

पिछले साल 250 जगह लगी आग से नहीं ली सबक, घनी आबादी के बीच फैक्ट्री-गोदाम फिर बने खतरा

मौसम का तापमान दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। इसके साथ ही शहर में आगजनी का खतरा भी बढ़ रहा है। पिछले साल रायपुर जिले में 250 से ज्यादा स्थानों पर आग लगी थी। और इस बार जनवरी से मार्च तक 50 से ज्यादा स्थानों पर आग लग चुकी है। इसमें छोटी और बड़ी आगजनी भी शामिल हैं। आगजनी का सबसे ज्यादा खतरा शहर के घनी आबादी और उनके बीच चल रहे अवैध केमिकल फैक्ट्री, ऑयल फैक्ट्री, प्लास्टिक आइटम, घरेलू गैस सिलेंडर गोदाम हैं। इनमें आग लगने से बड़ी आबादी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा गोलबाजार, एमजी रोड, सदरबाजार स

रायपुर

Published: April 18, 2022 06:30:18 pm

रायपुर.

मौसम का तापमान दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। इसके साथ ही शहर में आगजनी का खतरा भी बढ़ रहा है। पिछले साल रायपुर जिले में 250 से ज्यादा स्थानों पर आग लगी थी। और इस बार जनवरी से मार्च तक 50 से ज्यादा स्थानों पर आग लग चुकी है। इसमें छोटी और बड़ी आगजनी भी शामिल हैं। आगजनी का सबसे ज्यादा खतरा शहर के घनी आबादी और उनके बीच चल रहे अवैध केमिकल फैक्ट्री, ऑयल फैक्ट्री, प्लास्टिक आइटम, घरेलू गैस सिलेंडर गोदाम हैं। इनमें आग लगने से बड़ी आबादी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा गोलबाजार, एमजी रोड, सदरबाजार से प्रमुख व्यवासयिक इलाकों में सड़कों की चौड़ाई पहले ही कम है, उस पर व्यापारी सामान रखकर और संकरा कर देते हैं। इससे फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को भीतर जाने में भी दिक्कत होती है। शहर में आगजनी की बड़ी वजह शार्ट सर्किट और सिलेंडरों से गैस लिकेज है।बढ़ जाती है घटनाएं
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शहर के इंडस्ट्रियल-घनी आबादी में है ज्यादा खतरा
मार्च से जून तक आगजनी की घटना बढ़ जाती है। रायपुर फायर ब्रिगेड स्टेशन में रोज औसत 6 कॉल आते हैं, लेकिन इन चार माह में 8 से 10 कॉल आने लगते हैं। हालांकि कचरे में आग लगने की सूचना भी लोग देते हैं, जिसे स्थानीय स्तर पर आसानी से बुझा लिया जाता है।
आगजनी के प्रमुख कारण1.शार्ट सर्किट

- पैनल बोर्ड में स्पार्किंग-गैस सिलेंडरों से गैस लिकेज

-फैक्ट्री में हैवी मशीनरी का कुलिंग सिस्टम कमजोर पड़ना-बिजली खंभों में अधिक केबल वॉयरों, चिड़ियों का घोंसला

आगजनी में गई थी जानेंपिछले साल राजधानी अस्पताल में आग लगने से 5 लोगों की मौत हो गई थी। इसी तरह कबीर नगर के अवैध घरेलू गैस गोदाम में गैस लिकेज से लगी आग में दो लोगों की मौत गई। इससे पहले तुलसी होटल और शिवानंदनगर की ऑयल फैक्ट्री में भी आगजनी से आठ से ज्यादा लोगों की जान चली गई थी। सिलतरा के कई फैक्ट्रियों में आगजनी से कई लोगों की जान जा चुकी है। इसके अलावा रविभवन, सिलतरा की कोलबिंया केमीकल फैक्ट्री, हीरापुर की इस्पात फैक्ट्री, सरस्वती नगर में केमिकल फैक्ट्री, गंजपारा के सेनेटरी आइटम के गोदाम, मोवा में फोम कारखाना आदि में आगजनी की घटनाएं हो चुकी हैं।
इन इलाकों में खतरा ज्यादागुढ़ियारी, खमतराई, उरला, धरसींवा, टिकरापारा, कोतवाली, गोलबाजार, मौदहापारा, गंज थाना क्षेत्र में घनी आबादी वाला बड़ा हिस्सा है। इन इलाकों में आवासीय कॉलोनियों के बीच में कई अवैध फैक्ट्रियां चल रही हैं, जिनमें खतरनाक केमिकल, प्लास्टिक व फोम, ऑयल, फर्नीचर आदि का काम हो रहा हैं। इनमें ज्वलनशील चीजों का इस्तेमाल ज्यादा होता है। इनमें हल्की चिंगारी लगने से भी आग लग जाती है और तेजी से फैलती है। इन अवैध व्यवसायिक संस्थानों में फायर सेफ्टी सिस्टम, बिजली सप्लाई, सुरक्षा उपाय आदि की जांच कोई नहीं करता। न पुलिस निकलती है और न ही औद्योगिक सुरक्षा विभाग वाले जाते हैं।
शार्ट सर्किट से सबसे ज्यादा घटनाएंशहर में घर, दुकान और ऑफिसों में आग लगने की बड़ी वजह बिजली की वायरिंग में शार्ट सर्किट होना है। राजधानी अस्पताल, रविभवन, कोलंबिया केमिकल फैक्ट्री से अधिकांश आगजनी की घटनाओं में शार्ट सर्किट होना पाया गया है। शार्ट सर्किट भी उन्हीं स्थानों पर होता है, जहां जितनी क्षमता का बिजली कनेक्शन लिया गया होता है, उससे ज्यादा बिजली का उपयोग किया जाता है। दरअसल गर्मी बढ़ने के कारण कूलर, एसी, पंखे चलते हैं। इससे बिजली के वॉयरिंग पर असर पड़ता है।
फायर ब्रिगेड के लिए संकरा रास्ता

शहर का बड़ा हिस्सा घनी आबादी वाला है। इसमें आग लग जाए, तो फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी आसानी से घटनास्थल तक नहीं पहुंच पाती है। जैसे गोलबाजार का इलाका। इसी तरह उरला और खमतराई इलाके में भी ट्रैफिक समस्या के चलते आग बुझाने फायर ब्रिगेड की गाड़ी समय पर नहीं पहुंच पाती है।
वर्सन

गर्मी के मौमस में आगजनी की घटनाएं ज्यादा होती हैं। दूसरे सीजन के मुकाबले इस सीजन में कॉल ज्यादा आते हैं। फायर ब्रिगेड की टीम हर वक्त तैयार रहती है। पिछले साल 250 से अधिक आगजनी की घटनाएं हो चुकी हैं। शार्ट
-दीपक कौशिक, इंचार्ज, फायर ब्रिगेड, रायपुर

एक्सपर्ट व्यू

वायरिंग की जांच करवाते रहेंनॉन स्टेंडर्ड वॉयरिंग की वजह से शार्ट सर्किट की घटना होती है। किसी विद्युत यंत्र में धारा का कम प्रतिरोध से होकर प्रवाह हो जाना शॉर्ट सर्किट कहलाता है। उपभोक्ताओं को चाहिए, वो समय-समय पर अपने घर, दुकान, ऑफिस व गोदाम की वायरिंग की जांच करवाते रहें। एक्सपर्ट की निगरानी में यह काम हो, तो ज्यादा बेहतर होता है।
एचआर नरवरे, सेवानिवृत्त अधिकारी, बिजली कंपनी, छत्तीसगढ़

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