कोरोना से अनाथ हुए बच्चों की स्कूलों फीस भरेगी सरकार, हर महीने मिलेगी स्कॉलरशिप

महतारी दुलार योजना : सीएम भूपेश बघेल ने जारी किया निर्देश, विभाग ने शुरू किया योजना का क्रियान्वन।

By: Bhupesh Tripathi

Updated: 15 Jun 2021, 07:06 PM IST

रायपुर । कोरोनाकाल में अपने माता व पिता को खोने वाले निजी स्कूलों के छात्रों को सहारा देने का निर्णय राज्य सरकार ने लिया है। पीड़ित छात्र अच्छी शिक्षा ग्रहण कर सके और उनके जीविकोपार्जन में उन्हें परेशानी ना हो, इसलिए सीएम भूपेश बघेल ने महतारी दुलार योजना के तहत बच्चों की स्कूल फीस देने और उन्हें हर माह स्कॉलरशिप देने का निर्देश जारी किया है।

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सीएम का निर्देश मिलने के बाद योजना के क्रियान्वन की तैयारी स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने शुरू कर दी हैे। योजना के तहत कक्षा पहली से 8वीं तक 500 रुपए प्रति माह और कक्षा 9वीं से 12वीं तक एक हजार रुपए प्रति माह की छात्रवृत्ति दी जाएगी। सीएम की घोषणा के बाद छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने उनका आभार जताया है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा, कि 10 मई को उन्होंने सीएम बघेल को पत्र लिखकर पीडि़त छात्रों की शिक्षा शुल्क शासन द्वारा जारी करने/ आरटीई श्रेणी में लाने की मांग की थी। सीएम ने छात्रहित में निर्णय लेकर सैकड़ों पीड़ित छात्रों की मदद की है।

123 बच्चों की लिस्ट दी है एसोसिएशन ने
एसोसिएशन के सचिव ने बताया, कि प्रदेश के स्कूलों में पढऩे वाले लगभग 123 बच्चों के माता व पिता की कोरोना संक्रमण की चपेट में आने से मृत्यु हो गई। इन बच्चों की जानकारी जुटाकर सीएम सचिवालय व स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को एसोसिएशन ने भेजी है। इन बच्चों से वर्तमान में निजी स्कूल के संचालक शुल्क नहीं ले रहे हैं। निजी स्कूल एसोसिएशन के निर्देश पर शासन का इंतजार कर रहे थे।

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तीन विभाग की कमेटी की सहमति के बाद मिलेगा लाभ
कोरोना में माता व पिता को खोने वाले बच्चों की मदद करने के लिए राज्य सरकार ने जिला शिक्षा अधिकारी के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग व महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों की टीम का गठन किया है। इस टीम के अधिकारी छात्र की जानकारी जुटाएंगे और रिपोर्ट बनाकर कलेक्टर को सौपेंगे। इस टीम के सहमति के बाद ही छात्रों को शासन की योजना का फायदा मिल पाएगा।

पत्रिका ने उठाया था मामला
निजी स्कूल एसोसिएशन की मांग के बाद पत्रिका ने छात्रहित के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। मामले में पत्रिका ने पीड़ित छात्र और उनके रिश्तेदारों से भी बात की थी। पीड़ित छात्रों और उनके रिश्तेदारों ने राज्य सरकार की योजनाओं का फायदा किस तरह मिलेगा? इस सवाल का जवाब पूछा था। पीडि़त परिवार के सदस्यों ने बताया ने पत्रिका टीम को बताया था, कि परिजनों की मौत के बाद पहली बार पत्रिका ने उनके दर्द को जानने की कोशिश की है। पीड़ितों के दर्द को पत्रिका ने विभागीय अधिकारियों को बताया, जिसके बाद संचालनालय ने कमेटी निर्माण करने का निर्देश जारी किया था।

- कोरोना से माता-पिता को खोने वाले छात्रों के लिए राज्य सरकार ने जो निर्देश जारी किया है। उसके क्रियान्वयन की तैयारी शुरू कर दी है।
- अशोक नारायण बंजारा, जिला शिक्षा अधिकारी, रायपुर।

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