शराब बंदी का खुला पोल, महिला लोकसभा प्रत्याशी ही भूल गए महिलाओं का दर्द

शराब बंदी का खुला पोल, महिला लोकसभा प्रत्याशी ही भूल गए महिलाओं का दर्द

Deepak Sahu | Publish: Apr, 25 2019 07:14:37 PM (IST) | Updated: Apr, 25 2019 07:14:39 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

* विधानसभा चुनाव जीतने के बाद शरबबंदी भूल गयी कांग्रेस, लोकसभा चुनाव में नहीं बन पाया मुद्दा

* छत्तीसगढ़ के चार महिला प्रत्याशी भी रहीं निष्क्रिय

रायपुर | छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के लिए मतदान समाप्त हो चुके है। आंकलन लगाया जाए तो दोनों ही पार्टियों ने छत्तीसगढ़ में लोकसभा और विधानसभा के लिए अलग - अलग मुद्दों पर चुनाव लड़ा है। प्रदेश में शराब बंदी को लेकर महिलायों में एक अलग उत्साह देखने को मिलता है, वही लोकसभा के महिला उम्मीदवारों ने इस बार शरबबंदी के मुद्दे को ही हटा दिया था। 23 अप्रैल को लोकसभा के कुल166 प्रत्याशियों का भविष्य EVM में कैद हो चुका है। भाजपा और कांग्रेस के कुल चार महिला उम्मीदवार मैदान में हैं , कांग्रेस के ज्योत्सना महंत कोरबा से और प्रतिमा चंद्राकर दुर्ग से वही भाजपा ने रायगढ़ से गोमती साय और सरगुजा से रेणुका सिंह पर दाव लगाया है।

कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में ग्रामीण तथा शहरी दोनों के स्थानीय मुद्दों को लेकर लोगो के सामने आयी थी और भारी बहुमत से अपनी जीत दर्ज की थी। परन्तु इस चुनाव में वनाधिकार, भूमि अधिग्रहण, शराबबंदी, बेरोजगारी, नक्सलवाद आदि स्थानीय मुद्दों की बात नहीं उठायी गयी।पर इस बार कहा गया कि मामला देश का है इसलिए इसकी चर्चा करना जरूरी नहीं है।

विधानसभा चुनाव में कांगे्रस के चुनावी घोषणा पत्र में शराब बंदी को काफी प्रमुखता से उठाया गया था। इसके माध्यम से महिलाओं को यह संदेश दिया गया था कि कांग्रेस की सरकार शराब के जहर से लोगों को मुक्त कर देगी लेकिन हैरत की बात है कि कांग्रेस सरकार ने शराब तो खुलकर बिकवा रही है। लोगों की अपनी समस्याएं हैं लेकिन उन समस्याओें की बात किसी भी दल ने नहीं उठाई। इसके बाद भी वोटरों ने ताकत दिखाई है। यह लोकतंत्र का शुभ संकेत है।

कोरबा लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार ज्योतसना महंत के द्वारा शराब बंदी और स्थानीय परेशानियों पर पहल न करने का आरोप लगते हुए भाजपा प्रत्याशी ज्योतिनंद दुबे ने जनसंपर्क के दौरान कहा कि आधी-अधूरी घोषणाओं पर अमल करने का दावा करने वाली प्रदेश की कांग्रेस सरकार शराब बंदी के मामले में रटा-रटाया जवाब देती है कि इसके लिए समिति बनाई गई है। लगता है कि समिति की रिपोर्ट पांच साल बाद आएगी तब तक शराब की बिक्री कोचियों के हाथ सौंप दी जाएगी। इसकी तैयारी भी अंदरूनी समिति द्वारा कर लिया गया है।

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