कोरोना के कर्मवीर: मेडिकल कॉलेज के कम्प्यूनिटी मेडिसीन के डॉक्टर तैयार कर रहे कोरोना से जीतने 'हथियार'

क्वारंटाइन सेंटर निमोरा में रखे जा रहे कोरोना संदिग्ध मरीजों की बीच मौजूद स्वास्थ्य विभाग के स्टॉफ शुरुआत में डर रहे थे। भयभीत थे कि कहीं ये खुद वायरस की चपेट में न आ जाएं। इसके लिए कम्यूनिटी मेडिसीन विभाग के डॉक्टर प्रशांत जायसवाल और डॉ. तृप्ति को काउंसिलिंग के लिए भेजा गया।

By: Karunakant Chaubey

Published: 09 Apr 2020, 11:21 PM IST

रायपुर. एम्स रायपुर, मेडिकल कॉलेजों और कोविड १९ हॉस्पिटलों में डॉक्टर दिन-रात मरीजों के बीच रहकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। अस्पतालों की ओपीडी में भी डॉक्टर अहम रोल अदा कर रहे हैं लेकिन कुछ ऐसे भी सरकारी विभाग हैं जो पर्दे के पीछे रहकर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन्हीं में से एक है, पं. जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज रायपुर का कम्प्यूनिटी मेडिसीन विभाग। जो स्वास्थ्य विभाग को कोरोना की रोकथाम के लिए 'हथियारÓ तैयार कर दे रहा है। जी हां, ये हथियार हैं क्वारंटाइन गाइड-लाइन, ट्रेनिंग गाइड-लाइन, टेस्टिंग मैथ्ड और ट्रीटमेंट स्ट्रक्टर हैं।

बीते तीन महीने से भी अधिक समय से सक्रिय इस विभाग के डॉक्टरों-विशेषज्ञों ने विभागाध्यक्ष डॉ. निर्मल वर्मा के नेतृत्व में अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई है। विभाग के प्रोफेसर डॉ. कमलेश जैन कोरोना कोर टीम का हिस्सा हैं जिन्हें भी कटघोरा में कोरोना नियंत्रण वाली राज्य स्तरीय टीम की कमान दी गई है। डॉ. वर्मा बताते हैं कि एयरपोर्ट में फ्लाइट लैंडिंग के दौरान यात्रियों की काउंसिलिंग के लिए हमारे विभाग के डॉक्टर तैनात किए गए थे।

उनका कहना है कि चुनौती है लोगों को समझाना, उनकी बातों को समझाना और फिर दोनों में तालमेल बैठाकर सरकार की नीतियों का पालन करवाना। जानकारी मुताबिक वायरस के कम्प्यूनिटी स्प्रेड को रोकने के लिए भी इन्होंने सुझाव दिए हैं। डॉ. वर्मा के मुताबिक हम गाइड-लाइन तैयार करते हैं, उसमें शासन को जो भी जोडऩा-घटाना होता है वे आदेशित करते हैं। अभी यह विभाग रेपिड रिस्पोंस को लेकर गाइड-लाइन तैयार कर रहा है।

होटलों में प्रशिक्षण

राज्य सरकार द्वारा हाल ही में होटल पिकाडिली को अधिगृहित किया गया है। यह डॉक्टरों का क्वारंटाइन सेंटर है। अब यहां के स्टॉफ को कैसे सर्विस देनी है, इसकी ट्रेनिंग दी गई। मॉस्क, हैंड ग्लब्स, सेनिटाइजर के इस्तेमाल के बारे में बताया गया। कोरोना क्या है इसे भी समझाया गया।
क्वारंटाइन सेंटर के स्टाफ का डर किया दूर

क्वारंटाइन सेंटर निमोरा में रखे जा रहे कोरोना संदिग्ध मरीजों की बीच मौजूद स्वास्थ्य विभाग के स्टॉफ शुरुआत में डर रहे थे। भयभीत थे कि कहीं ये खुद वायरस की चपेट में न आ जाएं। इसके लिए कम्यूनिटी मेडिसीन विभाग के डॉक्टर प्रशांत जायसवाल और डॉ. तृप्ति को काउंसिलिंग के लिए भेजा गया। इन्होंने सभी को समझाया, जिसके बाद से ये बगैर भय के सेवा दे रहे हैं। वहीं विभाग के डॉक्टरों द्वारा अब तक १२ बार कोरोना प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

 

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Karunakant Chaubey Desk/Reporting
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