रायपुर के इस युवा ने यूट्यूब में मचाया धमाल, देश-विदेश के छात्रों के लिए बने स्टार टीचर

आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर करते हैं इनके लेक्चर को रेकमेंट, यूट्यूब से लाखों छात्रों को पढ़ा रहे सिटी के मानस

By: Tabir Hussain

Updated: 16 May 2020, 03:20 PM IST

ताबीर हुसैन @ रायपुर। इन दिनों सोशल मीडिया के जरिए लोग कहां से कहां पहुंच रहे हैं इसका अंदाजा रायपुर सड्डू के मानस पटनायक को देखकर लगाया जा सकता है। हमेशा से कुछ बेहतर करने का पैशन लेकर चलने वाले मानस आज इंजीनियरिंग छात्रों के स्टार टीचर बने हुए हैं। आमतौर पर सोशल मीडिया को एंटरटेनमेंट का साधन माना जाता रहा है लेकिन मानस ने इसमें स्टडी करवाकर साबित कर दिया है कि हर चीज का पॉजिटिव यूज किया जा सकता है। वे कहते हैं प्राइवेट कॉलेज में इंजीनियरिंग के छात्रों को पढ़ाते वक्त मुझे इस बात का अहसास हो गया था कि ज्यदातर छात्रों की परेशानी क्या है। आखिर वो कौन सी बातें हैं जिसमें आकर वे रुक जाते हैं। जिन्हें मैं पढ़ाता था उन्हें तो समझा दिया लेकिन देश में ऐसे हजारों छात्र हैं जिन्हें उन लेक्चर्स की जरूरत थी। बस यहीं से मैंने तय किया कि इसके लिए यूट्यूूब एक बेहतर प्लेटफॉर्म है। देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी इनके लेक्चर्स सुनकर हजारों छात्र अपने डाउट्स क्लियर कर रहे हैं। आईआईटी बांबे के प्रोफेसर भी इन्हें रेकमेंट करते हैं। एनआईटी रायपुर के सारे स्टूडेंट इन्हें नाम से जानते हैं। यूट्यूब पर इनके करीब ढाई लाख सब्सक्राइबर हैं। पाकिस्तान के एक छात्रा ने कमेंट बॉक्स में लिखा कि आप जैसे टीचर की वजह से भारत तरक्की कर रहा है। हमने मानस पटनायक से करीब 20 मिनट बात की और उनकी सभी बातों को यहां रख रहे हैं ताकि आप उनके अनुभवों का लाभ ले सकें।

इधर रेस्पांस मिला तो छोड़ दी जॉब

मानस कहते हैं कि मैंने सोचा नहीं था कि इतने छात्र मुझे सुनेंगे। रिकॉर्डिंग से लेकर एडिटिंग तक का काम मैं खुद करता हूं। क्लास लेने से पहले खुद 3 घंटे स्टडी करता हूं। हफ्ते में 4 दिन यूट्यूब के लिए और 3 दिन कोचिंग में पढ़ाने जाता हूं। हालांकि मैंने पैसे अर्न करने के लिए यह शुरुआत नहीं की थी लेकिन यूट्यूब के जरिए अच्छी-खासी अर्निंग भी होने लगी है। पहले संसाधन कम थे लेकिन अब जरूरी इक्युप्मेंट खरीद लिए हैं।

पैशेनेट होंगे तभी कुछ कर पाएंगे

शुरू में जब हम वीडियोज डालते हैं तो जाहिर सी बात है न उसमें व्यूज आते हैं न कमेंट। मैं जिस सबजेक्ट पर कंटेट डाल रहा था उसमें और भी लोग डाल रहे थे। अगर मुझे आगे बढऩा था तो उनसे बेहतर का कंटेट देना था। जितने भी लोग उस वक्त थे मुझसे अच्छे थे। मेरे लिए यह चैलेंज था। जब तक शरीर साथ दे तब तक काम करता था। शुरुआत 2016 से हुई और चार साल हो गए मैंने खुद को अच्छे तरीके से निचोड़ा है। अगर आप सोचते हैं कि यूट्यूब में आते ही अर्न करने लगें तो बिल्कुल गलत बात है। कई बच्चे ये कहते हैं कि पढ़ाई-लिखाई छोड़ दें और यूट्यूब पर फोकस करें तो ये सही नहीं हैं। सबसे पहले तो ज्ञान लेना है, इसके बिना आप कुछ कर नहीं सकते। चुनौतियां तो बहुत है। आपको स्किल डेवलप करनी होगी। पैशनेट होंगे तभी कुछ कर पाएंगे।

