इस सीट पर अब तक एक ही नेता ने बनाया है जीत का रिकार्ड, लेकिन अब बढ़ा सस्पेंस

इस सीट पर अब तक एक ही नेता ने बनाया है जीत का रिकार्ड, लेकिन अब बढ़ा सस्पेंस

Chandu Nirmalkar | Publish: Apr, 22 2019 05:33:32 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

ऐसा इसलिए भी क्योंकि नए चेहरे के सामने पिछले 5 सालों से रायपुर नगर निगम में महापौर का पद संभाल रहे कांग्रेस के प्रमोद दुबे से सीधी टक्कर है। जिसका फैसला रायपुर लोकसभा सीट की जनता 23 अप्रैल को ईवीएम का बटन दबाकर करेगी।

रायपुर. लोकसभा चुनाव में लगातार 6वीं बार जीत का रिकार्ड बनाने वालों की लिस्ट में छत्तीसगढ़ के सांसद रमेश बैस का नाम सबसे ऊपर है। लेकिन इस बार पार्टी ने उसे टिकट नहीं देकर नया दांव खेला है। जिसका फैसला रायपुर लोकसभा सीट की जनता 23 अप्रैल को ईवीएम का बटन दबाकर करेगी। देखना बेहद ही दिलचस्प होगा कि क्या रायपुर की जनता भाजपा के सुनील सोनी पर विश्वास करती है या फिर इसका फायदा विपक्षी पार्टी को मिलेगा। ऐसा इसलिए भी क्योंकि नए चेहरे के सामने पिछले 5 सालों से रायपुर नगर निगम में महापौर का पद संभाल रहे कांग्रेस के प्रमोद दुबे से सीधी टक्कर है।

 

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रायपुर सीट पर है भाजपा का दबदबा
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर लोकसभा सीट में 7 बार सांसद रहने का रिकार्ड रमेश बैस के नाम है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने नई रणनीति के तहत हारने वालों के साथ-साथ जीताउ उम्मीदवारों का भी टिकट काट दिया। अब तक के राजनीतिक कार्यकाल में रमेश बैस को 1991 में विद्याचरण शुक्ल के सामने हार का सामना करना पड़ा। आपको बता दें कि रायपुर लोकसभा सीट में कुल 9 विधानसभा क्षेत्र शामिल है। जिनमें रायपुर ग्रामीण, रायपुर दक्षिण, रायपुर पश्चिम, रायपुर उत्तर, बलौदाबाजार, भाटापारा, धरसींवा, अभनपुर और आरंग (एससी) शामिल है।

 

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रायपुर लोकसभा सीट का राजनीतिक सफर
छत्तीसगढ़ की 11 लोकसभा सीटों में से एक रायपुर सीट सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है। आजादी के बाद 1952 से अब तक यहां कुल 16 चुनाव संपन्न हुए हैं। 1999 तक यह लोकसभा सीट मध्य प्रदेश के अंतर्गत आती थी। साल 2000 में मध्य प्रदेश से अलग होने के बाद बने छत्तीसगढ़ के अंतर्गत आने के बाद यहां से तीन लोकसभा चुनाव हो चुके हैं। 1952 और 1957 में निर्वाचन क्षेत्र के लिए दो सीटें थीं, इसलिए प्रथम और द्वितीय उम्मीदवार दोनों को विजेता घोषित किया गया था। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और इंदिरा गांधी के करीबी सहयोगी विद्या चरण शुक्ला ने इस निर्वाचन क्षेत्र से दो कार्यकाल जीते। बीजेपी के रमेश बैस पिछले बार के चुनावों में यहां से 7 बार जीत चुके हैं. उन्हें केवल 1991 में हार का मुंह देखना पड़ा था और 1996 से 2014 तक लगातार छह बार जीत दर्ज की है।

 

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पिछले चुनाव का ऐसा रहा हार-जीत का अंतर
2004 में 50.30 फीसदी वोटिंग हुई

भाजपा - रमेश बैस - 3,76,029
कांग्रेस - श्यामा चरण शुक्ल - 2,46,510
बीएसपी - डा. हीरामन बंजारे - 32,252
बहुमत- 1,29,529

2009 में 47.00 फीसदी वोटिंग हुई

भाजपा - रमेश बैस - 3,64,943
कांग्रेस - श्यामा चरण शुक्ल - 3,07,042
बीएसपी - विद्यादेवी साहू - 16853
बहुमत- 57,901

2014 में 65.69 फीसदी वोटिंग हुई
भाजपा - रमेश बैस - 6,54,922
कांग्रेस - श्यामा चरण शुक्ल - 4,83,276
आप - संदीप तिवारी - 15,139
बहुमत- 1,71,646

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