‘लोकवाणी’ : मुख्यमंत्री रेडियो वार्ता के माध्यम से प्रदेशवासियों से हुए रू-ब-रू

आम जनता के सवालों के दिए जवाब
आदिवासियों की संस्कृति और परंपरा से है छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान: भूपेश बघेल
वनोपजों के कारोबार से जुड़ेंगी 50 हजार महिलाएं
नई औद्योगिक नीति ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़‘ की मूल भावना पर आधारित

Lalit Sahu

December, 0806:39 PM

रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज मासिक रेडियो वार्ता ‘लोकवाणी’ की 5वीं कड़ी की शुरूआत ‘जय जोहार’ के सहज अभिवादन के साथ की। उन्होंने लोकवाणी के माध्यम से प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों, वनांचल तथा आदिवासी अंचलों की जनता से सीधे संवाद पर अपनी प्रसन्नता भी जाहिर की। बघेल ने रेडियो वार्ता के दौरान अमर शहीद वीर नारायण सिंह को याद करते हुए कहा कि उनका बलिदान दिवस 10 दिसम्बर को है। इसी प्रकार 18 दिसम्बर को गुरू बाबा घासीदास की जयंती और 25 दिसम्बर को प्रभु यीशु का जन्म दिवस क्रिसमस है। मुख्यमंत्री ने अमर शहीद वीर नारायण सिंह, गुरु बाबा घासीदास और प्रभु यीशु को नमन करते हुए उनसे प्रदेश की खुशहाली के लिए आशीर्वाद की कामना की।
बघेल ने ‘लोकवाणी’ में आदिवासियों की गौरवशाली संस्कृति और परम्परा, वनोपज पर आधारित उनकी आजीविका, राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जनजातियों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों, आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा आदि विषयों पर प्रदेशवासियों के साथ अपने विचार साझा किए। बघेल ने रेडियो वार्ता में श्रोताओं द्वारा पूछे गए प्रश्नों के जवाब देकर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।

आदिवासियों की संस्कृति और परंपरा से है छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान
मुख्यमंत्री ने लोकवाणी में चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश में लगभग एक तिहाई आबादी अनुसूचित जनजातियों की है। इन्होंनेे अपनी सोच, अपनी परंपरा, अपनी संस्कृति तथा अपने योगदान से छत्तीसगढ़ को एक विशेष पहचान दी है। अनुसूचित जनजाति के लोग अपनी जिन्दगी में रमे होते हैं। अपनी आकांक्षाएं मुखर करने में भी संकोच करते हैं। इसलिए आज के लोकवाणी का विषय ‘आदिवासी विकास-हमारी आस’ अत्यंत महत्वपूर्ण है। बघेल ने नारायणपुर के फरश कुमार तथा रामजी धु्रव के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि हमारी सरकार ने प्रदेश में तेन्दूपत्ता संग्रहण मजदूरी को 2500 से बढ़ाकर 4000 रुपए प्रति मानक बोरा कर दिया है, ताकि संग्राहकों की आमदनी में तुरंत और सीधी बढोतरी हो जाए। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि वर्ष 2019 में 15 लाख मानक बोरा से अधिक तेन्दूपत्ता संग्रहण हुआ, जिसके एवज में 602 करोड़ रुपए मजदूरी का भुगतान किया गया। यह राशि पिछले वर्ष की तुलना में 226 करोड़ रूपए अधिक है।

वनोपजों के कारोबार से जुड़ेंगी 50 हजार महिलाएं
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि प्रदेश में इसके साथ ही हमने लघु वनोपजों के समर्थन मूल्य पर खरीदी का दायरा भी बढ़ा दिया है। पहले सिर्फ 7 वनोपजों की खरीदी करते थे, जबकि अब हमारी सरकार द्वारा 15 वनोपजों की खरीदी की जा रही है। इसके अलावा 3 लघु वनोपजों, रंगीनी लाख पर 20 रुपए किलो, कुल्लू गोंद पर 20 रुपए किलो तथा कुसमी लाख पर 22 रुपए किलो अतिरिक्त बोनस देने का इंतजाम भी किया गया है। यह जानकार आश्चर्य होगा कि प्रदेश में वनोपज का कारोबार लगभग 18 सौ करोड़ रूपए का होता है, जिसमें हमारे आदिवासी समाज को समुचित भागीदारी नहीं मिली थी। अब हमारी सरकार ने ऐसे नये रास्ते तलाशे हैं, जिससे आप सभी लोगों की आय बढ़ सकेगी। हम आदिवासी समाज में मातृ-शक्ति को और सशक्त बनाना चाहते हैं, इस दिशा में एक नया कदम उठाते हुए यह निर्णय लिया है कि वनोपजों के कारोबार से महिला समूहों की 50 हजार से अधिक सदस्याओं को जोड़ा जाएगा। परंपरागत वैद्यकीय ज्ञान भी छत्तीसगढ़ के वनांचलों की विशेषता है। इस कौशल को लम्बे अरसे में न तो मान्यता मिली और न सुविधा, जबकि जड़ी-बूटियों के औषधीय गुणों को लेकर कोई संदेह नही है। हमने परंपरागत वैद्यों के कौशल और ज्ञान को सहेजने तथा इसे उपयोग में लाने के लिए 1200 परंपरागत वैद्यों का एक सम्मेलन आयोजित किया। अब इस दिशा में कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है।