यूट्यूबर इन बातों पर ध्यान दें

सबसे पहली बात तो आपको पेेशेंस रखना होगा। कोई भी वीडियो बनाने के बाद उसे देखें कि आप खुद उससे कितने संतुष्ट हैं। वीडियो पर वीडियो बनाने से वह ग्रो नहीं करेगा। वो सटिस्फेक्शन लेवल अचीव करना बहुत ज्यादा जरूरी है। कम्युनिकेशन स्किल को इंप्रुव कीजीए। इसका मतलब सिर्फ अंग्रेजी बोलना नहीं होता। हिंदी में भी अगर आप बेहतर तरीके से बोलेंगे। इसका भी बड़ा असर पड़ता है। किसी भी विषय पर मिरर के सामने बोलिए। 1 मिनट से शुरू होकर 10 मिनट बोलिए। फिर कैमरे के सामने आइए।

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टीचिंग को करता हूं एंजॉय

टीचिंग मेरा पैशन रहा है। मैं टीचिंग को बहुत एंजॉय करता था चूंकि मैं काफी पैशनेट रहा। मैं इसे नेक्स्ट लेवल पर ले जाना चाहता था। टीचिंग में मैं कई एनिमेशन इन्क्लूड करता था। माइक्रोसॉफ्ट पॉवर प्वाइंट में हम काफी सारी चीजें जोड़ सकते हैं। मैंने उन सबको अपनी टीचिंग में इन्क्लृूड किया। शुरू में जब मैं वीडियोज बनाता था तब दिक्कत होती थी। जैसे-जैसे व्यू बढ़ते गए मुझे लगने लगा कुछ तो सही हो रहा है। मैंने अपने अपलोड की फ्रिक्वेंसी बढ़ाई और सिलसिला चल पड़ा।

इन चुनौतियों का सामना करना पड़ा

यूट्यूब में अगर आपको कुछ करना है तो टीचिंग सबसे टफ सेगमेंट है। अगर आप एंटरटेनमेंट के वीडियोज बनाते हैं वो एक अलग चीज होती है। टीचिंग एक सेप्रेट सब्जेक्ट है। इसमें कुछ अच्छा करना है वाकई आपमें कुछ न कुछ क्वालिटी तो लानी पड़ेगी। अगर क्वालिटी नहीं भी है तो कोई दिक्कत नहीं आपको अपने भीतर स्किल डवलप करनी होगी और उसके लिए लगेगी मेहनत। मैं सबसे पहले यह कहता हूं कि आप सीधा वीडियो बनाना मत चालू करो। फॉर टीचर स्पेशली। आप क्लास में पढ़ाइए। मैंने 9 से 10 साल कॉलेज में टीचिंग की है। और हर मरतबा मैं जब भी क्लास रूम में घुसा हूं पूरे पैशन और एनर्जी व डेडिकेशन के साथ मैंने पढ़ाया। जो भी मेरे स्टूडेंट रहे हैं वे कहते हैं कि सर हम आज भी आपको मिस करते हैं।

