तरबूज के नहीं मिल रहे खरीदार, किसानों को हो रहा लाखों का नुकसान

किसान परेशान

By: AJAY SINGH

Published: 27 Mar 2020, 07:57 PM IST

लवन. महानदी के पाल कछार में 422 एकड़ क्षेत्रफल में फैले132 किसानों ने लगभग 10 हजार टन तरबूज की खेती की है। जिसका मूल्य लगभग 10 करोड़ बताया जा रहा है। लेकिन इस वर्ष कोरोना वायरस के चलते देश प्रदेश में आवागमन बंद होने के कारण तरबूज को कोई ले जाने के लिए तैयार नहीं है। यदि व्यापारी ले जाना चाहते भी हैं तो जिले सीमा में नाकेबंदी के चलते बाहर नहीं ले जा सकते। इससे किसान परेशान हैं चिंतित है। ग्राम तिल्दा के किसानों ने शासन प्रशासन को अवगत कराने के बाद आत्मदाह की चेतावनी दी है। लवन से 5 किलोमीटर दूर महानदी है।
नदी के किनारे ग्राम परसापाली, डोंगरीडीह, डोंगरा, तिल्दा व लाटा के किसानों ने तरबूज की फसल प्रति वर्ष के अनुसार इस वर्ष भी लगाई हैं। लेकिन इस वर्ष कोरोना वायरस के चलते किसाना सिर पकड़ कर बैठे हुए है क्योकि की 1 सप्ताह बीत जाने के बाद भी अब तक कोई व्यापारी खरीदी करने नहीं आया है। किसानों ने शासन से मांग कि हैं की जिस तरह धान का समर्थन मूल्य पर खरीदी की गई थी उसी तरह तरबूज को भी समर्थन मूल्य पर खरीदी की जाए। ग्राम तिल्दा के किसान नारायण घृतलहरें, रामा ईश्वर रामलाल, उत्तम ईश्वर, अमर सिंह, अमृतलाल बंश, राम दीनबंधु, बनसू गणेश, राम सोहन ने बताया कि इस वर्ष कोरोना वायरस के चलते लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है। जिसको सुनने और देखने वाला कोई नहीं है।
प्रति एकड़ लगभग 1 लाख की लागत आती है। इस हिसाब से साहूकार से कर्ज में पैसे लेकर फसल लगाते हैं और साहूकार भी विश्वास में प्रति वर्ष की तरह इस वर्ष भी कर्ज में दिया हैं। यदि 1 सप्ताह के भीतर तरबूज फसल को शासन प्रशासन अथवा खरीदार नहीं मिलती है तो हम आत्मदाह के लिए तैयार हैं। किसानों ने बताया कि इस वर्ष नदी से तरबूज निकालने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे है। इसके चलते कई किसान तरबूज की फसल को नदी में ही मवेशी के लिए छोड़ दिए है।

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