scriptlone vararttu campaign in chattisgarh bastar | "लोन वर्राटू" से टूटी नक्सलियों की कमर, हथियार छोड़ मुख्यधारा में शामिल हो रहे नक्सली | Patrika News

"लोन वर्राटू" से टूटी नक्सलियों की कमर, हथियार छोड़ मुख्यधारा में शामिल हो रहे नक्सली

नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों ने छत्तीसगढ़ में जो रणनीति अपनाई है, उनमें एक प्रमुख अभियान है लोन वर्राटू। नक्सलियों के खिलाफ इस अभियान से सुरक्षाबलों को काफी मदद मिली है। इस लोन वर्राटू अभियान के तहत छत्तीसगढ़ 555 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।

रायपुर

Published: September 14, 2022 07:02:36 pm

रायपुर। 21 वर्ष पहले मध्यप्रदेश से अलग होकर अस्तित्व में आए छत्तीसगढ़ राज्य को नक्सल चुनौती सौगात में मिली है। राज्य के विकास के साथ नक्सलियों ने भी पैर पसारे और उनका आतंक प्रदेश के 18 जिलों तक पहुंच गया। नक्सलियों का बढ़ता आतंक देखकर राज्य सरकार और केंद्र सरकार ने इसे गंभीर समस्या के रूप में लिया और वर्ष 2005 के बाद नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में फोर्स की तैनाती बढ़ाने के साथ विकास की गति बढ़ाई गई।

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नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में फोर्स की धमक और तेजी से हुए विकास कार्यों का सबसे बड़ा असर सरगुजा संभाग में दिखा। 2010 तक वहां के सभी जिले नक्सल मुक्त हो गए। सरगुजा संभाग में अब नक्सलियों का कोई भी सक्रिय संगठन नहीं है। पुलिस अफसरों के अनुसार झारखंड की सीमा से लगे क्षेत्रों में वहां के नक्सलियों द्वारा लेवी वसूली की शिकायतें आती है।

लोन वर्राटू से मिली कामयाबी
नक्सली क्षेत्रों में लोन वर्राटू अभियान से सरेंडर करने में काफी मदद मिली। लोन वर्राटू का हिंदी में अर्थ होता है ‘घर वापस आइए’। इस अभियान के तहत शासन सरेंडर करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास की व्यवस्था भी करती है।

सीमांत इलाकों में जमावड़ा
बस्तर संभाग की सीमा का बड़ा हिस्सा तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, ओडिशा और महाराष्ट्र से लगा है। सरगुजा संभाग की सीमाएं झारखंड से लगी हुई है। इसी तरह दुर्ग संभाग मध्यप्रदेश और बालाघाट से जुड़ी हैं। ये सभी राज्य भी छत्तीसगढ़ की तरह नक्सल प्रभावित हैं। नक्सली इन इलाकों का इस्तेमाल जंक्शन की तरह कर रहे हैं।

नक्सलियों ने किया ओडिशा का रुख
महासमुंद व धमतरी जिले में सक्रिय नक्सलियों ने ओडिशा का रुख कर लिया है। बस्तर संभाग के सात जिलों में से दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर में अब नक्सलियों का खौफ रह गया है। बाकी जिलों के बेहद अंदरूनी हिस्सों से ही नक्सली गतिविधियों की सूचना समय-समय पर आती है।

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