... तो आगे बढ़कर समझ आएगा कि दोबारा गलती नहीं करनी है
रही बात चैलेंजेस की। तो सबसे पहला चैलेंजेस है कैमरे के साथ फ्रेंडशिप और वह बहुत जल्दी नहीं होती। सालों लग जाते हैं। जब पहले मैं वीडियो बनाता था मेरे पापा के रूम में एक छोटा सा ग्रीन बोर्ड था, उसमें मैं वीडियो बनाया करता था। उन वीडियोज में लाखों व्यूव्ज हैं आज के टाइम में। उस वक्त नोकिया 525 का एक फोन था। उसी से वीडियो बनाया करता था। तब ये माइक वगैरह कुछ नहीं था मेरे पास। हमको ये भी पता नहीं था कि कैमरे की सेटिंग्स क्या होती है। ब्राइटनेस कैसे एडजेस्ट कर सकते हैं। लाइटिंग क्या होती है। साउंड बहुत इम्पार्र्टेंट है। धीरे-धीरे मैं आगे बढ़ते गया मुझे समझ आते गया कि मैं क्या गलती कर रहा हूं। जब आप गलती करेंगे तो आगे बढ़कर आपको समझ में आ जाएगा कि यह गलती दोबारा नहीं करनी है। मैं उसे फॉलो करते गया। फिर मैंने एक माइक खरीदा। एक अच्छा सेल फोन लिया।कई बच्चे यह सोचते हैं कि यूट्यूब चैनल खोलने के लिए डीएसएलआर कैमरा चाहिए। इसकी बिल्कुल जरूरत नहीं। आपका सेल फोन ही अपने आप में पॉवरफुल डिवाइस है। इसी से आप सारा काम कर सकते हैं। जैसे-जैसे आप करते जाएंगे आप को खुद समझ आ जाएगा कि कहां आप गलत जा रहे हैं आपको उसे रिपीट नहीं करना है। दूसरी बात ये कि यूट्यूब का एल्गोरिदम ऐसा है कि आपको वीडियो की फ्रीक्वेंसी मेंटने करनी पड़ेगी। जो भी कंटेट आप डाल रहे हैं वो एक बच्चे के साथ कनेक्ट होना चाहिए। मेरे चैनल में आज की तारीख में भारत के आईआईटी से लेकर अमरीका के एमआईटी तक मेरे स्टूडेंट्स हैं। मेरा कंटेट स्पेशली मैकेनिकल इंजीनियरिंग के लिए है लेकिन कोई भी स्टूडेंट जो फस्र्ट ईयर ऑफ इंजीनियरिंग इंटर करता है उसको कहीं न कहीं से पता चल जाता है कि कोई मानस सर हैं जो उनकी हेल्प कर सकते हैं।चैलेंजेस बहुत आएंगे आपको समझना है।

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तगड़ी प्रिपरेशन करनी होती है
अगर एक घंटे का लेक्चर है तो मैं उसके लिए कम से कम 3 घंटे दे देता हूं। मेरा सीधा सा हिसाब है कि लेक्चर के हॉल में मैं घुसूं तो ज्ञान बिल्कुल पानी और हवा के जैसे बहना चाहिए। आपसे सामने वाली व्यक्ति तक। उसके लिए चाहिए बहुत तगड़ी प्रिपरेशन। कई बार मैं खुद को समझाने का प्रयास करता हूं। अगर मैं खुद को समझाने में कन्वेंस हो जाता हूं तो मेरा यह विश्वास है कि सामने वाले बच्चे को भी अच्छे से कन्वेंस कर पाऊंगा। मैं कंटीन्यू अपने आप से प्रश्न करते जाता हूं खुद को समझाते हुए। मैं खुद कन्वेंस हो गया तो मैं वीडियो बनाता हूं। वीडियो के लिए बहुत से टूल्स हैं। आज का जमाना बहुत आगे बढ़ गया है। माइक्रोसॉफ्ट पावर प्वाइंट में काफी टूल्स हैं खासतौर टीचर्स के लिए आप चाहो तो मेरे चैनल पर देख सकते हैं। पावर प्वाइंट को एक अलग ही लेवल पर लेकर गया है मैंने।कॉम्पीटिशन तब भी था, आज भी है लोगों को पता कैसे चलेगा कि आपका यूट्यूब चैनल है। आज तो बहुत कॉम्पीटिशन है। यूट्यूब ने एक बैंचमार्क लगा दिया है कि 1000 सब्सक्राइबर होने चाहिए और 4000 घंटे का वॉचटाइम। मेरे टाइम में ऐसा नहीं था लेकिन कॉम्पीटिशन तो तब भी था। यूट्यूब को लेकर मैं कभी कॉन्फिडेंट नहीं था इसलिए मैंने अपनी प्राइवेट जॉब नहीं छोड़ी। मैं सुबह 9 बजे घर से निकलता था और शाम 6 बजे तक लौटता था। उसके बाद मैंने कई बार ट्यूशन क्लासेस भी ली हैं। इसके बाद रात के 2 बजे तक, जब तक मैं काम कर सकता था करता रहा।

