समस्याओं का निराकरण नहीं करती सरकार!

समस्याओं का निराकरण नहीं करती सरकार!

Gulal Verma | Publish: Mar, 14 2018 04:59:47 PM (IST) Raipur, Chhattisgarh, India

लोक सुराज अभियानों और जनदर्शनों के बाद भी जनता हलाकान

रायपुर। छत्तीसगढ़ में फिर से लोक सुराज अभियान शुरू हो गया। जनता को बुनियादी सुविधाएं व सुरक्षा उपलब्ध कराना और उनकी मांगों, समस्याओं का त्वरित निराकरण करना सरकार की महती जिम्मेदारी भी है और कर्तव्य भी।
चुनाव के दौरान सभी राजनीतिक दल जनहित और जनसुरक्षा के बड़े-बड़े वादे भी करते हैं। जनता को सुख, शांति और समृद्धि के सपने भी दिखाते हैं। लेकिन सत्तासीन होते ही ज्यादातर वादे पूरे नहीं किए जाते। जनता को उनके हाल पर छोड़ देने की परिपाटी वर्षों से चली आ रही है। जनता को बार-बार गुमराह करना, उनसे किए वादों को न निभाना, उनकी मांगों-समस्याओं का निराकरण न करना उचित नहीं है। प्रदेश सरकार द्वारा हर वर्ष लोक सुराज अभियान चलाने के बावजूद लोगों की परेशानियां दूर न होना चिंता की बात है।
सरकार को सोचना चाहिए आखिर लोगों की समस्याएं हल क्यों नहीं हो रही हैं? कई अभियानों और जनदर्शनों के बावजूद प्रदेश में 'सुराजÓ और 'सुशासनÓ क्यों नहीं आ रहा? आखिर इसके लिए कौन जिम्मेदार हैं? जब समस्याओं का निराकरण ही नहीं होता है तो फिर इस प्रकार के अभियानों का औचित्य ही क्या है?
जनप्रतिनिधियों, सरकार के नुमाइंदों, नौकरशाहों से गुहार लगाना लोगों की मजबूरी है। लाखों की संख्या में गरीब जनता आवास और रोजगार से वंचित है। हजारों गांवों में सड़क, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। लोगों की जिन्दगी दिनोदिन दूभर होती जा रही है। इसके लिए उनकी किस्मत नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की कर्तव्यहीनता और वादाखिलाफी है। बहरहाल, सरकार को 'लोक सुराजÓ की सार्थकता को फलीभूत करना चाहिए। लोगों की दुख-पीड़ा का त्वरित निदान होना चाहिए। जनता की उपेक्षा को 'जुर्मÓ माना जाना चाहिए। जनहित में ही राजहित निहित है।
जनहित के मामलों में प्रदेश सरकार की 'कथनी और करनीÓ में अंतर का परिणाम है कि साल-दर-साल ग्राम व शहर सुराज अभियान चलाने, राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री जनदर्शन और जिला मुख्यालयों में कलक्टर जनदर्शन लगाने के बावजूद छोटी-छोटी समस्याओं का भी निराकरण नहीं हुआ है। लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। हजारों प्रभावितों व पीडि़तों को न्याय नहीं मिल रहा है। उनकी परेशानियां दूर नहीं की जा रही हैं।
जनता पागल नहीं है जो बारम्बार कहती है कि अधिकारी-कर्मचारी उनकी समस्याएं नहीं सुनते, मांगें नहीं मानते, सरकार समस्याओं का समाधान नहीं करती। अब लोग समझ चुके हैं कि चाहे भाजपा कांग्रेस से अलग होने का कितनी ही दावा करे, लेकिन दोनों 'एक ही थैली के चट्टे-बट्टेÓ हैं।

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