कोरोना काल में बढ़ रही मानसिक समस्या,राजधानी में एक सप्ताह में तीन खुदकुशी

- पुलिस को पता नहीं चल पाया खुदकुशी का कारण।
- नाबालिग भी करने लगे हैं खुदकुशी।

By: Bhupesh Tripathi

Updated: 30 Jun 2020, 05:45 PM IST

रायपुर. कोरोना संक्रमण के साथ ही मानसिक बीमारी भी बढऩे लगी है। यही वजह है कि राजधानी में एक सप्ताह के भीतर तीन लोगों ने खुदकुशी कर ली। इसमें एक ह्दय विदारक घटना भी शामिल है, जिसमें राखी की नम्रता साहू ने अपने डेढ़ साल के बेटे के साथ खुदकुशी कर ली। इसके अगले दिन पुरानी बस्ती इलाके में एक नवविवाहिता ने खुद को आग लगाकर खुदकुशी कर ली। गुढिय़ारी इलाके में एक नाबालिग ने भी फंदा लगाकर जान दे दी। यह सब तब हो रहा है, जब रायपुर पुलिस ने महिलाओं के लिए एक विशेष अभियान चला रखा है। चुप्पी तोड़ के नाम से चल रहे इस अभियान के तहत महिलाओं पर हिंसा के साथ उनकी अन्य समस्याओं पर भी फोकस किया जा रहा है।

इसके बावजूद खुदकुशी की घटनाओं ने साबित कर दिया है कि हिंसा और अपराधिक घटनाओं के साथ ही महिलाओं और नाबालिगों की मानसिक समस्याएं पर भी फोकस करना पड़ेगा। पुलिस को इन पहलुओं पर भी काम करना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि घरेलू हिंसा के चलते भी महिलाएं मानसिक समस्याओं का शिकार हो रही हैं।

नाबालिग ने भी उठाया कदम
गुढिय़ारी इलाके में एक नाबालिग ने खुदकुशी कर ली। पुलिस के मुताबिक वह 12 साल की है। इतनी कम उम्र में आत्महत्या जैसा कदम उठाने से परिजन सदमे में हैं। इसी तरह पुरानी बस्ती इलाके में शादी के पखवाड़े भर बाद ही नवविवाहिता ने खुदकुशी कर ली थी। उनके परिजन भी हैरान हैं कि आखिर ऐसा कदम कैसे उठा लिया।

अवसाद होती है बड़ी वजह़
साइकोलॉजिस्ट डा. संजय भारद्वाज बताते हैं कि खुदकुशी का सबसे बड़ा कारण अवसाद होता है। इसके साथ अन्य मानसिक समस्याएं भी सकती है। अवसाद के चलते व्यक्ति निराशा में डूबा रहता है। इसके चलते लोग अक्सर आत्महत्या जैसा कदम उठाते हैं। कई बार तत्कालिक संवेगात्मक कारण भी होते हैं। मानसिक समस्याओं को समझकर सही समय पर इसका समाधान करने से इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है। कई बार अवसादग्ररुत इंसान अपनी बात कह नहीं पाते और न ही कोई समझ पाता है। इसके चलते भी खुदकुशी की नौबत आ जाती है।

चुप्पी तोड़ अभियान
लॉकडाउन में महिलाओं पर घरेलू हिंसा बढऩे का दावा करते हुए रायपुर पुलिस ने एक विशेष अभियान शुरू किया। इस अभियान के तहत पुलिस की महिला टीमें घरेलू हिंसा से पीडि़त महिलाओं की मदद करती हैं। उनकी शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई करती हैं। चुप्पी तोड़ के नाम से चले रहे इस अभियान में 100 से ज्यादा महिलाओं की समस्याओं का निराकरण होने का दावा पुलिस ने किया है। पुलिस का यह भी कहना है कि इसमें महिलाओं की सभी तरह की समस्याओं का निराकरण किया जा रहा है।

इन महिलाओं को नहीं मिली मदद
राखी और पुरानी बस्ती में खुदकुशी करने वाली महिलाओं को पुलिस के इस अभियान का लाभ नहीं मिल पाया है। पुलिस का चुप्पी तोड़ अभियान भी ऐसी महिलाओं को ढूंढ नहीं पा रहा है, जो मानसिक रूप से परेशान हैं। या मानसिक समस्याओं से जूझ रही हैं। यही वजह है कि उन्हें खुदकुशी करना पड़ रहा है।

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