छत्तीसगढ़ के 11 सीटों में चली है RSS की रणनीति, हो सकता है बड़ा फायदा

छत्तीसगढ़ के 11 सीटों में चली है RSS की रणनीति, हो सकता है बड़ा फायदा

Deepak Sahu | Updated: 06 May 2019, 06:46:42 PM (IST) Raipur, Raipur, Chhattisgarh, India

* छत्तीसगढ़ में आरएसएस(RSS) की मेहनत रंग ला सकती हैं, विधानसभा में हार का चेहरा देखने के बाद नहीं छोड़ा कोई कसर लोकसभा(Loksabha Election) के लिए

रायपुर। भाजपा प्रत्याशियों की नैया पार लगाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी कमर कस राखी है।वर्त्तमान में दिल्ली की सभी सातों संसदीय सीटों पर संघ के पदाधिकारियों को जिम्मेदार बताते हुए कमान सौंपी गई है जिनकी देखरेख में बूथ स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है।छत्तीसगढ़ के सभी 11 सीटों में जीत की अपील करते नज़र आ रहे है।

 

छत्तीसगढ़ के 11 सीटों में चली आरएसएस की रणनीति

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए छत्तीसगढ़ के सभी सीटों में आरएसएस ने जमकर मेहनत की है, आरएसएस के इस रणनीति का फायदा भाजपा को इस चुनाव में मिल सकता है। केंद्र में मोदी की सरकार को दोबारा लाने के लिए आरएसएस ने 2014 के रणनीतियों में बदलाव कर काम किया है, छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के बाद प्लानिंग में भारी फेरबदल कर बिना भाजपाईयो के मदद से संघ ने बूथ लेवल को साधने की अचूक रणनीति बनाई थी।

 

विधानसभा में था विरोधी लहर

छत्तीसगढ़ के 2018 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने करारी हार का सामना किया है, कई संघियो का मनना है पंद्रह साल सत्ता में रहने के बाद इस बार छत्तीसगढ़ के चुनाव में विरोध का लहर (Anti-incumbency ) था। यह भी बताया जा रहा है की आरएसएस कही न कही निष्क्रिय थी और भाजपा ने संघ का साथ भी नहीं दिया। भाजपा के पंद्रह साल सत्ता में रहने के बाद सत्ता के खिलाफ विरोधी लहर हावी थी और चुनाव के मुख्य समय में संघ ने भी उत्साह नहीं दिखाया था। संघ और भाजपा के मदभेद का खामियाजा छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ा है।

 

लोकसभा चुनाव से पहले हुई छटनी

लोकसभा चुनाव में भाजपा अपने इतिहास को दोहराने के लिए शेष सीटों पर कई प्रकार की तैयारी कर रहा है।विधानसभा चुनाव में हार का मुख्य कारण कार्यकर्ताओं की लापरवाही भी बताई जा रही है इसीलिए लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश से लेकर मंडल तक के कार्यकर्ताओं की मॉनिटरिंग की गयी थी।
विधानसभा चुनाव में काम न करने वाले कार्यकर्ताओं की सूची बनाकर उन पर खासा ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा लोकसभा चुनाव में भी ऐेसे पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को चिन्हित किया गया है, जिनकी गतिविधियां संदिग्ध है।


हर पोलिंग बूथ तक बनाई है पहुंच

शत-प्रतिशत मतदान कराने का लक्ष्य पूरा करने के लिए आरएसएस ने पोलिंग बूथ स्तर तक पहुंच बनाई है और प्रदेश के तीन चरण के मतदान में भी यही प्लानिंग से कार्य किया गया था, इसके तहत विभिन्न वर्गों (युवा, महिला, बुजुर्ग, व्यापारी, सामाजिक संगठन आदि) के बीच मतदान को लेकर संवाद शुरू कर दिया है। इस संवाद में वोट की ताकत से लेकर देश और समाज से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही है। मुद्दों में खासतौर पर आतंकवाद, नक्सलवाद, भ्रष्टाचार, राष्ट्रवाद आदि प्रमुख हैं।

इन्ही उक्त कारणों से और आरएसएस के प्लानिंग और मेहनत का फल भाजपा को मिल सकता है, प्रदेश में विधानसभा चुनाव का हार अभी भजपा नहीं भूल पाई है।

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