अबूझमाड़ में पहुंचेगी विकास की रौशनी
मुख्यमंत्री ने लोकवाणी रेडियोवार्ता में कहा कि राज्य सरकार ने पहली बार अबूझमाड़ का राजस्व सर्वे करने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार प्राथमिकता से यहां सडक़, बिजली, पानी, अस्पताल और शिक्षा जैसी सारी सुविधाएं पहुंचाएगी। इस समय नारायणपुर-ओरछा, नारायणपुर-धौड़ाई-कन्हार गांव-बारसूर, नारायणपुर-सोनपुर-कोंगे जैसी अनेक सडक़ों का निर्माण किया जा रहा है, जिनकी लंबाई लगभग 250 किलोमीटर तथा लागत लगभग 300 करोड़ रुपए है। इसके अलावा भी एक दर्जन से अधिक सडक़ों का निर्माण 150 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है, जिसमें ओरछा-गुदाड़ी-कोडोली-गारपा-आकाबेड़ा-किहकाड़ आदि स्थानों पर पहुंचाना आसान हो जाएगा और करीब 20 करोड़ रुपए की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, कन्या छात्रावास, शाला भवन के कार्य चल रहे है।

आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के बड़े फैसले
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की बागडोर सम्हालते ही सबसे बड़ा फैसला लोहण्डीगुड़ा में आदिवासियों की जमीन वापस करने का था। अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी से गैर-आदिवासी को भूमि क्रय करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। पूर्व में इस प्रकार के जो अंतरण हुए हैं, उनमें भी न्याय दिलाने की पहल की गई है और आदिवासी भूमिस्वामी को पुन: अधिकार दिए गए हैं। अधिसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समाज के सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक अधिकारों का पूर्णत: संरक्षण किया जा रहा है। पैसा कानून के अंतर्गत ग्राम सभा की महती भूमिका है। ग्राम सभा की अनुमति के बाद ही सभी शासकीय, अशासकीय भू-अर्जनों की कार्यवाही की जा रही है। शासकीय योजनाओं में सामाजिक अंकेक्षण के माध्यम से ब्यौरा ग्राम सभा में रखा जाता है। सामुदायिक वन आधिकार दिया जाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। कोण्डागांव जिले के 9 गांवों में 9 हजार 220 एकड़ जमीन के पट्टे, धमतरी जिले के नगरी विकासखंड के जबर्रागांव में लगभग साढ़े 12 हजार एकड़ भूमि के सामुदायिक वन अधिकार पट्टे दिए गए। वन अधिकारी कानून के अंतर्गत व्यक्तिगत दावों पर पुनर्विचार किया जा रहा है। दूर-दूर फैले गांवों का नए सिरे से परिसीमन कराकर उन्हें पंचायतों का दर्जा दिया गया है। पंचायत प्रतिनिधियों के निर्वाचन में 5वीं और 8वीं कक्षा की अनिवार्यता समाप्त कर दी है।

जाति प्रमाण-पत्र बनाने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया
बघेल ने रेडियोवार्ता में कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानूनों को प्रभावी बनाने के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। जाति प्रमाण-पत्र बनाने की प्रक्रिया को सरल करते हुए पिता की जाति के आधार पर नवजात को जाति प्रमाण पत्र दिए जा रहे हैं। जिन निर्दोष लोगों को झूठे मामलों, मुकदमों में फसाया गया था उन्हें न्याय दिलाने के लिए जस्टिस पटनायक अयोग काम कर रहा है। सारकेगुड़ा में न्यायिक जांच आयोग का प्रतिवेदन प्राप्त हो गया है, जिसके आधार पर दोषियों के विरूद्ध कानूनी कार्यवाही की जाएगी। बस्तर, सरगुजा आदिवासी प्राधिकरण में विधायकों को प्राधिकरणों के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई है।

किसानों को धान की कीमत 2500 रुपए प्रति क्विंटल मिलेगी
सीएम ने रेडियोवार्ता में कहा कि प्रदेश में धान की खरीदी एक दिसम्बर से प्रारंभ हो चुकी है। राज्य सरकार ने पूरी व्यवस्था कर रखी है कि किसानों की जेब में 2500 रुपए प्रति क्विंटल की दर से पूरी राशि जाए। किसानों को धान का मूल्य 2500 रुपए प्रति क्विंटल की दर से मिलेगा। केन्द्र के नियमों के तहत फिलहाल केन्द्र द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी की जा रही है।

lalit sahu Desk
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