बनानी पड़ती है स्किल

मैंने किसी एनआईटी या आईआईटी से पढ़ाई नहीं कि बल्कि प्राइवेट संस्थान आरआईटी से स्टडी की है। ऐसा कोई जरूरी नहीं कि किसी प्राइवेट संस्था से पढ़ें हैं तो आप आगे नहीं बढ़ सकते या आपमें स्किल नहीं है। आपको स्किल बनानी पड़ेगी। पैरेंट्स ने कभी रोका टोका नहीं। अपना काम करता रहा। जब लगा कि जॉब छोड़ देनी चाहिए छोड़ दी।

कैमरे के पीछे खड़ी रहती थी मम्मी
पैरेंट्स का इतना सपोर्ट रहा है कि मम्मी कई बार कैमरे के उस पार खड़ी रहीं हैं और वे देख रही हैं कि सब कुछ सही रिकॉर्ड हो रहा है या नहीं। मैं चाहता हूं कि बाकी पैरेंट्स भी सपोर्टिव हों लेकिन सबसे पहले आपको अपना पैशन, डेडिकेशन, आपके भीतर वह स्पार्क होना चाहिए जो पैरेंट्स को नजर आए। वो दिखेगा तो पैरेंट्स बिल्कुल आपका सपोर्ट करेंगे।

नर्वसनेस होनी चाहिए
चैलेंज की बात करूं तो आज भी जब मैं वीडियो बनाता हूं तो मैं नर्वस हो जाता हूं। मेरा पसीना निकलता है। वो नर्वसनेस होना चाहिए वो अच्छी बात है। अगर वो नहीं रहेगा तो कहीं न कहीं आपके अंदर वो आग नहीं है। वो खत्म हो रही है। डेली नर्वसनेस होनी चाहिए। मैं कोशिश करता हूं कि कल से बेहतर काम आज करूं।

एक्सरसाइज भी जरूरी है

मेरी शादी हो चुकी है। फिल्में तो मैं देखते रहता हूं जैसे सारे बंदे देखते हैं। मुझे रितिक रोशन काफी पसंद है। काम से फ्री होने के बाद एंटरटेनमेंट जरूरी है। घूमना-फिरना जरूरी है। एक्सरसाइज भी जरूरी है। अपने मोबाइल को कभी साइड मे रखना भी जरूरी है। कई बार क्या होता है कि मैं पढ़ाई करता रहता हूं और फोन बज जाता है। फोन बजना मतलब किसी ने आपको कॉल नहीं किया है। हो सकता है कोई नोटिफिकेशन आया हो तो हम उसमें उलझ जाते हैं। मोबाइल खोलते ही वीडियो देखने लग जाते हैं। वाट्सऐप के स्टेटस देखते हैं। इसलिए समय का सदुपयोग करने के लिए मोबाइल को साइड में रखना भी जरूरी होता है। कई बार तो पढ़ाई के दौरान मैं अपने दोनों फोंस मॉम को दे देता हूं।

देखता रहता हूं कमेंट

कमेंट के लिए टाइम कैसे देते हैंरात 9 से 10 के बीच टाइम देता हूं और एक नजर दौड़ा लेता हूं। यूट्यूब क्रिएटर ऐप है। दिनभर के सारे कमेंट देख सकते हैं। जो पसंद आता है हार्ट कर देता हूं। वाट्सऐप ग्रुप है साउथ अफ्रीका के बच्चों का। जितना समय मेरे पास है मैंने पढ़ाई, ज्ञान और इंजीनियरिंग के लिए समर्पित कर दिया।

सोचा नहीं था क अर्न भी कर पाऊंगाअच्छी-खासी अर्निंग हो सकती है

2018 से पहले मैंने सोचा भी नहीं था कि इससे मैं कुछ अर्न भी कर पाऊंगा। लेकिन अच्छी खासी अर्निंग होती है। हमको तो ये भी नहीं पता था कि उसमें एड हमको लगाने हैं। पहले का जमाना अलग था। आज का एल्गोरिदम अलग है। यूट्यूब में मल्टीपल एड लगाने का ऑप्शन रहता है। मुझे इसके बारे में बहुत बाद जानकारी मिली। मानलो आधे घंटे का वीडियो है, आज चाहो तो बीच में उसमें 3 एड लगा सकते हैं। हालांकि अर्निंग का कोई फिक्स मापदंड नहीं है। ये ऊपर-नीचे होती रहती है। आपको लगातार कोशिश करनी है कि अच्छे से अच्छा कंटेट दे सकें।

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